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सप्लाई संकट के बीच रफ्तार बरकरार: देश में कार बिक्री 4.7 मिलियन पार होने को तैयार, SUV डिमांड में भी रही तेजी
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Sun, 15 Mar 2026 01:27 PM IST
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सार
SUV demand India auto industry: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और सप्लाई चेन की समस्याओं के बावजूद भारत की पैसेंजर व्हीकल इंडस्ट्री लगातार मजबूती दिखा रही है। अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक देश में लगभग 4.7 मिलियन यूनिट्स की कार बिक्री दर्ज की जा सकती है। ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर लॉजिस्टिक्स और फ्रेट से जुड़ी बाधाएं कम होतीं, तो बिक्री का यह आंकड़ा और भी ज्यादा हो सकता था।
कार
- फोटो : PTI
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विस्तार
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और सप्लाई चेन की समस्याओं के बावजूद भारत की पैसेंजर व्हीकल इंडस्ट्री लगातार मजबूती दिखा रही है। अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक देश में लगभग 4.7 मिलियन यूनिट्स की कार बिक्री दर्ज की जा सकती है। ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर लॉजिस्टिक्स और फ्रेट से जुड़ी बाधाएं कम होतीं, तो बिक्री का यह आंकड़ा और भी ज्यादा हो सकता था।
लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन बनी चुनौती
हाल के महीनों में ऑटो कंपनियों को कई सप्लाई से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। इनमें बढ़ती ट्रांसपोर्टेशन लागत, फ्रेट रेट्स में तेजी और कुछ इलाकों में ट्रक और लॉजिस्टिक्स की कमी साथ में वैश्विक तनाव के कारण सप्लाई में देरी जैसी समस्याएं रही। इन कारणों से कई कंपनियों को फैक्ट्री से डीलर्स तक वाहनों की डिलीवरी धीमी करनी पड़ी।
ये भी पढ़े: सिर्फ आराम नहीं, रफ्तार भी: i20 N Line से लेकर विर्टस तक, ड्राइविंग के शौकीनों के लिए बेस्ट ऑटोमैटिक ऑप्शन्स
डीलर्स के पास इन्वेंटरी कम
डीलर्स का कहना है कि वित्त वर्ष के अंत में आमतौर पर वाहन बिक्री तेज होती है, लेकिन इस बार सप्लाई कम होने से इन्वेंटरी पर दबाव है। कुछ डीलर्स के अनुसार उन्हें 10–15% तक कम सप्लाई ही मिल रही है। इस वजह से कई जगह ग्राहकों को लंबा वेटिंग पीरियड और सीमित मॉडल उपलब्धता का सामना करना पड़ रहा है।
फिर भी मजबूत है घरेलू मांग
अब यहां पर खास बात यह है कि इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय कार बाजार की सबसे बड़ी ताकत मजबूत घरेलू मांग बनी हुई है। कार कंपनियों के अनुसार ऑर्डर बुक मजबूत है, शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में मांग बनी हुई है और फाइनेंसिंग विकल्पों की वजह से खरीदार बढ़ रहे हैं। ऑटो इंडस्ट्री संगठन सोसायती ऑफ इंडियन ऑटोमाेबाइल मैन्युफैक्चर्स ने भी सरकार के साथ लॉजिस्टिक्स और सप्लाई से जुड़े मुद्दे उठाए हैं।
एसयूवी सेगमेंट बना सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय कार बाजार में सबसे बड़ा बदलाव एसयूवी सेगमेंट की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता है। आज भारत में बिकने वाली कुल कारों में एसयूवी का हिस्सा सबसे ज्यादा हो चुका है। इसके पीछे बेहतर रोड प्रेजेंस, ज्यादा स्पेस, ऊंचा ग्राउंड क्लीयरेंस और प्रीमियम फीचर्स जैसे कारण हैं। इसके अलावा मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां भी इस बात का सबूत दे रही हैं। जैसे की महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी ने बताया कि फरवरी में कंपनी ने एसयूवी बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज की, जो बाजार में मजबूत मांग दिखाती है। वहीं, मारुति सुजुकी ने कहा कि वह वैश्विक परिस्थितियों पर नजर रख रही है, लेकिन मजबूत घरेलू मांग उत्पादन को सपोर्ट कर रही है।
ये भी पढ़े: FASTag Annual pass: फास्टैग वार्षिक पास एक अप्रैल से होगा महंगा, जानें एनएचएआई ने कितने बढ़ाए दाम?
सप्लाई चेन पहले से ज्यादा मजबूत
ऑटो इंडस्ट्री ने पिछले कुछ वर्षों में सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। आज कई कंपनियों में लोकलाइजेशन लेवल 70–80% से ज्यादा हो चुका है। इसका फायदा यह है कि ग्लोबल सप्लाई पर निर्भरता कम हुई है, उत्पादन में स्थिरता बनी रहती है। जिसपर अंतरराष्ट्रीय संकट का असर कम पड़ता है
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर मौजूदा मांग बनी रहती है तो अगले कुछ वर्षों में भारत का कार बाजार नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है। अनुमान है कि FY27 तक भारत की पैसेंजर व्हीकल बिक्री 5 मिलियन यूनिट्स से ज्यादा हो सकती है। यह भारत को दुनिया के सबसे बड़े कार बाजारों में और मजबूत स्थिति देगा।
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लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन बनी चुनौती
हाल के महीनों में ऑटो कंपनियों को कई सप्लाई से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। इनमें बढ़ती ट्रांसपोर्टेशन लागत, फ्रेट रेट्स में तेजी और कुछ इलाकों में ट्रक और लॉजिस्टिक्स की कमी साथ में वैश्विक तनाव के कारण सप्लाई में देरी जैसी समस्याएं रही। इन कारणों से कई कंपनियों को फैक्ट्री से डीलर्स तक वाहनों की डिलीवरी धीमी करनी पड़ी।
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डीलर्स के पास इन्वेंटरी कम
डीलर्स का कहना है कि वित्त वर्ष के अंत में आमतौर पर वाहन बिक्री तेज होती है, लेकिन इस बार सप्लाई कम होने से इन्वेंटरी पर दबाव है। कुछ डीलर्स के अनुसार उन्हें 10–15% तक कम सप्लाई ही मिल रही है। इस वजह से कई जगह ग्राहकों को लंबा वेटिंग पीरियड और सीमित मॉडल उपलब्धता का सामना करना पड़ रहा है।
फिर भी मजबूत है घरेलू मांग
अब यहां पर खास बात यह है कि इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय कार बाजार की सबसे बड़ी ताकत मजबूत घरेलू मांग बनी हुई है। कार कंपनियों के अनुसार ऑर्डर बुक मजबूत है, शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में मांग बनी हुई है और फाइनेंसिंग विकल्पों की वजह से खरीदार बढ़ रहे हैं। ऑटो इंडस्ट्री संगठन सोसायती ऑफ इंडियन ऑटोमाेबाइल मैन्युफैक्चर्स ने भी सरकार के साथ लॉजिस्टिक्स और सप्लाई से जुड़े मुद्दे उठाए हैं।
एसयूवी सेगमेंट बना सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय कार बाजार में सबसे बड़ा बदलाव एसयूवी सेगमेंट की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता है। आज भारत में बिकने वाली कुल कारों में एसयूवी का हिस्सा सबसे ज्यादा हो चुका है। इसके पीछे बेहतर रोड प्रेजेंस, ज्यादा स्पेस, ऊंचा ग्राउंड क्लीयरेंस और प्रीमियम फीचर्स जैसे कारण हैं। इसके अलावा मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां भी इस बात का सबूत दे रही हैं। जैसे की महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी ने बताया कि फरवरी में कंपनी ने एसयूवी बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज की, जो बाजार में मजबूत मांग दिखाती है। वहीं, मारुति सुजुकी ने कहा कि वह वैश्विक परिस्थितियों पर नजर रख रही है, लेकिन मजबूत घरेलू मांग उत्पादन को सपोर्ट कर रही है।
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सप्लाई चेन पहले से ज्यादा मजबूत
ऑटो इंडस्ट्री ने पिछले कुछ वर्षों में सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। आज कई कंपनियों में लोकलाइजेशन लेवल 70–80% से ज्यादा हो चुका है। इसका फायदा यह है कि ग्लोबल सप्लाई पर निर्भरता कम हुई है, उत्पादन में स्थिरता बनी रहती है। जिसपर अंतरराष्ट्रीय संकट का असर कम पड़ता है
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर मौजूदा मांग बनी रहती है तो अगले कुछ वर्षों में भारत का कार बाजार नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है। अनुमान है कि FY27 तक भारत की पैसेंजर व्हीकल बिक्री 5 मिलियन यूनिट्स से ज्यादा हो सकती है। यह भारत को दुनिया के सबसे बड़े कार बाजारों में और मजबूत स्थिति देगा।
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