BH Series Number Plate: बार-बार रजिस्ट्रेशन के झंझट से चाहिए छुटकारा? जानिए कौन ले सकता है 'भारत' नंबर प्लेट
BH Series Number Plate: क्या आप नौकरी के सिलसिले में अक्सर एक राज्य से दूसरे राज्य शिफ्ट होते हैं और बार-बार गाड़ी के री-रजिस्ट्रेशन के झंझट से घबराते हैं? अगर हां, तो सरकार की BH (भारत) सीरीज नंबर प्लेट आपके लिए एक बेहतरीन समाधान है। इस लेख के जरिए हमने बेहद तरीके से बताया है कि आखिर BH सीरीज नंबर प्लेट क्या है, इसके बड़े फायदे क्या हैं, इसके लिए कौन-कौन अप्लाई कर सकता है, आवेदन के लिए किन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होती है और इसका रोड टैक्स रेगुलर नंबर प्लेट से कैसे अलग है।
विस्तार
आपने भारत की सड़कों पर कभी ना कभी BH (भारत) सीरीज नंबर प्लेट जरूर देखी होगी....ये आजकल काफी चर्चे में है, लेकिन कई कार खरीदारों को इसे लेकर अब भी कंफ्यूजन रहती है। ये क्या है? किसे मिल सकती है? और क्या यह सच में फायदेमंद है? आइए इसे इस लेख के जरिए इसे बिल्कुल आसान तरीके से समझते हैं। सरकार ने 2021 में BH सीरीज नंबर प्लेट सिस्टम शुरू किया था। इसका मुख्य मकसद उन लोगों की परेशानी कम करना था जो नौकरी या अन्य कारणों से अक्सर एक राज्य से दूसरे राज्य में शिफ्ट होते हैं।
पहले के मुकाबले अब क्या बदला?
पहले, अगर आपकी कार किसी एक राज्य में रजिस्टर्ड होती थी और आप एक साल से ज्यादा के लिए किसी दूसरे राज्य में शिफ्ट होते थे तो आपको वहां अपनी कार का दोबारा रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता था। यह पूरी प्रक्रिया काफी लंबी और खर्चीली होती थी। लेकिन अब BH नंबर प्लेट आने से यह परेशानी पूरी तरह खत्म हो गई है। इसके साथ आपको दूसरे राज्य में जाने पर दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने की कोई जरूरत नहीं पड़ती है, क्योंकि इस नंबर प्लेट वाली आपकी कार पूरे भारत में बिना किसी रोक-टोक के हमेशा मान्य रहती है।
BH सीरीज नंबर प्लेट के बड़े फायदे
अगर आपकी नौकरी ट्रांसफरेबल है तो BH सीरीज नंबर प्लेट आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप बिना किसी झंझट, पेपरवर्क या दोबारा रजिस्ट्रेशन कराए देश के किसी भी राज्य में अपनी गाड़ी टेंशन-फ्री होकर चला सकते हैं।
इससे आपको बार-बार RTO के चक्कर लगाने और नई रजिस्ट्रेशन फीस भरने से तो छुटकारा मिलता ही है, साथ ही आपके कीमती समय और पैसों की भी भारी बचत होती है। इसके अलावा, नई कार खरीदते समय आपको एक साथ भारी-भरकम रोड टैक्स चुकाने की भी जरूरत नहीं पड़ती। इससे आपकी जेब पर अचानक पड़ने वाला बोझ काफी कम हो जाता है।
किसे मिल सकती है BH नंबर प्लेट?
यह नंबर प्लेट हर किसी के लिए उपलब्ध नहीं है और इसे पाने के कुछ तय नियम हैं। अगर आप केंद्र या राज्य सरकार के कर्मचारी, डिफेंस या बैंक कर्मचारी हैं तो आप इसके लिए पूरी तरह योग्य हैं। वहीं, प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोग भी इस नंबर प्लेट के लिए अप्लाई कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए शर्त यह है कि उनकी कंपनी के ऑफिस देश के कम से कम 4 राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) में होने चाहिए।
इसके अलावा, यह बात भी ध्यान रखना जरूरी है कि BH सीरीज नंबर प्लेट केवल प्राइवेट गाड़ियों के लिए ही जारी की जाती है, कमर्शियल वाहनों को इसका फायदा नहीं मिलता है।
BH सीरीज नंबर प्लेट पाने के लिए जरूरी दस्तावेज
इस नंबर प्लेट को बनवाने के लिए आपको बहुत ज्यादा कागजी कार्रवाई में उलझने की जरूरत नहीं है। आवेदन के लिए बस कुछ गिने-चुने दस्तावेजों की ही मांग की जाती है। अपनी पहचान और नौकरी प्रमाणित करने के लिए आपको मुख्य रूप से अपना पैन कार्ड, आधार कार्ड, कंपनी का एम्प्लॉई आईडी और एक वर्किंग सर्टिफिकेट यानी फॉर्म 60 (Form 60) जमा करना होता है। बस इन चंद दस्तावेजों के साथ आपके आवेदन की प्रक्रिया आसानी से आगे बढ़ जाती है।
BH सीरीज नंबर प्लेट के लिए कैसे करें अप्लाई?
इसका प्रोसेस बहुत ही सिंपल है और कार की डीलरशिप इसमें आपकी पूरी मदद करती है। नई कार खरीदते समय आपको बस अपने डीलर को यह बताना होता है कि आप BH सीरीज नंबर प्लेट के लिए योग्य हैं और आपको यही नंबर चाहिए। इसके बाद, डीलरशिप खुद ही आपके सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ आपका ऑनलाइन फॉर्म भर देती है। एक बार फॉर्म सबमिट हो जाने पर, संबंधित अथॉरिटी (RTO) आपकी दी गई डिटेल्स को अच्छी तरह से वेरिफाई करती है और सब कुछ सही पाए जाने पर आपकी कार के लिए BH नंबर प्लेट जारी कर दी जाती है।
BH सीरीज नंबर प्लेट और रोड टैक्स
कई लोगों को यह गलतफहमी होती है कि BH नंबर प्लेट लेने पर रोड टैक्स कम देना पड़ता है। हकीकत में, इसमें रोड टैक्स पर कोई सीधा डिस्काउंट नहीं मिलता, बल्कि टैक्स भरने का तरीका पूरी तरह से बदल जाता है। जहां रेगुलर नंबर प्लेट के लिए आपको कार खरीदते समय एक साथ 15 साल का रोड टैक्स देना पड़ता है।
इससे कार की ऑन-रोड कीमत काफी बढ़ जाती है, वहीं BH सीरीज में आपको एकमुश्त टैक्स न देकर हर दो साल में टैक्स चुकाने की सुविधा मिलती है। इससे नई कार खरीदते समय आपकी जेब पर अचानक कोई भारी बोझ नहीं पड़ता। इसके बाद, जब आपकी गाड़ी के 14 साल पूरे हो जाते हैं, तब यह टैक्स आपको सालाना यानी हर साल के हिसाब से चुकाना होता है।
