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FASTag: फास्टैग एनुअल पास कहां से खरीद रहे हैं आप? एक गलती और हो जाएगा खाता खाली, जानिए कैसे बचें?

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुयश पांडेय Updated Sat, 24 Jan 2026 04:13 PM IST
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सार

NHAI ने फास्टैग (FASTag) एनुअल पास को लेकर बढ़ते ऑनलाइन स्कैम्स पर वाहन मालिकों को अलर्ट किया है। स्कैमर्स नकली वेबसाइट और लिंक के जरिए खुद को आधिकारिक विक्रेता बताकर '1 साल का एनुअल पास' बेचने का दावा कर रहे हैं, जिससे लोग 3,000 रुपये तक का नुकसान और डाटा चोरी का शिकार हो रहे हैं। 

NHAI Warns Vehicle Owners Against Fake FASTag Annual Pass Scams; Buy Only via Rajmargyatra App
फास्टैग एनुअल पास (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : X
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विस्तार
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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने फास्टैग (FASTag) एनुअल पास को लेकर चल रहे घोटालों के बारे में वाहन मालिकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। हाल के दिनों में ऐसे मामलों में भारी बढ़ोतरी देखी गई है जहां स्कैमर्स नकली वेबसाइट और लिंक के जरिए लोगों को ठग रहे हैं। धोखेबाज खुद को फास्टैग सिस्टम का आधिकारिक विक्रेता बताकर लोगों को 'एक साल का एनुअल पास' बेचने का दावा कर रहे हैं। इन जाली प्लेटफार्मों के चक्कर में पड़कर ग्राहक न केवल 3,000 रुपये तक का आर्थिक नुकसान उठा रहे हैं, बल्कि उनकी निजी जानकारी और डाटा भी चोरी किया जा रहा है।
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सिर्फ 'राजमार्गयात्रा' एप ही है असली जरिया

NHAI ने स्पष्ट कर दिया है कि फास्टैग एनुअल पास खरीदने का एकमात्र आधिकारिक तरीका 'राजमार्गयात्रा' (Rajmargyatra) मोबाइल एप है। किसी भी अन्य वेबसाइट, सोशल मीडिया लिंक या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के पास यह पास जारी करने का कोई अधिकार नहीं है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि 'राजमार्गयात्रा' एप के अलावा किसी अन्य जगह पर गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर, फास्टैग डिटेल या भुगतान की जानकारी साझा करने से आपके साथ धोखाधड़ी हो सकती है।
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कैसे काम करता है यह स्कैम?

जालसाज ऐसे नकली लिंक तैयार करते हैं जो देखने में बिल्कुल असली लगते हैं। इन लिंक्स के जरिए वे उपयोगकर्ताओं से वाहन पंजीकरण, फास्टैग नंबर और बैंकिंग जानकारी भरवाते हैं। पैसे कटने के बाद भी कोई पास जनरेट नहीं होता और डाटा चोरी हो जाता है। NHAI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी उपयोगकर्ताओं को आगाह किया है कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।

क्या है फास्टैग एनुअल पास?

इंडियन हाईवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (IHMCL) के अनुसार, यह पास निजी कारों, जीप और वैन के लिए है। इसकी वैधता 1 वर्ष या 200 टोल ट्रिप (जो भी पहले पूरा हो) तक होती है। इसका उद्देश्य टोल प्लाजा पर वेटिंग टाइम को कम करना और बार-बार यात्रा करने वालों को सुविधा देना है। 

स्कैम से बचने के लिए NHAI के सुरक्षा सुझाव

NHAI ने धोखाधड़ी से बचने के लिए वाहन मालिकों को निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी है, फास्टैग सेवाएं केवल 'राजमार्गयात्रा' एप, बैंकिंग एप या NPCI की आधिकारिक वेबसाइट (माई फास्टैग) से ही लें। वाट्सएप, एसएमएस या कॉल पर आए किसी भी लिंक के जरिए फास्टैग रिचार्ज या QR कोड स्कैन न करें। यह फिशिंग का प्रयास हो सकता है। अपने फास्टैग बैलेंस और लेन-देन पर हमेशा नजर रखें। अगर कोई अनधिकृत कटौती होती है, तो तुरंत अपने बैंक या NHAI के टोल-फ्री नंबर 1033 पर रिपोर्ट करें। अपना ओटीपी, फास्टैग नंबर या वाहन नंबर किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।

अगर आप धोखाधड़ी का शिकार हो जाएं तो क्या करें?

यदि आपको लगता है कि आपके साथ धोखाधड़ी हुई है, तो तुरंत ये कदम उठाएं। भारत सरकार की वेबसाइट cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। अपने बैंक को सूचित करें और अपना फास्टैग अकाउंट ब्लॉक करवाएं। सुरक्षित यात्रा और डिजिटल सुरक्षा के लिए यह अनिवार्य है कि आप फास्टैग एनुअल पास केवल राजमार्गयात्रा एप के माध्यम से ही खरीदें। किसी भी अनधिकृत लिंक या प्रलोभन से बचें।
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