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HC: आधी रात गैराज से लैम्बॉर्गिनी कार उठाने पर हाईकोर्ट सख्त, वाहन निरीक्षक से पूछा- अधिकार किसने दिया?

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Sat, 14 Feb 2026 07:22 PM IST
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सार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक सीनियर मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (SMVI) के उस व्यवहार पर सवाल उठाया है जिसमें उन्होंने एक लेम्बोर्गिनी हुराकैन कार के मालिक के निजी घर में घुसकर, मालिक की गैरमौजूदगी में गाड़ी को जब्त कर लिया।

Lamborghini Car Seized at Midnight: Karnataka High Court Questions Inspector’s Authority
कर्नाटक उच्च न्यायालय - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार

कर्नाटक हाईकोर्ट  ने एक वरिष्ठ मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (SMVI) की कड़ी आलोचना की है, जिसने आधी रात को, वाहन मालिक की गैरमौजूदगी में, बंगलूरू में उसके निजी घर के गैराज से लैम्बॉर्गिनी कार को उठवा (टो करवा) लिया। अदालत ने इसे "हीरोगिरी" करार देते हुए कार मालिक के खिलाफ दर्ज आगे की जांच पर अस्थायी रोक लगा दी।
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कार मालिक ने टैक्स चुकाने के बावजूद जब्ती क्यों हुई?
अदालत के सामने यह तथ्य रखा गया कि कार मालिक ने 1 करोड़ रुपये जीएसटी और 60 लाख रुपये रोड टैक्स का भुगतान किया था। इसके बावजूद, रंजीत एन (व्हीकल इंस्पेक्टर) ने कोडिगेहली पुलिस थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और दस्तावेजों में हेरफेर के आरोपों के तहत शिकायत दर्ज कराई और रात 11:30 बजे कार को जब्त करवा लिया। 
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क्या SMVI के पास आधी रात में वाहन जब्त करने का अधिकार था?
इस अहम सवाल पर अदालत ने राज्य के लोक अभियोजक (स्टेट पब्लिक प्रॉजीक्यूटर) (SPP) से स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर व्हीकल इंस्पेक्टर यह साबित नहीं कर पाया कि उसे इस तरह निजी घर में प्रवेश कर वाहन जब्त करने का वैधानिक अधिकार था, तो उसके खिलाफ जांच के आदेश दिए जा सकते हैं। 

RTO अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
न्यायमूर्ति एम प्रसन्ना ने याचिकाकर्ता एच1 कार केयर की सुनवाई के दौरान यह भी सवाल उठाया कि अगर वास्तव में धोखाधड़ी हुई थी, तो रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में शामिल आरटीओ अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने इस चूक पर कड़ी नाराजगी जताई।

लैम्बॉर्गिनी कार की खरीद और रजिस्ट्रेशन का पूरा मामला क्या है?
याचिकाकर्ता ने बताया कि उसने 1 सितंबर 2025 को एक अधिकृत डीलर से Lamborghini Huracan (लैंबोर्गिनी हुराकैन) कार 3,00,68,729 रुपये में खरीदी। कार को रजिस्ट्रेशन के लिए इंदिरानगर आरटीओ भेजा गया और 19 सितंबर 2025 को पंजीकरण हो गया। हालांकि वाहन का निर्माण वर्ष 2021 दर्ज था।

हाईकोर्ट ने "हीरोगिरी" पर क्या टिप्पणी की?
कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता की ओर से सच में धोखाधड़ी साबित होती है, तो याचिका खारिज की जा सकती है। लेकिन अगर व्हीकल इंस्पेक्टर यह नहीं दिखा पाया कि उसे आधी रात में निजी घर के गैराज में घुसकर वाहन बाहर निकालने का अधिकार था, तो उसकी यह "हीरोगिर" बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

याचिकाकर्ता ने जब्ती की प्रक्रिया पर क्या आरोप लगाए?
याचिकाकर्ता के मुताबिक, शिकायत दर्ज होने के बाद बिना किसी नोटिस और उसकी अनुपस्थिति में व्हीकल इंस्पेक्टर घर में घुसा, गैराज से कार टो कर ले गया और अलग-अलग पुलिस थानों में रखवाया। इसके बाद याचिकाकर्ता को कार का पता लगाने के लिए कई थानों के चक्कर लगाने पड़े। 

सरकार का पक्ष क्या है?
लोक अभियोजक ने दलील दी कि कार पहले तेलंगाना स्थित एक कंपनी ने 2022 में अस्थायी रजिस्ट्रेशन पर खरीदी थी, लेकिन स्थायी पंजीकरण नहीं कराया गया। बाद में इसे डेमो वाहन के रूप में इस्तेमाल कर दोबारा बिक्री के लिए रखा गया। सरकार के अनुसार, याचिकाकर्ता ने इनवॉइस में हेरफेर कर राज्य को नुकसान पहुंचाया और नियमों के तहत व्हीकल इंस्पेक्टर ने कार्रवाई की। 

आगे क्या होगा?
अदालत ने संकेत दिया है कि अगर आरटीओ कार्यालय में पहले के रजिस्ट्रेशन विवरण हटाकर नए विवरण डाले गए हैं, तो इसमें शामिल हर अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, कार मालिक के खिलाफ जांच पर रोक है। और व्हीकल इंस्पेक्टर की शक्तियों पर अदालत का जवाब इंतजर किया जा रहा है। 

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