मिडिल-ईस्ट तनाव का असर: सरकार की ऑटो कंपनियों को सलाह, 'ईंधन बचाएं, बिजली अपनाएं'
Israel Iran Conflict Impact: खाड़ी देशों में चल रहे तनाव के कारण तेल और गैस की सप्लाई पर मंडराते खतरे को देखते हुए भारी उद्योग मंत्रालय (MoHI) ने ऑटो कंपनियों को अलर्ट किया है। सरकार ने कंपनियों से ईंधन बचाने, उत्पादन के तरीके में सुधार करने और तेल की जगह बिजली का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। उद्योगों को मिलने वाली गैस में भारी कमी आई है, जिसका असर मारुति, टाटा और महिंद्रा जैसी बड़ी कंपनियों के सप्लायर्स पर भी दिखने लगा है।
विस्तार
इस्राइल-अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर अब सीधे तौर पर ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर दिखने लगा है। खाड़ी देशों खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे कच्चे तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हालात को देखते हुए भारी उद्योग मंत्रालय (MoHI) ने भारत में कार और ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों के लिए एक अहम एडवाइजरी जारी की है।
क्यों जारी हुई ये सलाह?
दरअसल, पिछले एक महीने से चल रहे इस विवाद की वजह से 'होर्मुज जलडमरूमध्य' वाले समुद्री रास्ते से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसी रास्ते से तेल और गैस की सप्लाई होती है, जिसके रुकने का खतरा पैदा हो गया है।
सरकार ने ऑटो कंपनियों को क्या सलाह दी है?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार चाहती है कि कंपनियां अपने प्रोडक्शन के तरीके में इस तरह से बदलाव लाएं जिससे ईंधन की कम से कम खपत हो। इसके लिए कंपनियों से खास तौर पर कहा गया है कि वे मशीनों को बिना वजह चालू रखकर होने वाली ईंधन की बर्बादी को रोकें। साथ ही, फैक्टरियों में जहां भी तकनीकी रूप से संभव हो सके, काम के लिए तेल या गैस की जगह बिजली के इस्तेमाल पर जोर दिया जाए। इसके अलावा, लगातार बढ़ती लागत को कंट्रोल करने के लिए सरकार ने यह भी सलाह दी है कि गाड़ियों के गैर-जरूरी पार्ट्स बनाने में रिसाइकिल किए गए एल्युमीनियम और अन्य वैकल्पिक चीजों का इस्तेमाल किया जाए।
क्या देश में पेट्रोल-डीजल की कमी होने वाली है?
पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं होने वाली है, इसलिए आम जनता को घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। वर्तमान में हमारे पास लगभग 60 दिनों का पर्याप्त ईंधन रिजर्व मौजूद है। दरअसल, सरकार की प्राथमिकता आम लोगों के लिए गैस और ईंधन की सप्लाई को निर्बाध बनाए रखना है, और यही वजह है कि एहतियात के तौर पर ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को अपने ईंधन खर्च में कटौती करने और संसाधनों का सीमित इस्तेमाल करने की हिदायत दी गई है।
ऑटो सेक्टर और कार प्रोडक्शन पर क्या असर पड़ेगा?
सरकार के जरिए घरों में गैस की सप्लाई को प्राथमिकता दिए जाने की वजह से अब औद्योगिक इस्तेमाल के लिए गैस की उपलब्धता घटकर करीब 80 प्रतिशत रह गई है। इसका सीधा असर ऑटो सेक्टर की पूरी चेन पर पड़ने लगा है। मारुति सुजुकी, टाटा और महिंद्रा जैसी दिग्गज कंपनियों को पार्ट्स सप्लाई करने वाले वेंडर्स को अब गैस की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे कंपोनेंट्स के उत्पादन में बाधा आ रही है। हालांकि बाजार में नई गाड़ियों की डिमांड अभी भी काफी मजबूत है, लेकिन अगर खाड़ी देशों का यह विवाद लंबे समय तक चलता रहा, तो पार्ट्स की कमी के चलते गाड़ियों का प्रोडक्शन घट सकता है, जिससे अंततः ग्राहकों के लिए वेटिंग पीरियड और ज्यादा बढ़ सकता है।