BYD: सरकार ने निवेश नियमों में दी ढील, लेकिन चीनी इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों को अब भी मंजूरी जरूरी
भारत से सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश पर कुछ पाबंदियों में ढील देने के सरकार के फैसले के बावजूद, चीनी इलेक्ट्रिक गाड़ी बनाने वाली कंपनी BYD को भारत में अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लान को आगे बढ़ाने के लिए और इंतजार करना होगा।
विस्तार
भारत सरकार ने पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश नियमों में कुछ ढील दी है, लेकिन इसका फायदा अभी इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों को नहीं मिलेगा।
चीनी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता BYD (बीवाईडी) को भारत में अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लान को आगे बढ़ाने के लिए अभी और इंतजार करना होगा। क्योंकि नई नीति में ईवी निर्माण को शामिल नहीं किया गया है।
इसका मतलब है कि चीन की इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों के निवेश प्रस्ताव अभी भी पूरी सरकारी जांच और मंजूरी के दायरे में ही रहेंगे।
सरकार ने निवेश नियमों में क्या बदलाव किए हैं?
केंद्र सरकार ने प्रेस नोट 3 के तहत कुछ संशोधन किए हैं।
नई व्यवस्था के अनुसार पड़ोसी देशों के निवेशकों को अब 10 प्रतिशत तक गैर-नियंत्रक लाभकारी हिस्सेदारी (नॉन-कंट्रोलिंग बेनिफिशियल ओनरशिप) स्वत: मार्ग (ऑटोमैटिक रूट) के जरिए रखने की अनुमति दी गई है।
हालांकि यह निवेश तभी संभव होगा जब निवेशक को प्रबंधन नियंत्रण न मिले और वह निर्धारित सेक्टर सीमाओं के भीतर ही रहे।
किन क्षेत्रों में निवेश को तेजी से मंजूरी मिलेगी?
सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों के लिए फास्ट-ट्रैक मंजूरी प्रक्रिया भी शुरू की है।
नई व्यवस्था के तहत चयनित क्षेत्रों में निवेश प्रस्तावों को 60 दिनों के भीतर मंजूरी देने की व्यवस्था की गई है।
इन क्षेत्रों में शामिल हैं:
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कैपिटल गुड्स मैन्युफैक्चरिंग
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इलेक्ट्रॉनिक कैपिटल गुड्स
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इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स
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पॉलीसिलिकॉन और इंगोट वेफर उत्पादन
ये क्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
क्या EV कंपनियों के निवेश पर अभी भी कड़ी निगरानी रहेगी?
सरकारी अधिकारियों के अनुसार यह नीति बदलाव मुख्य रूप से महत्वपूर्ण औद्योगिक इनपुट्स में निवेश बढ़ाने के लिए किया गया है। न कि तैयार वाहनों के निर्माण में विदेशी कंपनियों की एंट्री को आसान बनाने के लिए।इस कारण इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों के बड़े निवेश प्रस्ताव, जैसे BYD की भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने की योजना, फिलहाल इस बदलाव से लाभ नहीं उठा पाएंगे।
पहले किन कंपनियों के निवेश प्रस्ताव प्रभावित हुए?
प्रेस नोट 3 के नियम अप्रैल 2020 में लागू किए गए थे, जिनके तहत भारत से जमीन सीमा साझा करने वाले देशों के निवेशकों को पहले सरकारी मंजूरी लेनी पड़ती है।
इन नियमों का असर कई चीनी कंपनियों पर पड़ा है।
उदाहरण के तौर पर:
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ग्रेट वॉल मोटर ने 2022 में भारत में लगभग 1 अरब डॉलर निवेश की योजना वापस ले ली थी।
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2023 में BYD का लगभग 1 अरब डॉलर का निवेश प्रस्ताव भी सुरक्षा चिंताओं के कारण खारिज कर दिया गया था।
क्या भविष्य में और क्षेत्रों को शामिल किया जा सकता है?
सरकार ने इस नीति में लचीलापन भी रखा है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल के तहत कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति को यह अधिकार दिया गया है कि आवश्यकता पड़ने पर अन्य क्षेत्रों को भी फास्ट-ट्रैक मंजूरी सूची में शामिल किया जा सके।
क्या इस बदलाव से EV सप्लाई चेन को फायदा हो सकता है?
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही तैयार इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण को राहत नहीं मिली हो, लेकिन इससे ईवी से जुड़ी सप्लाई चेन को फायदा मिल सकता है।
जैसे बैटरी सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और अन्य तकनीकी इनपुट्स के उत्पादन में निवेश बढ़ सकता है। जो भविष्य में भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडस्ट्री को मजबूत कर सकता है।
क्या BYD को क्यों करना पड़ेगा इंतजार?
नई नीति में कुछ क्षेत्रों में निवेश को आसान बनाया गया है, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण अभी भी सख्त नियमों के तहत ही रहेगा।
इस कारण BYD जैसी कंपनियों को भारत में अपने बड़े निवेश और मैन्युफैक्चरिंग प्लान को आगे बढ़ाने के लिए फिलहाल सरकार की मंजूरी का इंतजार करना होगा।
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