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West Asia: PAK-अमेरिका के संबंधों में गर्माहट की वजह है ये युवा, जिससे ईरान युद्ध में इस्लामाबाद बना मध्यस्थ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Nitin Gautam Updated Tue, 31 Mar 2026 02:00 PM IST
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सार

पाकिस्तान और अमेरिका के संबंध हाल के समय में काफी बेहतर हुए हैं। आज स्थिति ये है कि पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों में बेहतरी के लिए दरअसल एक युवक का हाथ है, जिनका नाम है बिलाल बिन साकिब। 

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बिलाल बिन साकिब - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बीते साल तक पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बेहद खराब दौर में थी और कूटनीतिक स्तर पर भी पाकिस्तान अलग-थलग पड़ चुका था। अमेरिका और भारत के संबंध लगातार मजबूत हो रहे थे, लेकिन जैसे ही ऑपरेशन सिंदूर हुआ, अचानक से पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों में नई गर्माहट आ गई। दोनों देशों के रिश्तों में न सिर्फ गर्माहट आई, बल्कि अब दोनों के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। आज स्थिति ये है कि पाकिस्तान, ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कराने की कोशिश कर रहा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी देशों में एंट्री कराने के पीछे पाकिस्तानी मूल के एक युवा बिलाल बिन साकिब (35 वर्षीय) का हाथ है। 
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क्रिप्टो डिप्लोमेसी के जरिए अमेरिका के करीब आ रहा पाकिस्तान
दरअसल बिलाल बिन साकिब, वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल से बतौर सलाहकार जुड़े हैं। वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल एक क्रिप्टो प्लेटफॉर्म है और इसके सीईओ अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार स्टीव विटकॉफ के बेटे जेक्री विटकॉफ हैं। इसमें ट्रंप के परिवार की भी हिस्सेदारी है। इस साल जनवरी में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें पाकिस्तान सरकार और वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल के बीच एक समझौता हुआ। इस कार्यक्रम में बिलाल बिन साकिब भी मौजूद रहे। यह एक महज समझौता कार्यक्रम था, लेकिन जिस तरह से पाकिस्तानी प्रधानमंत्री, सेना प्रमुख और पाकिस्तानी सरकार के शीर्ष अधिकारी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे, उससे साफ था कि पाकिस्तान क्रिप्टो डिप्लोमेसी से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के करीब आने की कोशिश कर रहा है। इसके पीछे बिलाल बिन साकिब का ही दिमाग है। 
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कौन हैं बिलाल बिन साकिब
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बिलाल बिन साकिब का ताल्लुक लाहौर से है। वे 'तायबा' नाम की एक संस्था के सह-संस्थापक हैं। यह संस्था पाकिस्तान में पानी की समस्या को हल करने की दिशा में काम करती है। बिलाल की इस संस्था की मदद से पाकिस्तान के कई ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या दूर हुई है। 

बिलाल 'वेब3पाकिस्तान' के भी संस्थापक है। यह पाकिस्तान का पहला और सबसे बड़ा ब्लॉकचेन समुदाय है। बिलाल क्रिप्टो करेंसी के बिजनेस से लंबे समय से जुड़े हैं। बिलाल ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से डिग्री हासिल की है। वे क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के सलाहकार बोर्ड में भी शामिल हैं। बिलाल को किंग चार्ल्स भी सम्मानित कर चुके हैं और उनका नाम फोर्ब्स की 30 अंडर 30 की सूची में भी शामिल रह चुका है। 

बिलाल बिन साकिब ने कॉलेज एडमिशन के लिए, कॉलेज की कैंटीन में काम और टॉयलेट की सफाई जैसे काम भी किए। अब बिलाल बिन साकिब के प्रयासों और ट्रंप और पाकिस्तान सरकार में करीबी का ही नतीजा है कि क्रिप्टो करेंसी पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों का मुख्य आधार बनकर उभरी है। बिलाल बिन साकिब के चलते ही ट्रंप के परिवार के लोगों को पाकिस्तान में रेड कार्पेट स्वागत मिलता है। बिलाल आज पाकिस्तान के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक हैं। 

कैसे एक व्यक्ति के प्रयासों से ट्रंप के करीब आया पाकिस्तान
साकिब ने बीते महीने ट्रंप के निजी क्लब मार ए लागो में जेक्री विटकॉफ और वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल के अन्य अधिकारियों के साथ सेल्फी पोस्ट की थी। उसी दौरान अमेरिका ने मैनहट्टन के रूजवेल्ट होटल के पुनर्निर्माण के लिए पाकिस्तान सरकार के साथ समझौता किया था। साफ है कि जो काम पाकिस्तान के राजनयिक और कूटनीति नहीं कर सकी थी, उसे बिलाल बिन साकिब और उनकी क्रिप्टो डिप्लोमेसी ने कर दिखाया है। अब पाकिस्तान और अमेरिका ऊर्जा, दुर्लभ खनिज और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी मिलकर काम कर रहे हैं। 

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