Trump: तेल संकट पर ट्रंप का अजब-गजब बयान, बोले- जब भी तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो अमेरिका खूब पैसा बनाता है
पश्चिम एशिया संकट की वजह से तेल की बढ़ी कीमतों ने दुनिया को परेशान कर रखा है। कई देश ईंधन की खपत को कम करने के उपाय ढूंढ रहे हैं। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि तेल की कीमत बढ़ने से हम (यूएस) बहुत पैसा बना रहे हैं।
विस्तार
ईरान और इस्राइल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध के चलते दुनियाभर में तेल संकट खड़ा हो गया है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का इस तेज संकट पर अजीबोगरीब बयान सामने आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तेल की बढ़ती कीमतों से अमेरिका को आर्थिक लाभ हो सकता है। ट्रंप ने ईरान को 'दुष्ट साम्राज्य' बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि उसके परमाणु हथियार बनाने की कोशिशें पश्चिम एशिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरता के लिए खतरा बन सकती हैं।
ट्रंप की टिप्पणी
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है इसलिए जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो हमें भी काफी फायदा होता है। फिर भी मेरे लिए सबसे अहम बात यह है कि एक ‘खतरनाक शक्ति’ ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जाए, क्योंकि इससे मिडिल ईस्ट और पूरी दुनिया को खतरा हो सकता है।”
उन्होंने दावा किया, मैं ऐसा कभी होने नहीं दूंगा। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) ने चेतावनी दी है कि ईरान के बढ़ते हमलों की वजह से दुनिया को तेल की सप्लाई में इतिहास की सबसे बड़ी रुकावट का सामना करना पड़ सकता है।बुधवार को ओहियो में ट्रंप ने गैस की बढ़ती कीमतों पर कहा, मैं कहूंगा कि यह हमारी सोच से थोड़ी कम बढ़ी है। फिर भरोसा दिलाते हुए कहा, "यह इतनी कम हो जाएगी कि कोई भी समझ नहीं पाएगा।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान के साथ जारी संघर्ष 13वें दिन में प्रवेश कर गया है। एक दिन पहले ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ युद्ध 'जल्द' खत्म हो सकता है। उन्होंने दावा किया था कि अमेरिकी सेना पहले ही तेहरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान पहुंचा चुकी है। एक्सियोस से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान में अब कुछ भी निशाना बनाने के लिए नहीं बचा है। उन्होंने कहा, थोड़ा बहुत इधर-उधर… जब भी मैं चाहूं, यह युद्ध खत्म हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह संघर्ष उम्मीद से ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के पहले सप्ताह में ही अमेरिका करीब 11.3 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह अनुमान पेंटागन ने कांग्रेस (संसद) को दिया है। यह अब तक इस युद्ध की लागत का सबसे विस्तृत आकलन माना जा रहा है, जबकि युद्ध 13वें दिन में पहुंच चुका है और इसके खत्म होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं।
32 सदस्य देशों के आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर सहमति जताई
बता दें, पश्चिम एशिया संकट के बीच एक अहम फैसले में आईईए के सदस्य देशों ने बुधवार को तेल बाजार में आई बाधाओं को दूर करने के लिए 32 सदस्य देशों के आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर सहमति जताई।इन आपातकालीन भंडारों को प्रत्येक सदस्य देश की राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप समय-सीमा के भीतर बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही कुछ देश अतिरिक्त आपात कदम भी उठाएंगे। भारत ने भी इस कदम का स्वागत किया है।
आईईए सदस्य देशों के पास कुल मिलाकर 1.2 अरब बैरल से अधिक का आपातकालीन तेल भंडार है, जबकि उद्योगों के पास सरकार की बाध्यता के तहत करीब 60 करोड़ बैरल अतिरिक्त भंडार मौजूद है। यह समन्वित रूप से तेल भंडार जारी करने का आईईए के इतिहास में छठा अवसर है। इससे पहले 1991, 2005, 2011 और 2022 में दो बार ऐसा कदम उठाया गया था। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की स्थापना 1974 में की गई थी।
आईईए के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण बाजार की स्थिति का आकलन करने और आपूर्ति बाधाओं से निपटने के विकल्पों पर विचार करने के लिए आईईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने सदस्य देशों की एक विशेष बैठक बुलाई थी, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। 28 फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। वर्तमान में कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों का निर्यात संघर्ष से पहले के स्तर के 10 प्रतिशत से भी कम रह गया है।
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