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Tariff: टैरिफ रिफंड से भारत को मिल सकते हैं 12 अरब डॉलर, पर सीधे नहीं

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Nitin Gautam Updated Wed, 22 Apr 2026 06:45 AM IST
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सार

अमेरिकी सरकार ने टैरिफ रिफंड वापस करना शुरू कर दिया है। भारत को भी इसमें 12 अरब डॉलर वापस मिल सकते हैं। हालांकि इसमें एक पेंच हैं। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला

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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : PTI
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विस्तार

अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से मनमाने तरीके से वसूले गए टैरिफ की रिफंड प्रक्रिया शुरू कर दी है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा, रिफंड प्रक्रिया के तहत 166 अरब डॉलर से ज्यादा राशि लौटाई जाएगी, जिसमें से करीब 12 अरब डॉलर (1.12 लाख करोड़ रुपये) भारतीय वस्तुओं से संबंधित हैं। यानी रिफंड प्रक्रिया में भारत को 12 अरब डॉलर मिलने की संभावना है, पर सीधे तरीके से नहीं।  
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जीटीआरआई ने कहा, रिफंड की राशि सिर्फ अमेरिकी आयातकों के खाते में जाती है और निर्यातकों का इस पर कोई कानूनी अधिकार नहीं होता। ऐसे में भारतीय निर्यातकों के पास रिफंड का दावा करने का कोई सीधा कानूनी रास्ता नहीं होगा। ऐसे में उन्हें अमेरिकी खरीदारों के साथ सक्रिय रूप से संपर्क करना चाहिए। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, कोई भी शुल्क वापसी व्यावसायिक बातचीत पर निर्भर करेगी। इसके लिए भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी खरीदारों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ना चाहिए। विशेषकर, उन मामलों में जहां पहले की कीमतों में टैरिफ लागत शामिल थी।
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निर्यातक तीन तरीकों से उठा सकते हैं लाभ
टैरिफ रिफंड का सीधा लाभ नहीं मिलने की स्थिति में भारतीय निर्यातक ये रास्ते अपना सकते हैं...
  • रिबेट-शेयरिंग डील : भारतीय निर्यातक अपने अमेरिकी खरीदारों के साथ रिफंड को आपस में बांटने का सौदा कर सकते हैं, जिससे आयातक का रिफंड भारतीय कंपनी के लिए असली नकदी या कीमतों में छूट में बदल जाता है।
  • कीमतों पर फिर से बातचीत : जहां पिछले साल कॉन्ट्रैक्ट की कीमतों में टैरिफ को शामिल किया गया था, अब जब लागत कम हो गई है, तो भारतीय निर्यातक उन समझौतों पर फिर से बातचीत करने का प्रयास कर सकते हैं।
  • भविष्य के ऑर्डर और प्रतिस्पर्धी बढ़त : भारतीय कंपनियां इस अवसर का इस्तेमाल ज्यादा प्रतिस्पर्धी कीमतों पर नए ऑर्डर के लिए बातचीत करने में कर सकती हैं।
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