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'डील के लिए गिड़गिड़ा रहा ईरान': ट्रंप ने साझा किया हमले का वीडियो, बोले- 20 गुना ज्यादा ताकत से देंगे जवाब

Thu, 09 Jul 2026 01:50 PM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Thu, 09 Jul 2026 01:50 PM IST
सार

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और कतर पर जवाबी कार्रवाई की है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को नई चेतावनी दी है, वहीं तेहरान ने भी कड़े जवाब और जवाबी कार्रवाई का ऐलान किया है। इस बढ़ते संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी देखने को मिल रहा है।

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Iran begging for deal Trump shares video of attack, says he will respond with 20 times force
डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : एएनआई

विस्तार

मध्य पूर्व में युद्ध एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका के लगातार हवाई हमलों के बाद ईरान ने खाड़ी देशों पर जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव और गहरा गया है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि अमेरिकी सेना ने लगातार दूसरे दिन ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाया तो अमेरिका उससे 20 गुना अधिक ताकत से जवाब देगा।

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बुशेहर समेत ईरान के कई शहरों में क्यों हुए धमाके?
ईरान के सरकारी मीडिया ने दक्षिणी तटीय इलाकों में कई जगह विस्फोटों की पुष्टि की है। इनमें बुशेहर भी शामिल है, जहां ईरान का प्रमुख परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थित है। इसके अलावा चाबहार, कोनारक, बंदर अब्बास और सीरिक जैसे बंदरगाह शहरों में भी धमाकों की खबर सामने आई है। वहीं, दक्षिण-पूर्वी शहर इरानशहर स्थित वायुसेना अड्डे पर भी अमेरिकी सेना ने हमला किया।  
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अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने किन देशों पर पलटवार किया?
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने बहरीन, कुवैत और कतर को निशाना बनाते हुए जवाबी हमले किए। इससे फारस की खाड़ी में जारी तनाव और बढ़ गया तथा युद्ध समाप्त करने के लिए किए गए अंतरिम समझौते पर भी संकट गहरा गया। समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, गुरुवार को ईरान की ओर से किए गए हमले पहले की तुलना में कहीं अधिक बड़े और व्यापक दिखाई दिए। हालांकि, तीनों खाड़ी देशों में किसी बड़े नुकसान की तत्काल पुष्टि नहीं हुई है। कुवैत की सेना ने बताया कि वह लगातार आने वाले ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही मार गिरा रही है।
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ट्रंप ने क्यों कहा कि ईरान समझौते के लिए बेताब है?
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि तेहरान वॉशिंगटन के साथ युद्धविराम और समझौता करने के लिए बेहद उत्सुक है। उन्होंने यह बयान उस वक्त दिया, जब एक दिन पहले ही वह दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम समझौते को 'खत्म' बता चुके थे। राष्ट्रपति के विशेष विमान में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, 'कुछ समय पहले ईरान की ओर से फोन आया था। वे किसी भी कीमत पर समझौता करना चाहते हैं। लेकिन मुझे नहीं पता कि वे इसके योग्य हैं या नहीं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वे समझौते का पालन करेंगे।' हालांकि, ट्रंप ने यह नहीं बताया कि फोन पर किससे बातचीत हुई थी। उन्होंने ईरानी नेतृत्व को "कुछ हद तक पागल" भी बताया।

क्या ट्रंप ने फिर नागरिक ढांचे पर हमले की धमकी दी?
ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर बिजली संयंत्रों, समुद्री जल को मीठा बनाने वाले संयंत्रों (समुद्री जल अलवणीकरण संयंत्र) और ईरान के प्रमुख तेल उत्पादन केंद्र खार्ग द्वीप पर भी हमला कर सकता है। उन्होंने कहा, "जो भी होगा, बहुत तेजी से होगा।" साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी सेना 'काम पूरी तरह खत्म' भी कर सकती है। तीन तेल टैंकरों पर मंगलवार को हुए हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। उस समय ट्रंप ने कहा था कि उनके लिए वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुआ अंतरिम समझौता अब समाप्त हो चुका है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत की प्रक्रिया जारी रहने दी जाएगी।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का रुख क्या है?
दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि अंतरिम समझौते के तहत उसे होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही नियंत्रित करने का अधिकार प्राप्त है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, जो स्थायी शांति समझौते की वार्ता में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं, ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि अमेरिका और ईरान के बीच हमलों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य केवल "ईरानी व्यवस्था" के तहत ही खोला जाएगा। उन्होंने कहा, "अमेरिका अब तक यह नहीं समझ पाया कि धमकी और वादाखिलाफी की कीमत चुकानी पड़ती है। अगर आप हमला करेंगे, तो जवाबी हमला भी झेलना पड़ेगा।"

ईरानी विदेश मंत्रालय ने ट्रंप पर क्या आरोप लगाए?
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने ट्रंप की धमकियों को उनकी कमजोरी का संकेत बताया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, "ट्रंप के आज के बयान, जिनमें उन्होंने ईरानी जनता का अपमान किया और नए हमलों की धमकी दी, ताकत का नहीं बल्कि वर्षों से प्रतिबंधों, धमकियों और बल प्रयोग पर आधारित असफल नीति की स्वीकारोक्ति हैं। अपराधी और हत्यारे ट्रंप से उसी की भाषा में बात करनी होगी, क्योंकि लगता है कि वह ताकत की भाषा ही समझता है।"

विदेश मंत्री अराघची ने अमेरिका को क्या जवाब दिया?
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी अमेरिका पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "ईरान जैसी सभ्य और साहसी जनता के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल उसकी महानता को कम नहीं कर सकता।" उन्होंने आगे कहा, "ईरानी अपनी सभ्यता, संस्कृति और नैतिक मूल्यों के लिए जाने जाते हैं। हम अभद्रता का जवाब अभद्रता से नहीं, बल्कि साहसिक कार्रवाई से देते हैं।"

जहाजों पर हमलों के बाद तनाव क्यों बढ़ गया?
हमलों के बाद तेहरान ने स्पष्ट कर दिया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा। ईरान ने कहा कि वहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लिया जाएगा और जो जहाज तय मार्ग से हटेंगे, उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। हाल के दिनों में ईरानी सेना ने कम से कम तीन जहाजों पर हमला किया, जिसके बाद मंगलवार को अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों को निशाना बनाया।

नाटो शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने क्या चेतावनी दी?
अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा, 'हम आज रात उन्हें जोरदार जवाब देंगे। वे हर दिन समझौते का उल्लंघन कर रहे हैं।' हालांकि, बाद में उन्होंने यह भी कहा, 'जो भी होगा, वह बहुत जल्दी खत्म हो जाएगा।'


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युद्ध के असर से कच्चे तेल की कीमतें क्यों बढ़ीं?
ट्रंप द्वारा युद्धविराम समझौते को 'खत्म' बताए जाने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब आठ प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी चिंता बढ़ गई।

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