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पश्चिम एशिया संघर्ष खत्म: ईरान ने की अमेरिका के साथ शांति समझौते की पुष्टि, डील के बाद फिर गिनाई अपनी शर्तें

एएनआई, तेहरान Published by: Devesh Tripathi Updated Mon, 15 Jun 2026 06:05 AM IST
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सार

अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शांति समझौता होने की पुष्टि हुई है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अंतिम और व्यापक समझौते पर आगे बढ़ने से पहले अमेरिका द्वारा युद्ध समाप्त करने, नाकाबंदी हटाने और उसकी जमी हुई संपत्तियों को जारी करने संबंधी वादों के क्रियान्वयन की जांच करेगा। समझौते के तहत आगे 60 दिनों की वार्ता का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें शेष विवादित मुद्दों पर चर्चा होगी।

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ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार

पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष को रोकने के लिए अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने अमेरिका के साथ शांति समझौते की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि तेहरान अंतिम समझौते के लिए प्रस्तावित 60 दिनों की वार्ता अवधि में तभी प्रवेश करेगा, जब वह युद्ध समाप्त करने, नाकाबंदी हटाने और ईरानी संपत्तियों को जारी करने संबंधी वॉशिंगटन की प्रतिबद्धताओं का सत्यापन कर लेगा।


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और तेहरान के बीच शांति समझौता पूरा होने का एलान करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने की घोषणा की है। ईरान के सरकारी प्रेस टीवी के अनुसार, गरीबाबादी ने कहा कि समझौते के आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह का आयोजन शुक्रवार को होगा, जिसके बाद समझौता ज्ञापन सार्वजनिक किया जाएगा।
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ईरान ने शांति समझौते को बताया अपनी जीत
काजेम गरीबाबादी ने कहा, "जिस दुश्मन ने अपने नापाक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए हमला किया था, वह अपने सभी लक्ष्यों में विफल रहा और इस्लामी गणराज्य ईरान ने युद्ध में बड़ी जीत हासिल की। यह समझौता ज्ञापन केवल कूटनीति का परिणाम नहीं है, बल्कि यह ईरान की सैन्य उपलब्धियों का भी ऋणी है। यह उन शहीदों के पवित्र खून का ऋणी है जिन्हें हमने व्यवस्था के दुश्मनों का सामना करते हुए खोया। आधिकारिक हस्ताक्षर के बाद समझौता ज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा। शुक्रवार को आधिकारिक हस्ताक्षर होंगे और दोनों प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुख वार्ता के भविष्य के ढांचे को तय करने के लिए चर्चा करेंगे।"
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उन्होंने कहा कि अगले चरण की वार्ता शुरू करने से पहले ईरान यह सुनिश्चित करेगा कि अमेरिका ने युद्ध समाप्त करने, नाकाबंदी हटाने और संपत्तियां जारी करने संबंधी अपनी जिम्मेदारियां पूरी की हैं या नहीं। गरीबाबादी ने प्रेस टीवी के हवाले से कहा, "60 दिनों की वार्ता में प्रवेश करना अमेरिका द्वारा इन प्रतिबद्धताओं को पूरा किए जाने पर निर्भर करेगा।"

19 जून को होंगे शांति समझौते पर हस्ताक्षर
समझौते के स्वरूप पर और जानकारी देते हुए गरीबाबादी ने कहा कि ईरान ने अपने सभी प्रमुख रुखों को मसौदा समझौता ज्ञापन में शामिल कराया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस दस्तावेज को वॉशिंगटन पर भरोसे के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अल जजीरा के अनुसार, उन्होंने कहा, "यह समझौता ज्ञापन दुश्मन पर भरोसा करने का मतलब नहीं है। हम अमेरिका की प्रतिबद्धताओं के क्रियान्वयन पर नजर रखेंगे।"

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी घोषणा की कि गहन वार्ताओं के बाद एक समझौता हो गया है। एक्स पर एक पोस्ट में शरीफ ने कहा कि दोनों पक्ष सभी मोर्चों पर, जिसमें लेबनान भी शामिल है, सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने पर सहमत हो गए हैं। शरीफ ने कहा कि आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह 19 जून को स्विट्जरलैंड में आयोजित होगा। उन्होंने मध्यस्थता प्रक्रिया में भूमिका निभाने के लिए कतर, सऊदी अरब और तुर्किये का आभार भी व्यक्त किया।

शरीफ के अनुसार, हस्ताक्षर समारोह से पहले कई पूर्व-कार्यान्वयन बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनका उद्देश्य तकनीकी चर्चाओं और समझौते के क्रियान्वयन के लिए आधार तैयार करना होगा।

ईरान के साथ शांति समझौते पर क्या बोले ट्रंप?
यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच शांति समझौता पूरा होने की घोषणा की। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो चुका है। सभी को बधाई। मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खोलने की पूरी अनुमति देता हूं और साथ ही अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को तत्काल हटाने की भी अनुमति देता हूं। दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू कर दीजिए। तेल को निकलने दीजिए।"
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