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अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां: व्हाइट हाउस ने पूरी की पीईआरएम कार्यक्रम के आधुनिकीकरण के प्रस्ताव की समीक्षा

Tue, 27 Oct 2026 02:59 PM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला। Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 27 Oct 2026 02:59 PM IST
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दुनिया की अहम समाचार सुर्खियां - फोटो : अमर उजाला

व्हाइट हाउस ने स्थायी श्रम प्रमाणन प्रक्रिया (पीईआरएम) को आधुनिक बनाने के प्रस्ताव की समीक्षा पूरी कर ली है। ग्रीन कार्ड के लिए विदेशी कर्मचारियों को प्रायोजित करने की प्रक्रिया में पीईआरएम को पहला चरण माना जाता है। अमेरिकी श्रम विभाग के इस प्रस्ताव में श्रम बाजार की जांच और PERM कार्यक्रम के अन्य प्रावधानों में बदलाव करने की बात कही गई है। इस कार्यक्रम में आखिरी बार 2004 में संशोधन किया गया था।

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श्रम विभाग ने जुलाई में समीक्षा के लिए यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस के प्रबंधन एवं बजट कार्यालय को भेजा था। यह प्रस्ताव ऐसे समय आगे बढ़ाया जा रहा है, जब अमेरिकी प्रशासन पीईआरएम कार्यक्रम पर निगरानी और कार्रवाई तेज कर रहा है। यह कार्रवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व वाले एंटी-फ्रॉड टास्कफोर्स की व्यापक पहल का हिस्सा है।
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इस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी और छह अन्य तकनीकी कंपनियों के पीईआरएम कार्यक्रमों को निलंबित कर दिया था। इन कंपनियों में इन्फोसिस टेक्नोलॉजीज और टाटा समूह भी शामिल हैं। प्रस्ताव के वास्तविक प्रावधान इसके प्रकाशित होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। हालांकि, प्रस्तावित नियम के विवरण के अनुसार, इसमें पीईआरएम के तहत भर्ती के न्यूनतम मानकों में बदलाव, अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी से जुड़े नियमों को मजबूत करने और भर्ती प्रक्रिया में नियोक्ताओं के भेदभाव-रोधी नियमों को बेहतर बनाने की योजना है।
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फेडरल रजिस्टर में प्रस्ताव प्रकाशित होने के बाद श्रम विभाग आम लोगों से 30 या 60 दिनों तक टिप्पणियां आमंत्रित कर सकता है। जनता से मिली टिप्पणियों पर विचार करने और नियम को अंतिम रूप दिए जाने के बाद ही यह लागू होगा। अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, प्रस्ताव का उद्देश्य पीईआरएम श्रम बाजार जांच के तहत योग्य अमेरिकी कर्मचारियों की भर्ती के न्यूनतम मानकों में संशोधन करना है।

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ऊर्जा तक पहुंच औद्योगीकरण, रोजगार सृजन के लिए जरूरी: श्रीपाद नाइक
केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने कहा है कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए औद्योगीकरण, रोजगार सृजन और जीवन स्तर में सुधार के लिहाज से ऊर्जा तक पहुंच बेहद जरूरी है। सिंगापुर में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के सामने भारत का व्यावहारिक अनुभव भी साझा किया।

सोमवार को सिंगापुर इंटरनेशनल एनर्जी वीक में 1,000 से अधिक प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए नाइक ने कहा, "बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मजबूत बिजली ग्रिड, कुशल वितरण व्यवस्था, ऊर्जा भंडारण और जरूरत के अनुसार परिचालन की क्षमता भी जरूरी है।"

उन्होंने कहा, "इस वैश्विक परिदृश्य में भारत का अनुभव एक व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। भारत दुनिया में बिजली का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 560 गीगावाट (जीडब्ल्यू) है, जिसमें करीब 308 गीगावाट क्षमता गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से आती है।"

बिजली, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालयों में राज्य मंत्री नाइक ने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में ऊर्जा तक पहुंच औद्योगीकरण, रोजगार के अवसर पैदा करने, जीवन स्तर बेहतर बनाने और जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अहम है। उन्होंने कहा कि विकास की इन जरूरतों और टिकाऊ एवं मजबूत बिजली व्यवस्था के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

एआई और शहरीकरण से बढ़ रही बिजली की मांग
नाइक ने कहा कि विद्युतीकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन, शीतलन की बढ़ती जरूरत और शहरीकरण जैसे कारक बिजली की मांग को नए सिरे से आकार दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर, नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और नई तकनीकों के विकास के साथ बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले ऊर्जा स्रोतों का मिश्रण भी बदल रहा है।

भारत में सौर ऊर्जा क्षमता 55 गुना से अधिक बढ़ी
पिछले एक दशक में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए नाइक ने बताया कि देश की सौर ऊर्जा क्षमता 55 गुना से अधिक बढ़कर 170 गीगावाट के पार पहुंच गई है। छतों पर लगाए जाने वाले सौर ऊर्जा संयंत्रों का भी तेजी से विस्तार हुआ है। इनके जरिए 63 लाख से अधिक घरों को कवर किया गया है और कुल स्थापित क्षमता 18 गीगावाट से ज्यादा हो गई है।

उन्होंने बताया कि जून 2025 में भारत ने गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत हासिल करने का राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) लक्ष्य तय समय से पांच साल से अधिक पहले पूरा कर लिया था। नाइक ने कहा, "हमारे 2035 के एनडीसी लक्ष्य में इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि हमारा दीर्घकालिक लक्ष्य 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन हासिल करना है।"

नेपाल की माउंट अमा डबलम से उतरते समय जर्मन पर्वतारोही की मौत
नेपाल की माउंट अमा डबलम की सफल चढ़ाई करने वाले एक जर्मन पर्वतारोही की चोटी से नीचे उतरते समय मौत हो गई। 6,812 मीटर ऊंचे इस पर्वत पर चालू पर्वतारोहण सत्र में यह पहली दर्ज मौत है। अभियान से जुड़े अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मृतक की पहचान वोल्फगैंग वाशिचेक के रूप में हुई है। वह सोमवार सुबह करीब 6,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कैंप तीन से लापता हो गए थे। उस समय वह नीचे उतरने की तैयारी कर रहे थे।

अधिकारियों के अनुसार, बाद में उनका शव करीब 4,500 मीटर की ऊंचाई पर मिला। हेलीकॉप्टर की मदद से चलाए गए तलाशी अभियान के बाद शव बरामद किया गया। माउंट अमा डबलम नेपाल के खुंबू क्षेत्र में माउंट एवरेस्ट के पास स्थित है। यह हिमालय की प्रसिद्ध चोटियों में शामिल है। पर्वतारोहियों के बीच यह काफी लोकप्रिय है, लेकिन यहां की खड़ी और जोखिम भरी पर्वतीय धारियां तथा तकनीकी रूप से कठिन चढ़ाई इसे चुनौतीपूर्ण बनाती हैं।

कैसे हुआ हादसा?
सितंबर से नवंबर तक चलने वाले शरदकालीन पर्वतारोहण सत्र में इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में पर्वतारोही पहुंचते हैं। वाशिचेक और उनके गाइड सोनम लामा ने 25 अक्तूबर को पर्वत की चोटी पर पहुंचने में सफलता हासिल की थी। उसी शाम दोनों कैंप तीन में लौट आए थे।

अभियान का आयोजन करने वाली कंपनी रियल हिमालय प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक दयुला शेरपा के अनुसार, सोमवार सुबह लामा ने वाशिचेक से अपने सुरक्षा उपकरणों के साथ वहीं इंतजार करने को कहा और उधार लिया गया सामान लौटाने के लिए कुछ देर के लिए कैंप से बाहर गए।

शेरपा ने बताया कि कुछ मिनट बाद जब गाइड वापस लौटे, तो पर्वतारोही वहां मौजूद नहीं थे। इसके बाद तलाशी और बचाव अभियान चलाया गया। पर्वत से वाशिचेक का शव बरामद कर हेलीकॉप्टर से काठमांडू ले जाया गया, जहां पोस्टमार्टम किया जाएगा।

ऑस्ट्रेलिया ने भारत में वीजा आवेदकों के लिए बायोमेट्रिक डेटा संग्रह कार्यक्रम का किया विस्तार
ऑस्ट्रेलिया सरकार ने सुरक्षित, कुशल और विश्वसनीय वीजा प्रणाली बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता के तहत भारत में वीजा आवेदकों के लिए बायोमेट्रिक डेटा संग्रह कार्यक्रम का विस्तार किया है। नई दिल्ली स्थित ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग की ओर से जारी बयान में यह जानकारी दी गई। बयान के अनुसार, 26 अक्टूबर 2026 से भारत में ऑस्ट्रेलिया के नए वीजा के लिए आवेदन करने वाले लोगों को फिंगरप्रिंट और चेहरे की तस्वीर सहित बायोमेट्रिक जानकारी देनी पड़ सकती है।

ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग ने 26 अक्टूबर को जारी बयान में कहा, "नई आवश्यकताएं केवल 26 अक्टूबर या उसके बाद जमा किए गए आवेदनों पर लागू होंगी। इससे पहले जारी किए गए वीजा या इस तारीख से पहले जमा किए गए आवेदनों पर इसका असर नहीं पड़ेगा।"

आवेदकों को कैसे देनी होगी बायोमेट्रिक जानकारी?
ऑस्ट्रेलिया में वीजा प्रक्रिया का प्रबंधन करने वाला गृह विभाग संबंधित आवेदकों को बताएगा कि उन्हें बायोमेट्रिक जानकारी देनी है या नहीं। इसके साथ ही उन्हें इस प्रक्रिया को पूरा करने के निर्देश भी दिए जाएंगे। उच्चायोग के मुताबिक, आवेदकों की व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर उन्हें भारत में वीएफएस ग्लोबल द्वारा संचालित 16 ऑस्ट्रेलियाई बायोमेट्रिक संग्रह केंद्रों में से किसी एक पर जाने के लिए कहा जा सकता है। कुछ पात्र आवेदक ऑस्ट्रेलियाई इमि ऐप के जरिए भी यह प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। उच्चायोग ने बताया कि आमतौर पर इस संबंध में जानकारी आवेदक या उसके अधिकृत एजेंट को ईमेल के माध्यम से दी जाएगी।

वीजा प्रणाली को सुरक्षित बनाने में मिलेगी मदद
बयान में कहा गया कि बायोमेट्रिक कार्यक्रम के विस्तार से आवेदकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच लोगों की आवाजाही को सुगम बनाने में मदद मिलेगी। उच्चायोग के अनुसार, दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध पहले से अधिक मजबूत हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया सरकार चाहती है कि भारतीय नागरिकों की बढ़ती संख्या के वहां आने, पढ़ाई करने, काम करने और आपसी संबंध विकसित करने के बीच वीजा प्रक्रिया सुरक्षित, कुशल और भरोसेमंद बनी रहे।

कांगो में इबोला के मामले 10 हजार के पार, अफ्रीकी देशों में संक्रमण रोकने की कोशिश तेज
कांगो में तेजी से फैल रहे इबोला संक्रमण के मामले 10 हजार के पार पहुंच गए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार तक संक्रमण के 10,060 मामलों की पुष्टि हो चुकी थी। स्वास्थ्य अधिकारी अफ्रीका के कई देशों में इस बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए प्रयास तेज कर रहे हैं। कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, यह इतिहास में सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला प्रकोप है। संक्रमण की पुष्टि वाले 10,060 लोगों में से करीब आधे की मौत हो चुकी है। यह कांगो के इतिहास में इस बीमारी का सबसे घातक प्रकोप भी बन गया है। मई में घोषित इस प्रकोप की वजह बुंदिबुग्यो वायरस है। यह इबोला वायरस का दुर्लभ प्रकार है, जिसके लिए अभी तक कोई स्वीकृत टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है।

संक्रमण रोकने में कई चुनौतियां
राहत और स्वास्थ्य टीमें सशस्त्र संघर्ष, खराब सड़कों और स्थानीय लोगों के अविश्वास से जुड़ी हिंसा जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। गलत सूचनाओं के कारण भी लोगों में स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति अविश्वास बढ़ा है। इससे प्रभावित समुदायों में लोगों को लक्षणों की जानकारी देने और इलाज कराने के लिए राजी करना मुश्किल हो रहा है। इन इलाकों में वर्षों से हिंसा और बार-बार फैलने वाली महामारियों का सामना करना पड़ रहा है।

वर्ष 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में इबोला का सबसे बड़ा और घातक प्रकोप सामने आया था। उस दौरान 28 हजार से अधिक मामले सामने आए थे और 11 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। मौजूदा प्रकोप घोषित होने के बाद से अब तक दर्ज मामलों और मौतों की संख्या उस अवधि की तुलना में कम समय में कम से कम तीन गुना अधिक बताई गई है।

अफ्रीका के कई देशों तक फैला संक्रमण
यह प्रकोप पिछले किसी भी इबोला प्रकोप की तुलना में अफ्रीका के अधिक क्षेत्रों तक फैल चुका है। तीन क्षेत्रों में संक्रमण पहुंच चुका है और केन्या तथा नाइजीरिया में भी मामले दर्ज किए गए हैं। अब तक पांच देशों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें युगांडा और फ्रांस भी शामिल हैं, जहां फिलहाल कोई सक्रिय मामला नहीं है।

अफ्रीका में संक्रमण फैलने की एक बड़ी समस्या निगरानी व्यवस्था में कमी दिखाई देना है। कई शुरुआती मामलों की पुष्टि तब हुई, जब संक्रमित लोगों में लक्षण दिखने के काफी समय बाद या उनके यात्रा करने के बाद जांच की गई।

बिना किसी शुल्क के एच-1बी को मिलने लगी मंजूरी
अमेरिकी नागरिकता और आप्रवासन सेवा (यूएससीआईएस) ने अदालतों के आदेश पर विवादास्पद 1,00,000 (लगभग 84 लाख रुपये) डॉलर की अतिरिक्त फीस के बिना ही एच-1बी वीजा याचिकाओं को मंजूर करना शुरू कर दिया है। आव्रजन विशेषज्ञों का अनुमान है कि जून से सितंबर के बीच कोर्ट की रोक के बाद करीब 15,000 से 20,000 ऐसे आवेदन कतार में थे जो फीस विवाद के कारण अधर में अटके हुए थे। इन सभी को अब सीधा फायदा होगा। यूएससीआईएस के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026 में तिमाही-3 (अक्तूबर 2025 से जून 2026 तक) तक कुल 2.70 लाख एच-1बी वीजा याचिकाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। स्वीकृत हुए कुल वीजा में 1.90 लाख भारतीय शामिल हैं। इस बार 1.20 लाख का चयन वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए यूएससीआईएस के पास करीब 3,58,737 पंजीकरण प्राप्त हुए थे, जिनमें से 1,20,141 आवेदकों को चुना गया था।

फ्रांस सरकार का एलान- बदलेगी राष्ट्रीय ऑनलाइन विश्वविद्यालय प्रवेश प्रणाली
फ्रांस सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि वह 2028 तक अपनी राष्ट्रीय ऑनलाइन विश्वविद्यालय प्रवेश प्रणाली को बदल देगी। यह निर्णय शिक्षा और जीवन यापन की लागतों को लेकर हफ्तों से चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शनों को शांत करने के लिए लिया गया है। उच्च शिक्षा मंत्री फिलिप बैप्टिस्ट ने 2027 के लिए इस मंच में "पर्याप्त बदलाव" की घोषणा की। Parcoursup नामक यह प्रणाली विश्वविद्यालयों में आवेदन संभालती है। छात्र इसकी अस्पष्ट चयन मानदंडों और पसंदीदा पाठ्यक्रमों तक असमान पहुंच की आलोचना कर रहे थे। 17 अक्तूबर को स्कूल फंडिंग और बढ़ती लागतों पर प्रदर्शनों के कारण देश में दंगे और लूटपाट हुई थी। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने छात्रों की मांगों को पूरा करने के लिए "ठोस उपायों" का वादा किया है। सरकार ने 8 अक्तूबर को 3,000 अतिरिक्त शिक्षक तैनात करने की बात भी कही थी। फ्रांस रिकॉर्ड गरीबी और सार्वजनिक ऋण से जूझ रहा है।

ब्राजील के चुनाव नतीजों पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की टिप्पणी

ब्राजील में चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि लूला की चुनावी जीत 'धांधली' वाली लग रही है। ट्रंप ने बिना किसी सबूत के यह टिप्पणी ऐसे में की है जब उनका समर्थन करने वाले प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी फ्लेवियो बोल्सोनारो को हार का सामना करना पड़ा।

बीमार पेड़ उखाड़ फेंको... चुनाव से पहले भ्रष्ट अफसरों को हटाने का शी का संदेश
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2027 में संभावित चौथे कार्यकाल की तैयारी के बीच सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के अफसरों पर अविश्वास जताते हुए भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के खिलाफ और सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। उन्होंने भ्रष्ट अधिकारियों की तुलना बीमार पेड़ों से करते हुए कहा, इन्हें उखाड़ना या काटना जरूरी है, ताकि हटाया जा सके। इससे संकेत मिलते हैं कि शी और सख्त होंगे। शी का जोर इस बात पर है कि अधिकारी पार्टी के आदेशों का ईमानदारी से पालन करें। उन्होंने कहा, कुछ अधिकारी सामने से वफादारी दिखाते हैं, लेकिन भीतर से पार्टी नियमों और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध नहीं हैं। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक बीजिंग में जारी है। इसमें अगले साल पार्टी महासम्मेलन की तैयारियों की दिशा तय हो सकती है। 
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