Safety: सड़क सुरक्षा के लिए सरकार का बड़ा कदम! वाहनों के बीच V2V कम्युनिकेशन सिस्टम लागू करने का ड्राफ्ट जारी
सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन के लिए एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इस प्रस्ताव के तहत चरणबद्ध तरीके से Vehicle-to-Vehicle (V2V) Communication System लागू करने की योजना बनाई गई है।
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विस्तार
देश में सड़क हादसों को रोकने और वाहनों की सुरक्षा को अत्याधुनिक बनाने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक अहम कदम उठाया है। मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में संशोधन का प्रस्ताव रखते हुए एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है।
इस प्रस्ताव के तहत वाहनों के बीच आपस में सीधा संवाद स्थापित करने वाली वाहन से वाहन संचार प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का खाका तैयार किया गया है। यह तकनीक आसपास चल रहे वाहनों को गति, स्थिति, दिशा और त्वरण जैसी वास्तविक समय की जानकारी आपस में साझा करने में सक्षम बनाती है।
इस व्यवस्था का मूल मकसद आपातकालीन परिस्थितियों में चालकों को समय रहते सतर्क करना है।
यह नई तकनीक किन-किन जोखिम भरी स्थितियों में चालकों को अलर्ट करेगी?
सड़क पर अचानक बनने वाली खतरनाक स्थितियों में यह प्रणाली वाहन चालकों और वाहन के आंतरिक सुरक्षा तंत्र को अग्रिम चेतावनी जारी करेगी।
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अचानक ब्रेक लगना:
अगर आगे चल रहा वाहन अचानक ब्रेक लगाता है, तो पीछे आ रहे वाहनों को तुरंत इसकी सूचना मिल जाएगी ताकि टक्कर से बचा जा सके। -
आमने-सामने की टक्कर का जोखिम:
आगे होने वाली संभावित टक्कर के खतरे को भांपकर यह प्रणाली चालक को पहले ही आगाह कर देगी। -
असुरक्षित तरीके से लेन बदलना:
गलत या असुरक्षित तरीके से लेन बदलते समय होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में यह अलर्ट बेहद मददगार साबित होगा। -
आपातकालीन वाहनों का आगमन:
एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहनों के पास आने की सूचना पहले ही मिल जाएगी, जिससे उन्हें रास्ता देना आसान हो जाएगा।
इस संचार प्रणाली के संचालन के लिए स्पेक्ट्रम फ्रीक्वेंसी और लाइसेंसिंग के क्या नियम तय किए गए हैं?
इस अत्याधुनिक तकनीक को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक विशेष फ्रीक्वेंसी बैंड निर्धारित किया गया है।
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निर्धारित फ्रीक्वेंसी बैंड:
वाहन से वाहन संचार और अन्य इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम अनुप्रयोगों के लिए 5.875 गीगाहर्ट्ज से 5.925 गीगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी बैंड को चुना गया है। -
लाइसेंस प्रक्रिया से छूट:
दूरसंचार विभाग ने 10 जून 2026 के अपने निर्देश के जरिए इस फ्रीक्वेंसी बैंड के उपयोग को लाइसेंसिंग आवश्यकताओं से पूरी तरह मुक्त कर दिया है।
पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियों की तुलना में यह तकनीक कैसे अधिक प्रभावी है?
वर्तमान में इस्तेमाल होने वाले सुरक्षा ढांचों की तुलना में यह नई प्रणाली कहीं अधिक व्यापक सुरक्षा कवच प्रदान करती है।
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सीधी दृष्टि सीमा से परे की जानकारी:
पारंपारिक वाहन सुरक्षा तंत्र केवल ऑनबोर्ड सेंसर और चालक की त्वरित प्रतिक्रिया पर निर्भर होते हैं। इसके विपरीत, यह नई तकनीक चालक की सीधी नजर से परे की स्थितियों की जानकारी भी प्रदान कर सकती है। -
एडवांस्ड ड्राइवर सहायता प्रणाली का समर्थन:
यह व्यवस्था एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम के पूरक के रूप में काम करेगी। -
सक्रिय दुर्घटना रोकथाम:
दुर्घटना होने से पहले ही उसकी रोकथाम, कनेक्टेड मोबिलिटी और भविष्य के बुद्धिमान परिवहन अनुप्रयोगों को मजबूत आधार देने में यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
वाहनों में इस प्रणाली को लागू करने की समयसीमा और चरणबद्ध योजना क्या है?
मंत्रालय ने श्रेणी एल, एम और एन के वाहनों के लिए इस व्यवस्था को लागू करने की एक स्पष्ट चरणबद्ध समयसीमा तय की है।
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पहला चरण (1 अक्तूबर 2027 से):
1 अक्तूबर 2027 या उसके बाद निर्मित होने वाले एल, एम और एन श्रेणी के उन सभी वाहनों के लिए एआईएस-230 मानक का पालन करना अनिवार्य होगा जिनमें यह संचार प्रणाली लगी होगी। -
दूसरा चरण (1 अक्तूबर 2028 से): 1 अक्तूबर 2028 या उसके बाद निर्मित होने वाले एल, एम और एन श्रेणी के सभी नए वाहनों में एआईएस-230 मानकों के अनुरूप इस संचार प्रणाली का लगा होना अनिवार्य कर दिया जाएगा।
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तैयारी का अवसर:
इस चरणबद्ध दृष्टिकोण से वाहन निर्माताओं और अन्य हितधारकों को नए नियमों और तकनीकी आवश्यकताओं को अपनाने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।
एआईएस-230 मानक क्या है और इसमें किन प्रमुख तकनीकी आवश्यकताओं का समावेश किया गया है?
एआईएस-230 मानक फैक्ट्री-फिटेड ऑन-बोर्ड यूनिट्स को कवर करता है, जो 5.875 गीगाहर्ट्ज से 5.925 गीगाहर्ट्ज बैंड में सेलुलर व्हीकल-टू-एवरीथिंग तकनीक का उपयोग करते हैं।
इसके प्रमुख तकनीकी दिशानिर्देशों और मानकों में ये चीजें शामिल हैं:
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रेडियो प्रदर्शन और फ्रीक्वेंसी स्थिरता: सिग्नल ट्रांसमिशन का सटीक प्रदर्शन और उसकी स्थिरता सुनिश्चित करना।
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आउटपुट पावर और रिसीवर संवेदनशीलता: सिग्नल भेजने और प्राप्त करने की क्षमता के सटीक मानक तय करना।
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ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम पोजीशनिंग: सटीक स्थान और नेविगेशन ट्रैकिंग की व्यवस्था करना।
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विद्युत और बिजली आपूर्ति संबंधी आवश्यकताएं: वाहन के विद्युत तंत्र के साथ सुरक्षित जुड़ाव सुनिश्चित करना।
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इलेक्ट्रोमैग्नेटिक संगतता: अन्य इलेक्ट्रॉनिक तरंगों के हस्तक्षेप से बचाव की क्षमता।
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साइबर सुरक्षा और संचार सुरक्षा: वाहन के संचार डेटा को हैकिंग और अनधिकृत पहुंच से सुरक्षित रखना।
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सड़क सुरक्षा अनुप्रयोग प्रदर्शन: विभिन्न सुरक्षा अलर्ट को सही समय पर क्रियान्वित करने की क्षमता।
इस मानक में इमरजेंसी ब्रेक अलर्ट, फॉरवर्ड कोलिजन वार्निंग, गलत दिशा में वाहन चलाने की चेतावनी और इमरजेंसी व्हीकल अलर्ट जैसे सुरक्षा उपयोग के मामलों को चरणबद्ध तरीके से शामिल किया गया है।
इस नीतिगत ढांचे की पृष्ठभूमि क्या रही है और इसके अंतिम रूप लेने की क्या प्रक्रिया है?
इस नीति को आकार देने में विशेषज्ञों की समितियों और टास्क फोर्स का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
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टास्क फोर्स की सिफारिश:
सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा गठित एक समर्पित टास्क फोर्स ने सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए 5.9 गीगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी रेंज के उपयोग की सिफारिश की थी। -
तकनीकी समिति का विचार:
इसके बाद 7 मई 2026 को आयोजित अपनी 56वीं बैठक में केंद्रीय मोटर वाहन नियम-तकनीकी स्थायी समिति ने एआईएस-230 मानक के निर्माण पर विचार-विमर्श किया, जिसने इस नियामक क्रियान्वयन को तकनीकी आधार प्रदान किया। -
प्रतिक्रिया और अंतिम अधिसूचना:
मंत्रालय के अनुसार, यह प्रस्तावित ढांचा वाहनों की स्थिति संबंधी जागरूकता बढ़ाएगा और हादसों के जोखिम को कम करेगा। इस ड्राफ्ट नियमों पर 30 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद प्राप्त सभी सुझावों और टिप्पणियों की समीक्षा की जाएगी, जिसके पश्चात अंतिम अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।