World: द. अफ्रीका स्कूल बस हादसे में अब तक 14 की मौत; श्रीलंकाई नौसेना ने सात भारतीय मछुआरों को किया गिरफ्तार
स्थानीय लोगों के मुताबिक, हर मोटरसाइकिल की कीमत करीब 1,000 डॉलर है, यानी कुल मांग लगभग 17,000 डॉलर की है। गांव के मुखिया ने बताया कि अपहरणकर्ताओं ने कहा है कि उन्हें पैसे नहीं, बल्कि मोटरसाइकिलें चाहिए। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी 17 मोटरसाइकिलें खो दी हैं और उनकी भरपाई चाहते हैं। नाइजीरिया में ऐसे अपराधी अक्सर जंगलों में छिपकर रहते हैं और मोटरसाइकिलों से सफर करते हैं। इससे उन्हें सुरक्षा बलों से बचने में आसानी होती है। यही वजह है कि मोटरसाइकिलें उनके लिए बहुत जरूरी साधन हैं।
सरकार ने खोज अभियान तेज कर दिया है और विशेष सुरक्षा टीमें इलाके में तैनात की गई हैं। कादुना राज्य के गवर्नर ने भरोसा दिलाया है कि सभी बंधकों को सुरक्षित छुड़ाने की कोशिश जारी है। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि नाइजीरिया में अपहरण और फिरौती की समस्या कितनी गंभीर होती जा रही है।
चीन: दक्षिण चीन सागर में नाव पलटी, दो की मौत, चार लापता
दक्षिण चीन सागर में एक सिंगापुर ध्वज वाली कार्गो नाव पलटने से दो लोगों की मौत हो गई और चार लोग लापता हो गए। नाव में फिलीपींस के 21लोग सवार थे। चीनी अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों के मुताबिक, चीनी तटरक्षक और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के दक्षिण थिएटर कमान की नौसेना ने 15 लोगों को बचाया, जिनमें से 14 की स्थिति स्थिर है। नाव स्कारबोरो रीफ से लगभग 100 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में पलटी।
वियतनाम: तो लाम फिर चुने गए कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव
वियतनाम में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने तो लाम को फिर से महासचिव चुना। यह निर्णय राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस के समापन पर लिया गया। अभी यह तय नहीं हुआ कि वह राष्ट्रपति भी बनेंगे या नहीं। यदि वह दोनों पद संभालते हैं, तो वह दशकों में देश के सबसे ताकतवर नेता होंगे, ठीक उसी तरह जैसे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग हैं।
कांग्रेस में वियतनाम ने 2045 तक उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा और 2026-2030 के बीच औसत वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर 10% या उससे अधिक रखने का लक्ष्य घोषित किया। सम्मेलन में लगभग 1,600 प्रतिनिधि शामिल हुए और इसमें वरिष्ठ नियुक्तियां भी की गईं, जिसमें पोलित ब्यूरो के 19 सदस्यों का चयन किया गया
श्रीलंकाई नौसेना ने सात भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार किया
श्रीलंकाई नौसेना ने कथित तौर पर द्वीप राष्ट्र के समुद्री क्षेत्र में मछली पकड़ने के आरोप में सात भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार किया है। नौसेना के बयान के अनुसार, इन मछुआरों को मंगलवार को उत्तरी जाफना प्रायद्वीप के कोविलन इलाके के पास से गिरफ्तार किया गया और उनकी दो नावों को जब्त कर लिया गया। बयान में कहा गया है कि गिरफ्तार मछुआरों को कानूनी कार्रवाई के लिए जाफना के माइलिड्डी स्थित मत्स्य निरीक्षक को सौंपा जाएगा।
दोनों देशों के मछुआरों को अक्सर अनजाने में एक-दूसरे के समुद्री क्षेत्र में प्रवेश करने के कारण गिरफ्तार किया जाता है। मछुआरों का मुद्दा भारत और श्रीलंका के संबंधों में विवाद का एक कारण रहा है। कई घटनाओं में श्रीलंकाई नौसेना के जवानों ने पाक जलडमरूमध्य में भारतीय मछुआरों पर गोलीबारी भी की है और उनकी नौकाओं को जब्त किया है, जब वे कथित रूप से अवैध तरीके से श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र में प्रवेश करते पाए गए।
पश्चिमी अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ ने नवजात बच्चों पर होने वाले हेपेटाइटिस B वैक्सीन अध्ययन को अस्थायी रूप से रोक दिया है। यह अध्ययन ट्रंप प्रशासन के समर्थन से किया जा रहा था और इसे नैतिक जांच के लिए रोका गया है। देश के स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इस स्टडी की सही तरह से समीक्षा नहीं की गई थी, इसलिए अब एक एथिक्स कमेटी इसकी जांच करेगी।
इस अध्ययन में कुछ नवजात बच्चों को जन्म के समय वैक्सीन दी जानी थी और कुछ को नहीं। इसके बाद बच्चों की सेहत, विकास और मृत्यु दर पर नजर रखी जानी थी। कई विशेषज्ञों ने इसे अनैतिक बताया, क्योंकि इससे कुछ बच्चों को एक असरदार टीके से वंचित किया जा सकता था, जबकि उन्हें संक्रमण का खतरा अधिक है। अफ्रीका सीडीसी ने इस फैसले का समर्थन किया है और कहा है कि अफ्रीकी लोगों के हित सर्वोपरि हैं। वहीं अमेरिका के स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि अध्ययन अभी भी योजना के अनुसार आगे बढ़ेगा और नियमों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। यह अध्ययन एक डेनमार्क की यूनिवर्सिटी को बिना टेंडर दिए सौंपा गया था, जिस पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
रवांडा सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित तकनीक का परीक्षण शुरू करने का फैसला किया है। यह योजना गेट्स फाउंडेशन और ओपनएआई की साझेदारी से चलाई जा रही है, जिसके तहत देश के 50 से ज्यादा स्वास्थ्य क्लिनिकों में इस नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका मकसद डॉक्टरों और नर्सों के काम को आसान बनाना और मरीजों को जल्दी व सही इलाज दिलाना है।
रवांडा में एक स्वास्थ्य कर्मी पर करीब 1,000 मरीजों का बोझ है, जबकि दुनिया में आदर्श अनुपात 4 स्वास्थ्य कर्मी प्रति 1,000 मरीज माना जाता है। ऐसे में एआई तकनीक से मरीजों की जानकारी संभालने, रिपोर्ट तैयार करने और इलाज से जुड़े फैसलों में मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि यह तकनीक डॉक्टरों की जगह नहीं लेगी, बल्कि उनके काम को और मजबूत बनाएगी। गेट्स फाउंडेशन और ओपनएआई ने इस परियोजना के लिए दो साल में 50 मिलियन डॉलर देने की घोषणा की है। बिल गेट्स ने कहा कि गरीब देशों में, जहां स्वास्थ्य संसाधन कम हैं, वहां एआई एक बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे इलाज तक लोगों की पहुंच बढ़ेगी और स्वास्थ्य असमानता कम होगी।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों को चिंता है कि यह तकनीक अंग्रेजी भाषा पर आधारित है, जबकि रवांडा में अधिकतर लोग किन्यारवांडा भाषा बोलते हैं। डिजिटल विशेषज्ञ ऑडासे नियोंकुरु ने कहा कि अगर एआई स्थानीय भाषा में काम नहीं करेगा तो इलाज में दिक्कतें आ सकती हैं। सरकार और तकनीकी कंपनियां अब इसे किन्यारवांडा भाषा में विकसित करने पर काम कर रही हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने विदेशी सहायता से जुड़े नियमों को और सख्त करने का फैसला किया है। अब अमेरिका उन संस्थाओं को भी मदद नहीं देगा जो गर्भपात सेवाओं के साथ-साथ जेंडर आइडेंटिटी या डीईआई (डायवर्सिटी, इक्विटी और इन्क्लूजन) कार्यक्रमों को बढ़ावा देती हैं। पहले यह रोक केवल गर्भपात से जुड़ी सेवाओं तक सीमित थी।
इस नीति को मेक्सिको सिटी पॉलिसी कहा जाता है, जिसे सबसे पहले राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने लागू किया था। ट्रंप प्रशासन ने इसके दायरे को और बढ़ा दिया है। नए नियमों से करीब 30 अरब डॉलर की विदेशी सहायता प्रभावित हो सकती है, जो अंतरराष्ट्रीय संगठनों और एजेंसियों को दी जाती है।
मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे दुनिया के गरीब देशों में महिलाओं और जरूरतमंद लोगों को मिलने वाली जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी। ह्यूमन राइट्स कैंपेन की अध्यक्ष ने कहा कि यह फैसला राजनीति को इंसानी जीवन से ऊपर रखता है। हालांकि ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसे का इस्तेमाल उन नीतियों पर नहीं होना चाहिए जो उनकी विचारधारा के खिलाफ हैं। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब अमेरिका पहले ही विदेशी सहायता में भारी कटौती कर चुका है।
दक्षिण अफ्रीका के गाउतेंग प्रांत में हुए दर्दनाक स्कूल बस हादसे में मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। गुरुवार को दो किशोर छात्राओं की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। यह हादसा सोमवार सुबह उस समय हुआ था जब एक निजी मिनीबस 16 छात्रों को स्कूल छोड़ने जा रही थी और उसकी एक ट्रक से टक्कर हो गई थी।
हादसे में मौके पर ही 12 बच्चों की मौत हो गई थी। इसके अलावा बस चालक और ट्रक में बैठे एक यात्री सहित कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। कुछ घायलों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई, लेकिन अब भी दो बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि मृतक छात्राएं काफी गंभीर हालत में थीं और उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस मामले में बस चालक अयांडा दलदला पर पहले लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया गया था, लेकिन अब आरोप बढ़ाकर हत्या के 14 मामले और हत्या की कोशिश के 3 मामले कर दिए गए हैं। साथ ही उस पर बिना वैध लाइसेंस वाहन चलाने का भी आरोप है। चालक ने अदालत में जमानत मांगने से इनकार कर दिया है।
अमेरिका के कई राज्यों में एक बेहद खतरनाक बर्फीला तूफान आने की चेतावनी दी गई है। नेशनल वेदर सर्विस के मुताबिक करीब 10 करोड़ लोग किसी न किसी तरह की मौसम चेतावनी के दायरे में हैं। यह तूफान न्यू मैक्सिको से लेकर कैरोलाइना तक और फिर पूर्वी तट के बड़े शहरों तक असर डाल सकता है।
मौसम विभाग ने बताया कि कई इलाकों में आधा इंच तक बर्फ जम सकती है, जिससे पेड़ गिरने, बिजली के खंभे टूटने और लंबे समय तक बिजली गुल रहने का खतरा है। वॉशिंगटन डीसी, न्यूयॉर्क और बोस्टन जैसे शहरों में एक फुट तक बर्फ गिरने की आशंका जताई गई है। तूफान के कारण हवाई अड्डों पर उड़ानें रद्द हो सकती हैं और सड़कों पर यात्रा बेहद खतरनाक हो जाएगी। कई राज्यों ने पहले से ही नमक और ब्राइन छिड़कने की तैयारी शुरू कर दी है। शिकागो जैसे शहरों में सैकड़ों स्नोप्लो मशीनें सड़कों पर तैनात की गई हैं।
मेक्सिको के पश्चिमी राज्य मिचोआकान में पुलिस ने एक कुख्यात अपराधी को गिरफ्तार किया है, जिसे एल बोटोक्स के नाम से जाना जाता है। उस पर नींबू किसानों से जबरन वसूली और कई हत्याओं में शामिल होने का आरोप है। अधिकारियों के मुताबिक उसका असली नाम सेसर अलेजांद्रो सेपुल्वेदा अरेलानो है और वह व्हाइट ट्रोजन्स नाम के आपराधिक गिरोह का सरगना था। यह गिरोह खतरनाक ड्रग कार्टेल जलिस्को न्यू जनरेशन कार्टेल से जुड़ा हुआ माना जाता है। सुरक्षा मंत्री उमर गार्सिया हारफुच ने बताया कि एल बोटोक्स के खिलाफ हत्या और वसूली के 11 से ज्यादा वारंट जारी थे। वह किसानों से भारी रकम वसूलता था और जो लोग विरोध करते थे, उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती थी। पिछले साल अक्टूबर में नींबू उत्पादक संघ के अध्यक्ष बर्नार्डो ब्रावो की हत्या भी इसी गिरोह से जुड़ी बताई जा रही है।
ब्रावो ने खुले तौर पर संगठित अपराध के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने कहा था कि माफिया हर व्यापारिक गतिविधि पर कब्जा कर रहा है। उनकी हत्या के बाद पूरे राज्य में गुस्सा फैल गया था। इसके कुछ ही हफ्तों बाद एक लोकप्रिय मेयर की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। राज्य के गवर्नर ने कहा कि यह गिरफ्तारी माफिया के खिलाफ बहुत बड़ा झटका है। मिचोआकान मेक्सिको में नींबू और एवोकाडो का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। सरकार का मानना है कि इस गिरफ्तारी से किसानों को राहत मिलेगी और अपराध पर कुछ हद तक लगाम लगेगी।
स्वीडन के प्रवासन मंत्री योहान फोर्शेल ने यूरोपीय संघ से अपील की है कि जिन अफगान नागरिकों को शरण नहीं मिली है या जिन्होंने यूरोप में अपराध किए हैं, उन्हें वापस उनके देश भेजने के लिए एक साझा व्यवस्था बनाई जाए। उन्होंने कहा कि अभी ऐसे लोगों को वापस भेजना लगभग असंभव हो गया है, क्योंकि उनके पास पहचान पत्र या यात्रा दस्तावेज नहीं होते। फोर्शेल ने कहा कि यूरोप तालिबान सरकार को मान्यता नहीं देना चाहता, लेकिन तकनीकी स्तर पर दस्तावेज जारी करने की व्यवस्था बन सकती है। इससे अवैध रूप से रह रहे या अपराध में शामिल लोगों को उनके देश भेजना आसान होगा। उन्होंने साफ कहा कि जो लोग अपराध करते हैं, वे खुद यह तय कर लेते हैं कि वे समाज का हिस्सा नहीं बनना चाहते।
उन्होंने यह भी बताया कि आधे से ज्यादा अफगान शरणार्थियों के आवेदन खारिज हो जाते हैं। अगर उन्हें वापस नहीं भेजा गया, तो यूरोप में शरण देने की नीति पर लोगों का भरोसा कम हो जाएगा। स्वीडन सरकार का मानना है कि इससे कानून का सम्मान और सुरक्षा दोनों मजबूत होंगी। यूरोपीय संघ के अधिकारियों ने कहा है कि अफगानिस्तान के वास्तविक प्रशासन से तकनीकी बातचीत चल रही है। इसके जरिए प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की जा रही है।
म्यांमार में लगे 3.6 तीव्रता के भूकंप के झटके
म्यांमार में गुरुवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, इस भूकंप की तीव्रता 3.6 मापी गई। भूकंप रात 11 बजकर 04 मिनट पर आया। इसका केंद्र म्यांमार में था और इसकी गहराई जमीन के अंदर 90 किलोमीटर थी।
एनसीएस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि भूकंप का स्थान 20.59 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 94.86 डिग्री पूर्वी देशांतर पर था। भूकंप की तीव्रता कम होने के कारण इससे किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है। इससे पहले 14 जनवरी 2026 को भी म्यांमार में भूकंप आया था। उस समय भूकंप की तीव्रता 4.0 थी और इसकी गहराई केवल 10 किलोमीटर थी। उस भूकंप का केंद्र 25.05 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 95.80 डिग्री पूर्वी देशांतर पर था।
विशेषज्ञों के अनुसार, कम गहराई यानी उथले भूकंप ज्यादा खतरनाक होते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी तरंगें जल्दी जमीन की सतह तक पहुंच जाती हैं, जिससे तेज झटके लगते हैं और इमारतों को ज्यादा नुकसान हो सकता है। वहीं, ज्यादा गहराई वाले भूकंप आमतौर पर कम नुकसान करते हैं। फिलहाल म्यांमार में आए इस भूकंप से किसी जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।
अमेरिका ने हैती की अंतरिम ट्रांजिशनल काउंसिल को चेतावनी दी है कि वह सरकार में ऐसे किसी भी बदलाव से बचे जो देश को अस्थिर कर सकता है। हैती में अमेरिकी दूतावास ने स्पष्ट किया कि जो कोई भी ऐसी पहल का समर्थन करेगा जो गिरोहों को फायदा पहुंचाती हो, उसे अमेरिकी हितों और हैती की जनता के खिलाफ माना जाएगा। अमेरिकी बयान के अनुसार, ऐसी किसी भी कोशिश के खिलाफ उचित कदम उठाए जाएंगे।
कंबोडिया में ऑनलाइन ठगी के मामलों में पकड़े गए 73 दक्षिण कोरियाई नागरिकों को जांच के लिए इस सप्ताह दक्षिण कोरिया भेजा जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इन आरोपियों पर करीब 48.6 अरब वॉन (लगभग 33 अरब डॉलर) की ठगी का आरोप है। इनमें 65 पुरुष और आठ महिलाएं शामिल हैं। ये हाल के महीनों में कंबोडिया में गिरफ्तार किए गए लगभग 260 कोरियाई नागरिकों में से हैं। दक्षिण कोरिया सरकार एक चार्टर्ड विमान भेजेगी, जो शुक्रवार को आरोपियों को वापस लाएगा।
सिंगापुर में भारतीय उच्चायोग ने भारतीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफ) 2026 के दूसरे संस्करण का शुभारंभ किया। उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अम्बुले ने 21 फिल्मों के इस महोत्सव को भारत और सिंगापुर के बीच लोगों से लोगों के संबंध मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच बताया। यह फिल्म महोत्सव 23 जनवरी से 8 मार्च 2026 तक आयोजित होगा। उन्होंने सिंगापुर सरकार, सिंगापुर फिल्म सोसाइटी और गोल्डन विलेज सिनेमा समेत सभी सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
भारत ने एक बार फिर सिंगापुर के चांगी एयरपोर्ट के लिए यात्री यातायात और कार्गो वॉल्यूम के मामले में दुनिया के शीर्ष पांच बाजारों में अपनी जगह बनाई है। चांगी एयरपोर्ट ग्रुप (सीएजी) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में एयरपोर्ट पर कुल 6.99 करोड़ यात्रियों की आवाजाही हुई, जो पिछले वर्ष (2024) के मुकाबले 3.4 फीसदी अधिक है। भारत के साथ इस सूची में चीन, इंडोनेशिया, मलयेशिया और ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पांच देशों में शामिल हैं। विस्तार के मामले में पिछला साल चांगी एयरपोर्ट के लिए रिकॉर्ड रहा।
कर्नाटक से आकर सिंगापुर में पर्यावरण के क्षेत्र में जाना पहचाना नाम बन चुकी कीर्तिदा मेकानी का हृदयाघात से 66 की उम्र में निधन हो गया। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित और 2024 में सिंगापुर विमेंस हॉल ऑफ फेम में शामिल मेकानी की विरासत सिंगापुर के हरित क्षेत्रों में बसती है। वह ट्री लेडी कही जाती हैं।
न्यूजीलैंड के एक घर और कैंपग्राउंड में बृहस्पतिवार को भूस्खलन से तबाह हो गए। कई लोग मलबे में दबे हैं, जिनमें से 2 की मौत हो गई। यूजीलैंड के नॉर्थ आइलैंड में माउंट मौंगानुई के नीचे हुए भूस्खलन की सूचना के बाद आपातकालीन सेवाओं ने पूरी जानकारी दी। भूस्खलन का मलबा एक कस्बे में स्थित बीचसाइड हॉलिडे पार्क पर आ गिरा। पुलिस अधीक्षक टिम एंडरसन ने कहा कि लापता लोगों की तलाश की जा रही है। फायर एंड इमरजेंसी न्यूजीलैंड के कमांडर विलियम पाइक ने कहा, भूस्खलन के तीन घंटे बाद तक मलबे से किसी को भी नहीं निकाला जा सका था।
अमेरिका विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से बाहर निकल गया है। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिका इसका सबसे बड़ा दानदाता है। अमेरिका ने कहा कि वह 260 मिलियन डॉलर बकाया का भुगतान भी नहीं करेगा। ट्रंप प्रशासन ने वैश्विक संगठन से बाहर निकलने का एक साल पहले ही नोटिस दे दिया था। अमेरिका के इस कदम को लेकर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे अमेरिकी और वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा।
अमेरिकी कानून का भी होगा उल्लंघन
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप के इस कदम से अमेरिकी कानून का भी उल्लंघन होगा, जिसके तहत वाशिंगटन को विश्व स्वास्थ्य संगठन को 260 मिलियन डॉलर बकाया चुकाना है। दरअसल राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले साल अपने पद ग्रहण करने के पहले दिन एक कार्यकारी आदेश के जरिये यह नोटिस दिया था कि अमेरिका इस संगठन को छोड़ देगा। अमेरिकी कानून के तहत उसे संगठन से बाहर निकलने से पहले एक साल का नोटिस देना होता है और सभी बकाया फीस का भुगतान करना होता है।
फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध: ट्रंप प्रशासन के इस फैसले पर दुनिया के कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दोबारा विचार करने का अनुरोध किया है। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एदनोम घेब्रेयसस ने भी कहा था, मुझे उम्मीद है कि अमेरिका अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगा।