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EV: सरकार का बड़ा फैसला, ईवी ट्रक सेक्टर में आत्मनिर्भरता की ओर कदम, तीन अहम पार्ट्स भारत में बनाना अनिवार्य

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Thu, 30 Apr 2026 09:51 PM IST
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सार

भारी उद्योग मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए नया नियम जारी किया है। इसके तहत कुछ महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स का निर्माण भारत में करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस योजना को लागू कर सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना चाहती है।

India Mandates Local Manufacturing of Key EV Truck Components from September 1
इलेक्ट्रिक ट्रक - फोटो : AI
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विस्तार

इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए एक बड़े कदम के तहत, केंद्र सरकार ने इस साल सितंबर से इलेक्ट्रिक ट्रकों के अहम पुर्जों का देश में ही निर्माण अनिवार्य कर दिया है। 

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केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय ने सरकार की प्रमुख PM E-DRIVE ((पीएम ई-ड्राइव) योजना के तहत इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए घरेलू निर्माण संबंधी आवश्यकताओं को और सख्त करते हुए एक अधिसूचना जारी की है।

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किन कंपोनेंट्स का देश में निर्माण जरूरी होगा?

अधिसूचना में कहा गया है कि इलेक्ट्रिक ट्रकों के तीन अहम इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स- बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS), DC-DC कन्वर्टर और व्हीकल कंट्रोल यूनिट (VCU) को 1 सितंबर तक भारत में ही बनाना होगा। ये सभी पार्ट्स इलेक्ट्रिक ट्रक के संचालन के लिए बेहद जरूरी होते हैं। 


यह फैसला PM E-DRIVE (पीएम ई-ड्राइव) योजना के तहत लिया गया है। इस कदम का मकसद, बाहर से मंगाए जाने वाले पार्ट्स पर निर्भरता कम करना और देश में ही एक मजबूत इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री बनाना है।

यह नियम किस योजना के तहत लागू होगा? 

यह अधिसूचना N2 और N3 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए 'फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम' (PMP) में संशोधन करती है। यानी, मध्यम और भारी कमर्शियल इलेक्ट्रिक ट्रक, जिनका उपयोग पूरे देश में सामान की ढुलाई के लिए किया जाता है।

सितंबर 2024 में शुरू की गई PM E-DRIVE योजना का उद्देश्य भारत में ईवी वाहनों को अपनाने की गति को तेज करना है।

इस योजना के तहत, सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माताओं को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है, जिसमें इलेक्ट्रिक ट्रक, बसें और दोपहिया वाहन शामिल हैं।

इन प्रोत्साहनों के साथ जुड़ी एक मुख्य शर्त यह है कि निर्माताओं को धीरे-धीरे स्थानीय रूप से निर्मित पुर्जों का उपयोग बढ़ाना होगा। इस आवश्यकता को 'फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम' या PMP के नाम से जाना जाता है।
 

BMS, DC-DC Converter और VCU का क्या रोल है?

BMS बैटरी का ‘दिमाग’ होता है, जो चार्जिंग, डिस्चार्जिंग और तापमान को नियंत्रित करता है।

DC-DC कन्वर्टर हाई वोल्टेज पावर को कम वोल्टेज में बदलकर वाहन के अन्य सिस्टम्स को चलाने में मदद करता है।

VCU पूरे वाहन का कंट्रोल सिस्टम होता है, जो मोटर, ब्रेकिंग और एनर्जी मैनेजमेंट को नियंत्रित करता है।

क्या पहले इन पार्ट्स को आयात किया जाता था?

अब तक कंपनियों को इन कंपोनेंट्स को आयात करने की अनुमति थी।

लेकिन नए नियम के तहत इनका निर्माण और असेंबली भारत में ही करना जरूरी होगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी।


उद्योग पर इसका क्या असर पड़ेगा?

इस नियम के चलते कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित या विस्तार करना होगा।

इससे निवेश बढ़ेगा और स्थानीय उद्योग को मजबूती मिलेगी।

क्या नियम न मानने पर नुकसान होगा?

जो कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करेंगी, वे सरकारी सब्सिडी से वंचित हो सकती हैं।

इससे उनकी कीमत और बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।

क्या इससे आम लोगों को फायदा होगा?

इस नीति से रोजगार के अवसर बढ़ने, आयात घटने और लागत कम होने की उम्मीद है।

लंबे समय में इससे ट्रांसपोर्ट की लागत कम हो सकती है, जिसका फायदा आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा।

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