West Asia: ईरान में अब तक 50 जासूसी के आरोपियों को फांसी; ट्रंप बोले- तेहरान के पास अंतिम अवसर, कब थमेगी जंग?
West Asia: ईरान में जासूसी के 50 आरोपियों को बीते चार महीने में फांसी दी जा चुकी है। इन लोगों को इस्राइल को सैन्य ठिकानों समेत संवेदनशील इलाकों की तस्वीरें भेजने का दोषी पाया गया। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि तेहरान के पास समझौता करने का अंतिम अवसर है। ऐसे में सवाल है कि पश्चिम एशिया में ये जंग कब थमेगी?
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ईरान ने इस्राइल के लिए जासूसी के आरोप में सोमवार को अपने दो और नागरिकों को फांसी दे दी। यह सजा ऐसे तनावपूर्ण समय में दी गई, जब ईरान पहले ही मुश्किल दौर से गुजर रहा है। ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ओमिद बेहजाद और पूरिया सफवत पर आरोप था कि उन्होंने पिछली गर्मियों में हुई छोटी लड़ाई और हालिया संघर्ष के दौरान इस्त्राइल को सैन्य और सुरक्षा ठिकानों की लोकेशन (कोऑर्डिनेट्स) के साथ-साथ तस्वीरें और जानकारी भेजी थीं। जनवरी में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को दबाने के बाद 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर फिर से हमले किए। इस्राइल की सैन्य रणनीति की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने मार्च में बताया था कि मौजूदा ईरान संघर्ष के दौरान इस्त्राइल ने मुखबिरों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स के चेकपॉइंट्स को निशाना बनाया था।
चार माह में 50 लोगों को फंदे से लटकाया
'ह्यूमन राइट्स वॉच' की 24 जुलाई को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने पिछले चार महीनों में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अस्पष्ट आरोपों में कम से कम 50 लोगों को फांसी दी है। इनमें कई 18 और 19 साल के युवा भी शामिल हैं। जेनेवा में ईरान के स्थायी मिशन ने इस संबंध में टिप्पणी के लिए अनुरोध का अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। हालांकि, तेहरान ने पहले भी कैदियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों से इन्कार करता रहा है।
ईरान-अमेरिका बातचीत पर क्या बोले ट्रंप, अंतिम अवसर क्यों?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक इंटरव्यू के दौरान कहा, दोनों पक्षों की बातचीत जल्द ही किसी न किसी नतीजे पर पहुंचेगी। यह बहुत जटिल नहीं है। हम होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की बात कर रहे हैं। मंगलवार तक इसे सचमुच खोल दिया जाए। यह पहला चरण है। दूसरे चरण में हम परमाणु मुद्दे पर बात करेंगे। इस मामले में हमारा रुख बहुत सख्त है। उनके (ईरान के) पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते। बातचीत अभी भी चल रही है। उनके पास एक अच्छे समझौते पर हस्ताक्षर करने का आखिरी मौका है। ट्रंप ने एक अन्य बयान में सोमवार को ही ईरानी नेतृत्व को 'दोहरे चरित्र वाला' भी बताया। ट्रंप ने कहा कि वह एक तरफ तो अमेरिका के साथ बातचीत के लिए गिड़गिड़ाते रहते हैं और बैठक तय होते ही खुलेआम कहते फिरते हैं कि कोई बातचीत नहीं हो रही है। यहां तक कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी बड़े-बड़े दावे करने लगते हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान चाहे कुछ भी दावा करता रहे, लेकिन यह स्पष्ट है कि होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का नियंत्रण बना हुआ है और जब तक अमेरिका नहीं चाहेगा, तब तक ईरान के पास कुछ भी नहीं पहुंचेगा।
अमेरिका को मुंहतोड़ जवाब देने पर क्या बोला ईरान?
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद मोजतबा खामेनेई के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसेन रेजाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों को गंभीरता से लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा, ईरान ने रास्ता निर्धारित किया है, इस मार्ग के अलावा किसी भी अन्य समुद्री रास्ते से जहाजों को निकालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, अमेरिका ने (इस्लामाबाद) समझौता ज्ञापन के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए ईरान की व्यवस्थाओं को स्वीकार कर लिया था, लेकिन बाद में समझौते का उल्लंघन किया। अमेरिका ने न केवल समझौता ज्ञापन का उल्लंघन किया बल्कि विवाद सुलझाने के लिए बने समाधान पैनल से चर्चा किए बिना ही हमले शुरू कर दिए। कथित उल्लंघन के बाद ईरान ने जोरदार जवाब दिया। बकौल रेजाई, 'समझौते के उल्लंघन के बाद 17 दिनों तक चले संघर्ष में हमने अमेरिका को करारा झटका दिया। हमने अमेरिका को स्पष्ट कर दिया कि हमारे पास मिसाइलें और आत्मरक्षा की क्षमता दोनों हैं। अगर अमेरिका अनधिकृत मार्ग से होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजता है, तो हम उन्हें निशाना बनाएंगे। हम ईरान द्वारा निर्धारित मार्ग के अलावा किसी अन्य मार्ग को होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थापित नहीं होने देंगे।'