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शांति के बोल बनाम धमकी का खेल: समझौतों पर रजामंदी से पहले जुबानी जंग, कूटनीति की मेज पर किसकी होगी जीत?
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 11 Apr 2026 12:11 PM IST
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सार
पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद में आज अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल के बीच वार्ता होगी। हालांकि, इस शांति वार्ता से पहले दोनों पक्षों की ओर से सामने आई बयानबाजियों पर नजर डालें तो ऐसा लगता नहीं हैं कि कूटनीति की मेज पर होने वाली बातचीत से कोई हल निकलेगा।
शांति वार्ता से पहले बयानबाजी जारी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच शनिवार को इस्लामाबाद में शांति वार्ता होनी है। संभावना जताई जा रही है कि इस अमेरिका-ईरान के बीच इस शांति वार्ता से पश्चिम एशिया संकट का हल निकल सकता है।
हालांकि, इसकी उम्मीदें कम ही हैं। ऐसा कहने की सबसे बड़ी वजह है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया बयान। वहीं, ईरान भी अमेरिका के आगे झुकने को तैयार नहीं है। आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं शांति वार्ता का पूरा गणित...
शांति वार्ता से पहले ट्रंप ने दी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी
पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि अगर इस्लामाबाद में शांति वार्ता विफल होती है, तो अमेरिका ईरान पर अपने सबसे बेहतरीन हथियारों का इस्तेमाल करके एक बड़ा सैन्य हमला करने के लिए तैयार है।
ये भी पढ़ें: US-Iran Ceasefire: सीजफायर के बीच ईरान को हथियार देने की तैयारी में चीन? अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में बड़ा दावा
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में हालिया तैनातियों के बाद अमेरिकी सैनिकों की संख्या 50000 के पार पहुंच गई है। वहां पहले से ही करीब 2500 मरीन और 2500 नौसैनिक मौजूद हैं। अमेरिकी युद्धपोतों की संख्या भी खाड़ी क्षेत्र में बढ़ी है। वहीं, कई युद्धपोत पश्चिम एशिया की ओर रवाना भी हुए हैं।
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल?
ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ कर रहे हैं, जो विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ आधी रात के बाद इस्लामाबाद पहुंचे। वहीं, अमेरिकी टीम का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जिनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल हैं। इसके साथ अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड के अधिकारी ब्रैड कूपर भी वहां पहुंचे हैं। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इन वार्ताओं को 'मेक ऑर ब्रेक' (बनेगा या टूटेगा) करार दिया है।
ईरान की शर्तें लगा सकती हैं अड़ंगा
शांति वार्ता से पहले ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ के नेतृत्व में एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा। वहीं, अमेरिका के साथ होने वाली शांति वार्ता से पहले गालिबाफ ने साफ कर दिया है कि ईरान की पहले की शर्तें पूरी होने पर ही बातचीत आगे बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार, लेकिन हमें अमेरिका पर भरोसा नहीं है।
गालिबाफ ने यह भी कहा कि तेहरान की मांगों में लेबनान में युद्धविराम शामिल है। ईरान और मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान ने भी कहा कि यह अमेरिका के साथ युद्धविराम का हिस्सा होना चाहिए था। हालांकि, अमेरिका और इस्राइल ने इस बात से इनकार किया है। कहा जा सकता है कि ईरान की पूर्व-शर्तों पर अमेरिकी मुहर लगने से ही शांति वार्ता के सफल होने की उम्मीद है।
इस्राइल का रुख और लेबनान पर हमले जारी
वार्ता के बीच इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि भले ही इस्राइल युद्धविराम का स्वागत करता है, लेकिन लेबनान पर हमले नहीं रुकेंगे। उन्होंने कहा कि वे हिजबुल्ला को खत्म करने के अपने मिशन को जारी रखेंगे। गौरतलब है कि लेबनान पर इस्राइली सेना की ओर से हमलों को कोई खास कमी नहीं आई है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
ईरानी प्रतिनिधिमंडल के विमान के पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही उसे पूर्ण सुरक्षा प्रदान की गई, जिसमें अवाक्स विमान(AWACS-एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम), इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर विमान और लड़ाकू विमान शामिल थे। इन सभी ने ईरानी टीम को इस्लामाबाद तक सुरक्षित पहुंचाया।
ईरान की प्रमुख शर्तें
अमेरिका की क्या हैं शर्तें?
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हालांकि, इसकी उम्मीदें कम ही हैं। ऐसा कहने की सबसे बड़ी वजह है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हालिया बयान। वहीं, ईरान भी अमेरिका के आगे झुकने को तैयार नहीं है। आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं शांति वार्ता का पूरा गणित...
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शांति वार्ता से पहले ट्रंप ने दी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी
पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि अगर इस्लामाबाद में शांति वार्ता विफल होती है, तो अमेरिका ईरान पर अपने सबसे बेहतरीन हथियारों का इस्तेमाल करके एक बड़ा सैन्य हमला करने के लिए तैयार है।
ये भी पढ़ें: US-Iran Ceasefire: सीजफायर के बीच ईरान को हथियार देने की तैयारी में चीन? अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में बड़ा दावा
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में हालिया तैनातियों के बाद अमेरिकी सैनिकों की संख्या 50000 के पार पहुंच गई है। वहां पहले से ही करीब 2500 मरीन और 2500 नौसैनिक मौजूद हैं। अमेरिकी युद्धपोतों की संख्या भी खाड़ी क्षेत्र में बढ़ी है। वहीं, कई युद्धपोत पश्चिम एशिया की ओर रवाना भी हुए हैं।
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल?
ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ कर रहे हैं, जो विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ आधी रात के बाद इस्लामाबाद पहुंचे। वहीं, अमेरिकी टीम का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जिनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल हैं। इसके साथ अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड के अधिकारी ब्रैड कूपर भी वहां पहुंचे हैं। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इन वार्ताओं को 'मेक ऑर ब्रेक' (बनेगा या टूटेगा) करार दिया है।
ईरान की शर्तें लगा सकती हैं अड़ंगा
शांति वार्ता से पहले ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ के नेतृत्व में एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा। वहीं, अमेरिका के साथ होने वाली शांति वार्ता से पहले गालिबाफ ने साफ कर दिया है कि ईरान की पहले की शर्तें पूरी होने पर ही बातचीत आगे बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार, लेकिन हमें अमेरिका पर भरोसा नहीं है।
गालिबाफ ने यह भी कहा कि तेहरान की मांगों में लेबनान में युद्धविराम शामिल है। ईरान और मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान ने भी कहा कि यह अमेरिका के साथ युद्धविराम का हिस्सा होना चाहिए था। हालांकि, अमेरिका और इस्राइल ने इस बात से इनकार किया है। कहा जा सकता है कि ईरान की पूर्व-शर्तों पर अमेरिकी मुहर लगने से ही शांति वार्ता के सफल होने की उम्मीद है।
इस्राइल का रुख और लेबनान पर हमले जारी
वार्ता के बीच इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि भले ही इस्राइल युद्धविराम का स्वागत करता है, लेकिन लेबनान पर हमले नहीं रुकेंगे। उन्होंने कहा कि वे हिजबुल्ला को खत्म करने के अपने मिशन को जारी रखेंगे। गौरतलब है कि लेबनान पर इस्राइली सेना की ओर से हमलों को कोई खास कमी नहीं आई है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
ईरानी प्रतिनिधिमंडल के विमान के पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही उसे पूर्ण सुरक्षा प्रदान की गई, जिसमें अवाक्स विमान(AWACS-एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम), इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर विमान और लड़ाकू विमान शामिल थे। इन सभी ने ईरानी टीम को इस्लामाबाद तक सुरक्षित पहुंचाया।
ईरान की प्रमुख शर्तें
- प्रतिबंध हटाना: अमेरिका द्वारा ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को स्थायी रूप से हटाना।
- क्षेत्रीय नियंत्रण: होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण जारी रहेगा।
- यूरेनियम संवर्धन: ईरान को मिले यूरेनियम संवर्धन जारी रखने का अधिकार।
- सेना की वापसी: क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की पूरी तरह वापसी।
- हमला न करने की गारंटी: अमेरिका द्वारा ईरान पर भविष्य में कोई सैन्य हमला न करने का लिखित आश्वासन।
- युद्ध से हुए नुकसान का हर्जाना: संघर्ष के कारण ईरान को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा।
- यूएम और आईएईए का रुख: ईरान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सभी प्रस्तावों को रद्द करना।
- युद्ध की समाप्ति: लेबनान, इराक और यमन सहित सभी मोर्चों पर युद्ध की पूर्ण समाप्ति।
अमेरिका की क्या हैं शर्तें?
- 30 दिनों का युद्धविराम।
- ईरान की परमाणु सुविधाओं को नष्ट करना।
- भविष्य में परमाणु हथियार विकसित नहीं करने का भरोसा।
- संवर्धित यूरेनियम के भंडार को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) को सौंपना।
- ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे की आईएईए द्वारा पूर्ण निगरानी और देश के भीतर यूरेनियम संवर्धन पर रोक।
- क्षेत्रीय प्रॉक्सी (हिजबुल्ला, हमास आदि) के लिए ईरान का समर्थन खत्म करना।
- क्षेत्रीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर ईरान के हमलों को रोकना।
- होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना।
- ईरान पर अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को हटाना।
- ईरान की मिसाइलों की संख्या और उनकी रेंज सीमित करने की मांग।
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