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Coordinated conflict: यूक्रेन और ईरान ने युद्ध को बना दिया तकनीकी दौड़ का खेल, ड्रोन बने दहशत का पर्याय

Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Sat, 04 Apr 2026 03:36 PM IST
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सार

अमेरिका और ईरान के बीच बीते एक महीने से जारी युद्ध में तकनीकी पहलुओं का जबरदस्त इस्तेमाल हुआ है। इनमें रडार-मिसाइल डिफेंस सिस्टम से लेकर ड्रोन्स तक का इस्तेमाल हुआ। विश्लेषकों का मानना है कि इस संघर्ष में रूस-यूक्रेन युद्ध से काफी समानताएं देखने को मिली हैं। 

US Israel Iran War draws parallel with Russia Ukraine War Technology Drones strategy overlap know more news
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

इधर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप अपनी सेना को दुनिया की सबसे महान, सक्षम, शक्तिशाली सेना बताते हैं और उधर ईरान के ‘चींटी’जैसे ड्रोन उसके स्टील्थ फाइटर जेट की हवा निकाल देते हैं। वायुसेना के पूर्व एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह कहते हैं कि यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू होने के बाद मिलिट्री डॉक्टरिन नई दिशा में बढ़ी थी, लेकिन ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध ने पूरा खेल ही पलट दिया है।
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एनबी सिंह कहते हैं कि ईरान के आसमान में आज अमेरिका का फाइटर जेट गिरा। उसके एक और फाइटर जेट से ईरान के ड्रोन ने ‘डाग फाइट’ की और गिरा दिया। बेमिसाल इंजीनियरिंग का कमाल बनी प्रतिरक्षा प्रणालियों को ध्वस्त कर दिया। सिंह कहते हैं कि युद्ध तो धैर्य और सामरिक रणनीति का खेल है। वह कहते हैं कि मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि आने वाले समय में युद्ध हथियारों की ‘तकनीकी दौड़’ बनेगा। बड़े भारी-भरकम और बड़े बजट वाले अस्त्र शस्त्रों से ज्यादा तकनीकी रूप से दक्ष छोटे हथियार कहर बरपाएंगे। हालांकि सिंह का कहना है कि बड़े हथियारों की जरूरत कभी खत्म नहीं होगी, लेकिन ‘टैक्टिकल वारफेयर’ से युद्ध के खर्चे बहुत हद तक सीमित किए जा सकेंगे।
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युद्ध के मैदान में हाथी को चींटी से डर लगने लगा। पुरानी कहावत सच साबित हो रही है। यूक्रेन ने सबसे पहले तकनीकी दौड़ को शुरू किया था। यूक्रेन की छोटी तकनीक से निपटने के लिए रूस को बड़ा बदलाव करना पड़ा और ईरान के शाहेद और आत्मघाती ड्रोन पर निर्भरता बढ़ानी पड़ी। यूक्रेन की पोर्टेबल मिसाइलों ने रूस के घातक भारी भरकम हथियारों को निशाना बनाना शुरू किया। एफपीवी ड्रोन्स ने 4.5 करोड़ डालर मूल्य की मिसाइलों को धता बता दिया। लाखों डालर के टैंक देखते-देखते तबाह होने लगे। 20 किमी तक हमला करने में सक्षम इन ड्रोन ने पूरी जमीन हिला दी। यूक्रेन ने एर्गोनेमिक असाल्ट राइफलों और लंबी दूरी की स्नाइपर राइफलों से रूस को सोचने पर मजबूर कर दिया।

अब पश्चिम एशिया की बात। अमेरिका के दो बड़े विमान वाहक युद्ध पोत यूएसएस फोर्ड और लिंकन (चलते फिरते युद्ध के मैदान) पर दुनिया की निगाह टिकी थी। पैट्रिएट से लेकर थॉड, इस्राइल के आयरन डोम से लेकर न जाने क्या-क्या? एफ-35 लाइटेनिंग जैसे पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान, टॉम हॉक मिसाइलें, बंकर बस्टर बम, इस्राइल की स्पैरो मिसाइल और अंत में समुद्र के भीतर तबाही मचा देने वाले खतरनाक हथियार। दुनिया भर के रणनीतिक और सामरिक विशेषज्ञों का अनुमान था कि इतनी बड़ी ताकत के आगे ईरान चुटकियों में मसल जाएगा। 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त सैन्य अभियान में ईरान की टॉप लीडरशिप के मारे जाने के बाद सब ईरान के घुटने टेकने का अनुमान लगाए बैठे थे, लेकिन 35 दिन बाद भी ईरान खड़ा है। दुनिया के 100 देश इसके असर से लहूलुहान हैं और अमेरिका-इस्राइल की संयुक्त ताकत अभी अपनी जीत का कोई भरोसा नहीं दे पा रही है।

शाहेद, मोहाजेर ने पश्चिम एशिया में फैलाई दहशत 
ईरान अब तक 580 के करीब बैलिस्टिक मिसाइल दाग चुका है। इसके 1380 के करीब ड्रोन ने अमेरिका, इस्राइल, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन, कतर समेत अन्य की नींद हराम कर रखी है। काफी नीचे से उड़ान भरते हुए यह दुश्मन के ठिकाने को तबाह कर देते हैं। 20 हजार डॉलर में तैयार होने वाले इस ड्रोन का शिकार करने के लिए कई मिलियन डॉलर की मिसाइल दागकर रोज के युद्ध में अरबों डालर का चूना लग रहा है। ईरान का शाहेद-136 हवा में रहकर लक्ष्य खोजता है और उससे टकराकर विस्फोट कर देता है। अब इसके बाद समझ सकते हैं कि राख के सिवा कुछ नहीं बचता। यह भी पता नहीं कि चला कहां से क्या था और इसके रूट्स क्या रहे। ऊपर से घातक हमला। करोड़ों डालर का फाइटर जेट स्वाहा। मोहाजेर ड्रोन तो 2000 किमी तक मार करता है। 24 घंटे उड़ान की क्षमता है। 300 किलोग्राम का विस्फोटक ले जाने में सक्षम  ड्रोन दुश्मन के ठिकाने पर बड़ी तबाही लाने में सक्षम। हालांकि ईरान की मिसाइल क्षमता का भी दुनिया को अंदाजा नहीं था। ईरान के पास ध्वनि की गति से 13-15 गुणा तेज मारक क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल (फत्ताह-1,2, रोक पाना बेहद मुश्किल), खोर्ररमशहर-4(खैबर), दो चरणों वाली 2000 किमी मार करने में सक्षम सेजिल, इमाद और शाहब-3 मिसाइलें हैं।

हर दिन अरबों डालर स्वाहा, ऊपर से तेल और गैस के लिए तरस रही 20 प्रतिशत दुनिया
20 प्रतिशत दुनिया के देशों की चिंता एलपीजी और तेल को लेकर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रति बैरल कीमत 111 डालर को पार कर रही है। वहीं, अमेरिका का हर रोज  का युद्ध का खर्च 1 अरब डॉलर(9000 कोरड़ रुपये) से अधिक का है। एक अनुमान के मुताबिक अब तक अमेरिका के इस युद्ध में 34.5 से 36.5 अरब डॉलर स्वाहा हो चुके हैं। इस्राइल के बारे में अनुमान है कि हर रोज उसे 270 से 300 मिलियन डॉलर तक खर्च करना पड़ रहा है। नुकसान अलग। इस्राइल अक्तूबर 2023 से हमास, हिज्बुल्ला, हूती, ईरान से लड़ रहा है। ईराक और सीरिया में भी बमबारी की है। एक अनुमान के मुताबिक वह 115 अरब डलर से अधिक अब तक स्वाहा कर चुका है। 

सभी की मिलिट्री हार्डवेयर में आएंगे छोटे हथियार
चील, गिद्ध नुमा छोटे और रेडार, निगरानी प्रणाली की पकड़ से दूर रहने वाले हथियार(विनाश के खिलौने) ने दुनिया के सामरिक विशेषज्ञों को चौकाया है। रूस-यूक्रेन और ईरान-इस्राइल-अमेरिका युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ने बड़ी भूमिका निभाई है। हैकिंग और सेंधमारी की तकनीक ने भी काफी हैरान किया है। रूस ने अभी से अपनी सेना में बड़े बदलाव शुरू कर दिए हैं। सैनिकों की राइफल से लेकर ड्रोन तकनीक पर युद्ध को ले जाने की तरकीब अपनाने पर जोर दे रहा है। भारी भरकम टैंक को धता बताने वाले छोटे हथियार की तकनीक विकसित करने में उसके वैज्ञानिक जुट गए हैं।  
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