E20 Petrol: ई20 फ्यूल से माइलेज कम हुआ या वजह कुछ और? जानिए सरकार के मुताबिक कब और क्यों घटती है कार की एवरेज
E20 petrol mileage: भारत में ई20 पेट्रोल और वाहन के माइलेज को लेकर बहस जारी है। अब जब पेट्रोल में 20% इथेनॉल (E20) ब्लेंडिंग के बाद गाड़ियों के घटते माइलेज को लेकर बवाल बढ़ा तो पेट्रोलियम मंत्रालय ने सफाई जारी की है। सरकार का कहना है कि माइलेज सिर्फ फ्यूल पर नहीं, बल्कि ड्राइविंग स्टाइल, मेंटेनेंस, टायर प्रेशर और ट्रैफिक पर निर्भर करता है। हालांकि, सरकार खुद संसद में मान चुकी है कि पुराने वाहनों के माइलेज में 3 से 6 प्रतिशत तक की गिरावट संभव है। अगर E20 पूरी तरह टेस्टेड और तैयार है, तो फिर माइलेज को लेकर यह विवाद बार-बार क्यों उठ रहा है? यहां जानिए इस पूरे मामले के बारे में।
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हालांकि सरकार का कहना है कि E20 को लंबे समय तक अलग-अलग मानकों पर टेस्ट और वैलिडेट किया गया है। लेकिन इस बहस का दूसरा पहलू भी है सरकार पहले संसद में यह मान चुकी है कि E10 के लिए डिजाइन किए गए पुराने वाहनों में E20 के इस्तेमाल से फ्यूल इकोनॉमी में 3 से 6 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। यही अब E20 और माइलेज को लेकर सवालों को फिर चर्चा में ले आया है।
सरकार का ताजा दावा क्या है?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय का कहना है कि माइलेज में कमी के लिए सिर्फ E20 को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। मंत्रालय के अनुसार वास्तविक फ्यूल एफिशिएंसी कई परिस्थितियों पर निर्भर करती है। इनमें ड्राइविंग का तरीका, ट्रैफिक की स्थिति, सड़क, वाहन की हालत, टायर में सही एयर प्रेशर और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल शामिल हैं। यानी एक ही कार अलग-अलग ड्राइवर और अलग-अलग परिस्थितियों में अलग माइलेज दे सकती है।
E20 has undergone extensive testing and validation across key vehicle parameters, including engine durability, drivability, startability, material compatibility and corrosion resistance.
These evaluations support confidence in E20 compatibility and vehicle performance, helping… pic.twitter.com/qhHJLWY2cF— Ministry of Petroleum and Natural Gas #MoPNG (@PetroleumMin) August 15, 2026
E20 को लेकर सरकार ने क्या कहा?
- सरकार के अनुसार, E20 पेट्रोल को कई स्तरों पर टेस्ट और वैलिडेट किया गया है। इसमें इंजन की मजबूती, ड्राइविंग परफॉर्मेंस, इंजन स्टार्टिंग, अलग-अलग मटेरियल के साथ फ्यूल कम्पैटिबिलिटी और जंग से बचाव जैसे पहलुओं की जांच शामिल रही है। मंत्रालय ने अपने संदेश में इसे E20 Tested. Validated. E20 Ready के रूप में पेश किया।
- सरकार का मानना है कि इन परीक्षणों से यह साबित होता है कि E20 वाहनों के लिए सुरक्षित है और इससे वाहन के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की व्यापक समस्या सामने नहीं आई है।
फिर माइलेज पर सवाल क्यों उठते हैं?
- इसका सबसे बड़ा कारण इथेनॉल की ऊर्जा घनत्व है। इथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में कम ऊर्जा होती है। इसलिए समान मात्रा में ईंधन से मिलने वाली ऊर्जा में अंतर पड़ सकता है और कुछ परिस्थितियों में माइलेज प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि E20 के इस्तेमाल के बाद खास तौर पर पुराने वाहनों की फ्यूल एफिशिएंसी को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
- इसके अलावा पुराने वाहनों में फ्यूल लाइन, सील, पंप और अन्य कंपोनेंट्स पर अधिक इथेनॉल मिश्रण के लंबे समय के प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई जाती रही है।
सरकार संसद में 3-6% गिरावट की बात कह चुकी है
- यहां मामला और दिलचस्प हो जाता है। पिछले महीने संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने बताया था कि 2023 से पहले E10 के लिए डिजाइन किए गए कुछ वाहनों में E20 के इस्तेमाल से फ्यूल इकोनॉमी में 3 से 6 प्रतिशत तक गिरावट संभव है।
- इसका मतलब यह है कि सरकार खुद यह स्वीकार कर चुकी है कि पुराने, E10-डिजाइन किए गए वाहनों में E20 के कारण कुछ हद तक माइलेज प्रभावित हो सकता है। इसलिए E20 से जुड़े माइलेज सवाल को पूरी तरह खारिज करना भी सही नहीं होगा।
क्या नई कारों में समस्या नहीं है?
- सरकार और वाहन निर्माता कंपनियों का कहना है कि E20 को ध्यान में रखकर तैयार किए गए नए वाहन इसके अनुरूप बनाए गए हैं। इसलिए इन मॉडलों में E20 के इस्तेमाल को लेकर बड़ी तकनीकी समस्या की बात सामने नहीं आई है।
- हालांकि, किसी भी वाहन का वास्तविक माइलेज सिर्फ ईंधन पर निर्भर नहीं करता। शहर का ट्रैफिक, बार-बार ब्रेक लगाना, तेज एक्सेलरेशन, टायर प्रेशर और एसी का इस्तेमाल भी वास्तविक माइलेज को काफी प्रभावित कर सकता है।
माइलेज कम होने पर ड्राइवर क्या जांचे?
- अगर आपकी कार E20 इस्तेमाल करने के बाद कम माइलेज दे रही है, तो सिर्फ पेट्रोल को दोष देने से पहले कुछ दूसरी चीजें भी जांचना जरूरी है।
- सबसे पहले टायर प्रेशर देखें। इसके बाद एयर फिल्टर, इंजन की स्थिति और सर्विसिंग की स्थिति की जांच करें। साथ ही यह भी देखें कि कार ज्यादातर ट्रैफिक में चल रही है या खुले हाईवे पर।
- अगर वाहन पुराना है और E10 के लिए डिजाइन किया गया था, तो उसके फ्यूल सिस्टम की स्थिति भी जांचना जरूरी है।