NASA: कौन हैं अमित क्षत्रिय? जानें नासा के शीर्ष पद तक पहुंचने वाले भारतीय मूल के वैज्ञानिक की कहानी
भारतीय मूल के वैज्ञानिक अमित क्षत्रिय नासा के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर हैं और आर्टेमिस-2 मिशन की सफलता के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रमुख भूमिका में नजर आए। बचपन में ह्यूस्टन में रॉकेट लॉन्च देखकर उनमें अंतरिक्ष के प्रति रुचि जगी। उन्होंने ISS और आर्टेमिस मिशनों सहित कई अहम परियोजनाओं में योगदान दिया है।
विस्तार
बचपन में ह्यूस्टन में रॉकेट लॉन्च देखते हुए अंतरिक्ष के प्रति आकर्षण रखने वाले भारतीय मूल के वैज्ञानिक अमित क्षत्रिय आज नासा में शीर्ष पद पर पहुंच चुके हैं। नासा के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में वे एजेंसी के सबसे वरिष्ठ सिविल अधिकारी हैं और प्रशासक जारेड आइजैकमैन के प्रमुख सलाहकार के तौर पर अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
आर्टेमिस 2 मिशन की सफलता की जानकारी देने के लिए नासा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान मंच पर मौजूद शीर्ष पांच अधिकारियों में सबसे पहले बोलने का मौका अमित क्षत्रिय को दिया गया। एक भारतीय मूल के वैज्ञानिक को इस अहम भूमिका में देखकर भारतीयों में गर्व की भावना साफ नजर आई।
कैसा रहा क्षत्रिय का बचपन?
विस्कॉन्सिन में जन्मे क्षत्रिय भारतीय प्रवासी माता-पिता के बेटे हैं। उन्होंने कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से गणित में स्नातक और यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास, ऑस्टिन से मास्टर्स की डिग्री हासिल की। हालांकि उनका बचपन ह्यूस्टन के पास केटी शहर में बीता, जिसे वे अपना घर मानते हैं।
कैसे जगी स्पेस में रुचि?
नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर के पास बड़े होते हुए उन्होंने कई स्पेस लॉन्च देखे, जिसने उनके करियर की दिशा तय की। पढ़ाई के बाद उन्होंने तेल-गैस और मेडिकल सेक्टर में काम किया, लेकिन 2003 में यूनाइटेड स्पेस एलायंस से जुड़कर उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में कदम रखा।
नासा में निभाई अमह भूमिका
क्षत्रिय ने नासा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर, रोबोटिक्स इंजीनियर और स्पेसक्राफ्ट ऑपरेटर जैसी कई अहम भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के रोबोटिक असेंबली में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 2014 से 2017 के बीच वे स्पेस स्टेशन फ्लाइट डायरेक्टर रहे, जहां उन्होंने वैश्विक टीमों का नेतृत्व किया।
इसके बाद 2017 से 2021 तक उन्होंने ISS व्हीकल ऑफिस के डिप्टी और एक्टिंग मैनेजर के रूप में इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स और हार्डवेयर प्रोग्राम का जिम्मा संभाला। 2021 में उन्हें नासा मुख्यालय में एक्सप्लोरेशन सिस्टम्स डेवलपमेंट मिशन डायरेक्टरेट में नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने आर्टेमिस-I मिशन के तहत चंद्रमा के लिए मानवयुक्त यान की वापसी में अहम भूमिका निभाई।
मार्स मिशन में भी रहे शामिल
वह 'मून टू मार्स' कार्यक्रम के डिप्टी एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर भी रहे, जिसका उद्देश्य चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानव उपस्थिति स्थापित करना और भविष्य के अंतरग्रहीय मिशनों की तैयारी करना है। सितंबर पिछले साल उन्हें नासा का एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया गया।
मिले कई सम्मान
अपने उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए उन्हें नासा आउटस्टैंडिंग लीडरशिप मेडल से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा, उन्हें 'सिल्वर स्नूपी' अवॉर्ड भी मिला, जो अंतरिक्ष यात्री उड़ान सुरक्षा में योगदान के लिए देते हैं।
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