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CNG Auto: दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी ऑटो पर प्रस्तावित रोक को लेकर फाडा चिंतित, रोजगार-प्रदूषण नियंत्रण पर सवाल

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Fri, 19 Jun 2026 03:56 PM IST
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सार

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) ने दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी ऑटो पर प्रस्तावित रोक पर फिर से विचार करने के लिए सरकार से आग्रह किया है। क्योंकि इससे लोगों की आजीविका पर असर पड़ने की चिंता है।

FADA Urges Government to Reconsider CNG Auto Ban in Delhi-NCR Amidst Concerns for Livelihoods
सीएनजी ऑटो - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

दिल्ली-एनसीआर में CNG (सीएनजी) से चलने वाले तीन-पहिया वाहनों के नए पंजीकरण पर प्रस्तावित रोक को लेकर ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) (फाडा) का कहना है कि यह कदम सरकार की स्वच्छ ईंधन नीति के विपरीत है। और इससे प्रदूषण कम होने के बजाय कई व्यावहारिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

CNG ऑटो के पंजीकरण पर रोक का मामला क्या है?

FADA के अनुसार, नए सीएनजी तीन-पहिया वाहनों के पंजीकरण पर प्रस्तावित प्रतिबंध उस स्वच्छ ईंधन ढांचे के खिलाफ है, जिसे दिल्ली में शीला दीक्षित सरकार के दौरान अदालत की निगरानी में लागू किया गया था और जिसने सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ ईंधन की ओर मोड़ा था।

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FADA की दिल्ली इकाई ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अध्यक्ष को पत्र लिखकर सीएनजी चालित तीन-पहिया वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाने के किसी भी कदम का विरोध किया है। साथ ही संगठन ने स्क्रैपेज से जुड़ी एक व्यवस्थित तीन-पहिया वाहन नवीनीकरण योजना लागू करने की मांग भी की है।

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CAQM ने क्या निर्देश जारी किए हैं?

CAQM ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने और स्वच्छ मोबिलिटी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चरणबद्ध तरीके से केवल इलेक्ट्रिक L5 श्रेणी के तीन-पहिया वाहनों के पंजीकरण का आदेश दिया है।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि वायु गुणवत्ता विशेषज्ञों की हालिया रिपोर्ट में वाहन क्षेत्र को दिल्ली-एनसीआर में PM2.5 उत्सर्जन के प्रमुख स्रोतों में से एक बताया गया है। साथ ही दिसंबर 2025 में गठित विशेषज्ञ समिति ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में तीन-पहिया वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की सिफारिश की थी।

इसी आधार पर आयोग ने निम्नलिखित समयसीमा तय की है:

  • 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक L5 तीन-पहिया वाहनों का पंजीकरण।
  • 1 जनवरी 2028 से गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर जैसे उच्च वाहन घनत्व वाले जिलों में यही नियम लागू।
  • 1 जनवरी 2029 से एनसीआर के शेष जिलों में भी केवल इलेक्ट्रिक L5 तीन-पहिया वाहनों का पंजीकरण।

क्या दिल्ली की नई EV नीति भी इसी दिशा में बढ़ रही है?

दिल्ली की नई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति अभी अंतिम रूप में तैयार की जा रही है। इस नीति के एक प्रस्ताव में भी CAQM के आदेश जैसी व्यवस्था शामिल है। जिसके तहत अगले वर्ष जनवरी से इलेक्ट्रिक वाहनों को छोड़कर सभी तीन-पहिया वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाने की बात कही गई है।

FADA को इस फैसले से क्या आपत्ति है?

फाडा का कहना है कि यह आदेश सड़क पर चल रहे किसी भी पुराने तीन-पहिया वाहन को नहीं हटाएगा।

संगठन के मुताबिक:

  • दिल्ली की सड़कों पर पहले से चल रहे BS-IV और उससे पुराने वाहन वैध परमिट के साथ चलते रहेंगे।
  • ये अपेक्षाकृत अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहन समय के साथ और पुराने होते जाएंगे।
  • क्योंकि इनके स्थान पर कम प्रदूषण वाले BS-VI CNG वाहनों को लाने का रास्ता बंद कर दिया जाएगा।
  • इस तरह यह नीति स्वच्छ वाहन (CNG) को रोकती है, जबकि अधिक प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को जारी रहने देती है।

फाडा का मानना है कि इससे नीति का मूल उद्देश्य ही उलट जाता है।

आजीविका पर इसका क्या असर पड़ सकता है?

फाडा ने अपनी चिट्ठी में इस फैसलै के आर्थिक प्रभावों की ओर भी ध्यान दिलाया है।

संगठन के अनुसार:

  • सीएनजी ऑटो दिल्ली की लास्ट-माइल मोबिलिटी का महत्वपूर्ण आधार हैं।
  • ये मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए सस्ती और सुलभ परिवहन सेवा उपलब्ध कराते हैं।
  • लगभग एक लाख ऑटो-रिक्शा परमिट धारकों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है।
  • इसके अलावा हजारों डीलरशिप कर्मचारियों, फाइनेंसरों और फ्लीट ऑपरेटरों का रोजगार भी इस क्षेत्र पर निर्भर है।
  • नए पंजीकरण पर रोक लगने से फ्लीट नवीनीकरण की प्रक्रिया रुक जाएगी और पूरे इकोसिस्टम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

FADA ने सरकार को क्या विकल्प सुझाया है?

सीएनजी तीन-पहिया वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाने के बजाय फाडा ने पुराने वाहनों को तेजी से हटाने की व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है।

संगठन ने प्रस्ताव रखा है कि:

  • BS-IV और उससे पुराने तीन-पहिया वाहनों को स्क्रैप किया जाए।
  • उनकी जगह BS-VI/OBD-II मानक वाले सीएनजी या इलेक्ट्रिक तीन-पहिया वाहन लाए जाएं।
  • इसके लिए प्रोत्साहन आधारित एक संरचित योजना बनाई जाए।

फाडा का कहना है कि ऐसा करने से:

  • वायु गुणवत्ता में मापनीय सुधार होगा।
  • प्रदूषण नियंत्रण का मकसद पूरा होगा।
  • आम लोगों के लिए सस्ती परिवहन व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी।

आगे क्या हो सकता है?

फाडा ने CAQM के निर्देशों को लागू करने में आने वाली चुनौतियों को रेखांकित किया है। अब यह देखना होगा कि दिल्ली सरकार की आगामी ईवी नीति में तीन-पहिया वाहनों से जुड़े प्रस्तावों में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।

उधर, पारंपरिक दो-पहिया वाहन निर्माताओं ने भी दिल्ली ईवी नीति के उस प्रस्ताव पर संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखा है। जिसमें 1 अप्रैल 2028 से इलेक्ट्रिक वाहनों को छोड़कर सभी दो-पहिया वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाने की बात कही गई है।

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