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NHAI: दिल्ली में हाईवे बने, लेकिन पेड़ क्यों नहीं बढ़े? एनएचएआई ने बड़े पैमाने पर इन कमियों की ओर किया इशारा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 15 Jan 2026 10:21 PM IST
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सार
वर्षों से, मुआवजे के तौर पर पेड़ लगाना दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार का नैतिक आधार रहा है। हाईवे और प्रोजेक्ट के लिए काटे गए पेड़ों को वापस करने का वादा किया जाता है। लेकिन जमीन की कहानी कुछ और ही है।
Dwarka Expressway
- फोटो : PTI
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विस्तार
दिल्ली में बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ वर्षों से यह वादा किया जाता रहा है कि काटे गए पेड़ों के बदले नई पौधरोपण (कम्पनसेटरी अफॉरेस्टेशन) की जाएगी। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। हाल ही में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) (एनएचएआई) ने दिल्ली सरकार के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में दो बड़े प्रोजेक्ट UER-2 और द्वारका एक्सप्रेसवे में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कमी को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
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कितने पेड़ लगाने थे और पैसा कितना दिया गया था?
इन दोनों परियोजनाओं के लिए पेड़ लगाने की जिम्मेदारी दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को दी गई थी।
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UER-2 प्रोजेक्ट में क्या गड़बड़ी सामने आई?
अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-2) जिसे दिल्ली की तीसरी रिंग रोड कहा जा रहा है, का उद्घाटन अगस्त 2025 में हुआ था। यह सड़क उत्तर दिल्ली से शुरू होकर रोहिणी, बवाना, मुंडका, नजफगढ़ होते हुए आईजीआई एयरपोर्ट के पास NH-48 तक जाती है।
NHAI की रिपोर्ट के अनुसार:
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इन दोनों परियोजनाओं के लिए पेड़ लगाने की जिम्मेदारी दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को दी गई थी।
- UER-2 के लिए 64,080 पेड़ लगाने थे, जिसके लिए 55.1 करोड़ रुपये जमा किए गए
- द्वारका एक्सप्रेसवे के लिए 1,53,990 पेड़ लगाने थे, जिसके बदले 87.77 करोड़ रुपये डीडीए को दिए गए
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UER-2 प्रोजेक्ट में क्या गड़बड़ी सामने आई?
अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-2) जिसे दिल्ली की तीसरी रिंग रोड कहा जा रहा है, का उद्घाटन अगस्त 2025 में हुआ था। यह सड़क उत्तर दिल्ली से शुरू होकर रोहिणी, बवाना, मुंडका, नजफगढ़ होते हुए आईजीआई एयरपोर्ट के पास NH-48 तक जाती है।
NHAI की रिपोर्ट के अनुसार:
- 2021 में डीडीए को 64,080 पेड़ों के लिए 55.10 करोड़ रुपये दिए गए
- डीडीए ने दावा किया कि 57,280 पेड़ लगाए जा चुके हैं
- लेकिन साइट निरीक्षण में सिर्फ 24,887 पेड़ ही मौजूद पाए गए
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Dwarka Expressway
- फोटो : PTI
द्वारका एक्सप्रेसवे में स्थिति क्यों चिंताजनक है?
29 किलोमीटर लंबा द्वारका एक्सप्रेसवे, दिल्ली और गुरुग्राम के बीच ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए बनाया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली प्रिजर्वेशन ऑफ ट्रीज एक्ट, 1994 के अनुसार बड़े पैमाने पर पौधरोपण अनिवार्य था।
एनएचएआई के मुताबिक:
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DDA ने अपनी सफाई में क्या कहा था?
दस्तावेजों के अनुसार, डीडीए ने पहले दावा किया था कि UER-2 के लिए पौधरोपण:
डीडीए ने यह भी कहा कि कालिंदी पार्क में पौधरोपण नष्ट हो गया था, इसलिए प्रोजेक्ट को तुगलकाबाद शिफ्ट किया गया, जहां काम पूरा हो चुका है। हालांकि, इस पूरे मामले पर डीडीए की ओर से कोई ताजा आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
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29 किलोमीटर लंबा द्वारका एक्सप्रेसवे, दिल्ली और गुरुग्राम के बीच ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए बनाया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली प्रिजर्वेशन ऑफ ट्रीज एक्ट, 1994 के अनुसार बड़े पैमाने पर पौधरोपण अनिवार्य था।
एनएचएआई के मुताबिक:
- डीडीए ने अगस्त 2024 में दावा किया कि 1,51,452 पेड़ लगाए गए हैं
- लेकिन संयुक्त साइट निरीक्षण में करीब आधे पेड़ ही मौजूद मिले
- यह मुद्दा भी फरवरी 2025 में मुख्य सचिव और दिसंबर 2025 में मुख्यमंत्री स्तर पर उठाया गया
- जिसके बाद डीडीए को काम तेज करने के निर्देश दिए गए।
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DDA ने अपनी सफाई में क्या कहा था?
दस्तावेजों के अनुसार, डीडीए ने पहले दावा किया था कि UER-2 के लिए पौधरोपण:
- कुसुमपुर पहाड़ी
- तुगलकाबाद बायोडायवर्सिटी पार्क
- अरावली बायोडायवर्सिटी पार्क
- कालिंदी बायोडायवर्सिटी पार्क
डीडीए ने यह भी कहा कि कालिंदी पार्क में पौधरोपण नष्ट हो गया था, इसलिए प्रोजेक्ट को तुगलकाबाद शिफ्ट किया गया, जहां काम पूरा हो चुका है। हालांकि, इस पूरे मामले पर डीडीए की ओर से कोई ताजा आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
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पर्यावरण विशेषज्ञ इस स्थिति को कैसे देखते हैं?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यावरण कार्यकर्ता भावरीन कंधारी का कहना है कि कागजों पर लगाए गए पेड़ों और जमीन पर मौजूद पेड़ों के बीच का अंतर सिस्टम की गहरी विफलता को दिखाता है।
उनके मुताबिक:
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यावरण कार्यकर्ता भावरीन कंधारी का कहना है कि कागजों पर लगाए गए पेड़ों और जमीन पर मौजूद पेड़ों के बीच का अंतर सिस्टम की गहरी विफलता को दिखाता है।
उनके मुताबिक:
- सिर्फ रिपोर्ट भर देना पर्याप्त नहीं है
- प्रशिक्षित स्टाफ
- सही उपकरण
- स्पष्ट प्रक्रियाएं
- और लगातार निगरानी की
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आगे का रास्ता क्या होना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि द्वारका एक्सप्रेसवे और UER-2 जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में कम्पनसेटरी अफॉरेस्टेशन को सिर्फ औपचारिकता न मानकर,
तभी यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि दिल्ली में विकास के साथ-साथ हरियाली भी वास्तव में जमीन पर दिखाई दे, सिर्फ फाइलों में नहीं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि द्वारका एक्सप्रेसवे और UER-2 जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में कम्पनसेटरी अफॉरेस्टेशन को सिर्फ औपचारिकता न मानकर,
- स्टाफिंग
- तकनीकी प्रशिक्षण
- और समर्पित मॉनिटरिंग सिस्टम
तभी यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि दिल्ली में विकास के साथ-साथ हरियाली भी वास्तव में जमीन पर दिखाई दे, सिर्फ फाइलों में नहीं।
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