मिनाब स्कूल धमाका: जांच में टॉमहॉक मिसाइल के इस्तेमाल का संकेत, ट्रंप और ईरान ने जड़े एक दूसरे पर आरोप
ग्यारहवें दिन में प्रवेश कर चुका पश्चिम एशिया संघर्ष अब ट्रंप की चिंता बढ़ाता नजर आ रहा है। कारण है कि बीते दिनों ईरान के एक स्कूल पर हुए हमले को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। सवाल ये उठने लगे हैं कि क्या अमेरिका ने किया था ईरान के स्कूल पर हमला, जिसमें 165 से ज्यादा बच्चियों की मौत हो गई थी?
विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-प्रतिदिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान भी जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब ग्यारहवें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। ऐसे में उग्र होते हालात के बीच बीते दिनों ईरान के मिनाब शहर में हुए एक भीषण धमाके को लेकर नई जानकारी सामने आई है। जांच करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला संभवतः अमेरिका की टॉमहॉक क्रूज मिसाइल से किया गया था। यह धमाका एक स्कूल के पास हमला हुआ, जिसमें 165 से अधिक मासूम बच्चियों की मौत हो गई थी।
बता दें कि यह घटना 28 फरवरी को ईरान के दक्षिणी होर्मोज्गान प्रांत के शहर मिनाब में हुई। यहां एक स्कूल के पास जोरदार विस्फोट हुआ था। यह स्कूल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के एक सैन्य अड्डे के बिल्कुल पास स्थित है।
नया वीडियो में क्या-क्या दावे?
जहां एक ओर इस हमले के चलते दुनियाभर में हलचल तेज हो गई थी। वहीं दूसरी ओर जांच करने वाली संस्था बेलिंगकैट ने एक नया वीडियो विश्लेषित किया है। यह वीडियो उसी दिन रिकॉर्ड किया गया था जब हमला हुआ था, लेकिन इसे बाद में ईरान की समाचार एजेंसी मेहर समाचार एजेंसी ने जारी किया। वीडियो में एक मिसाइल इमारत से टकराती दिखाई देती है और उसके बाद आसमान में काला धुआं उठता नजर आता है।
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ट्रंप ने ईरान पर भी लगा दिया आरोप
हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में कहा कि उनके अनुसार यह हमला ईरान ने खुद किया होगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के पास भी टॉमहॉक मिसाइल हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ईरान के पास यह मिसाइल है। टॉमहॉक मिसाइल अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियॉन बनाती है और इसे जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे कुछ सहयोगी देशों को ही बेचा जाता है। जब पत्रकारों ने पूछा कि उनके प्रशासन में सिर्फ वही ऐसा क्यों कह रहे हैं, तो ट्रंप ने जवाब दिया कि उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है और जो भी आधिकारिक रिपोर्ट आएगी, वह उसे मान लेंगे।
सैटेलाइट तस्वीर में क्या दिखा?
समाचार एजेंसी एपी ने इस वीडियो की लोकेशन की जांच की और पाया कि यह वीडियो स्कूल के पास ही रिकॉर्ड किया गया था। सैटेलाइट तस्वीरों और वीडियो में दिख रहे बिजली के खंभे, इमारत और गाड़ियों से इसकी पुष्टि होती है। इसके साथ ही बेलिंगकैट के शोधकर्ता ने कहा कि वीडियो में दिखाई दे रही मिसाइल टॉमहॉक क्रूज मिसाइल जैसी लगती है। यह मिसाइल आमतौर पर अमेरिकी सेना इस्तेमाल करती है। अभी तक इस युद्ध में इसी मिसाइल का इस्तेमाल अमेरिका द्वारा किए जाने की बात सामने आई है।
अमेरिकी सेना ने स्वीकारी टॉमहॉक मिसाइल के इस्तेमाल की बात
अमेरिकी हमले के शक के पीछे बड़ा कारण यह भी है कि अमेरिकी सेना की कमान संयुक्त राज्य अमेरिका मध्य कमान ने भी स्वीकार किया है कि उसने इस युद्ध में टॉमहॉक मिसाइल का इस्तेमाल किया है।
इसके अलावा अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ मौजूद युद्धपोत यूएसएस स्प्रुअंस से भी 28 फरवरी को टॉमहॉक मिसाइल दागे जाने की तस्वीरें जारी की गई थीं। वहीं एक अमेरिकी अधिकारी ने, नाम न बताने की शर्त पर, बताया कि यह हमला संभवतः अमेरिका द्वारा किया गया हो सकता है। यह अधिकारी सार्वजनिक रूप से बोलने के लिए अधिकृत नहीं था।
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अन्य वजहें भी अमेरिका की ओर इशारा करती हैं
विशेषज्ञों की माने तो अन्य भी कई वजहों के कारण शक अमेरिका की ओर होता है। इसका कारण है कि स्कूल के पास आईआरजीसी का सैन्य अड्डा और नौसेना की बैरक थी। अमेरिका पहले भी इस इलाके में नौसैनिक ठिकानों को निशाना बनाने की बात स्वीकार कर चुका है। दूसरी ओर इस्राइल ने कहा है कि उसने यह हमला नहीं किया और उसके हमले आमतौर पर ईरान के उत्तरी और मध्य हिस्सों में हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून का सवाल
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ ने कहा कि अगर हमला गलती से भी स्कूल पर हुआ है तो भी यह अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी होता है कि लक्ष्य वास्तव में सैन्य है या नहीं। इन सभी चिजों के बाद विशेषज्ञों ने इस बात को लेकर भी चिंता जताई है कि इस घटना की पूरी सच्चाई पता लगाना अभी मुश्किल है, क्योंकि युद्ध के कारण कोई स्वतंत्र जांच एजेंसी मौके पर नहीं पहुंच पाई है। धमाके के बाद मिसाइल के टुकड़ों की तस्वीरें भी सामने नहीं आई हैं। इस वजह से अभी यह मामला पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन नए वीडियो और सैटेलाइट तस्वीरों से अमेरिका की भूमिका पर शक और बढ़ गया है।
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