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Used Cars: पुरानी कार खरीदते समय गलती न करें, ठगी से बचने के लिए ये पांच बातें जरूर जांचें

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Wed, 04 Feb 2026 01:39 PM IST
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सार

पुरानी कार खरीदते समय पूरी तरह से जांच करना बहुत जरूरी है। क्योंकि जरूरी डिटेल्स को नजरअंदाज करने से कार की विश्वसनीयता संदिग्ध हो सकती हैं और ओनरशिप की लागत भी बढ़ सकती है।

Used Car Buying Guide: 5 Steps to Avoid Fraud and Costly Mistakes
Used Car - फोटो : Freepik
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विस्तार
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नई कारों की बढ़ती कीमतों के बीच सेकेंड-हैंड कार खरीदना कई लोगों के लिए समझदारी भरा विकल्प बन गया है। लेकिन थोड़ी-सी लापरवाही आपको बाद में भारी खर्च और कानूनी झंझट में डाल सकती है। इस्तेमाल की गई कार की हालत, रिकॉर्ड और कागजात ठीक से न जांचे जाएं, तो भरोसेमंद सौदा हाथ से निकल सकता है। 

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यहां पांच जरूरी चरण बताए गए हैं, जिनकी जांच करके आप ठगी और बाद की परेशानियों से बच सकते हैं। 

1) सर्विस और मेंटेनेंस हिस्ट्री जरूर जांचें
किसी भी पुरानी कार की असली सेहत उसकी सर्विस हिस्ट्री से पता चलती है। नियमित ऑयल चेंज, ब्रेक सर्विस, और तय अंतराल पर इंस्पेक्शन, ये सब अच्छे मेंटेनेंस के संकेत होते हैं।
अगर रिकॉर्ड अधूरे हों या बीच-बीच में गैप दिखे, तो यह खराब देखभाल या आने वाले समय में ज्यादा खर्च का संकेत हो सकता है।

कैसे जांचें:
कार का रजिस्ट्रेशन नंबर अधिकृत सर्विस सेंटर में साझा करें। आमतौर पर 10,000 किमी या एक साल के अंतराल पर नियमित सर्विस होना सकारात्मक संकेत माना जाता है। 

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2) इंश्योरेंस रिकॉर्ड से समझें दुर्घटना का इतिहास
इंश्योरेंस पॉलिसी में दर्ज इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (Insured Declared Value) (IDV) और नो क्लेम बोनस (NCB) पर ध्यान दें।

  • लगातार NCB होना आमतौर पर दुर्घटना-मुक्त इस्तेमाल का संकेत देता है।
  • IDV में अचानक गिरावट या NCB का न होना पहले किए गए क्लेम या बड़ी मरम्मत की ओर इशारा कर सकता है।

ऐसी स्थिति में सौदा आगे बढ़ाने से पहले कारण स्पष्ट कर लें। 

3) एक्सटीरियर कंडीशन से पहचानें छुपी खामियां
कार का बाहरी निरीक्षण बहुत कुछ बता देता है। जंग, असमान पेंट, पैनल गैप्स का मेल न खाना, अलग-अलग शेड का पेंट- ये सभी दुर्घटना या घटिया मरम्मत के संकेत हो सकते हैं।
साथ ही, सभी शीशों पर उकेरे गए कोड/मार्किंग मिलान करें। अलग होने पर शीशे बदले जाने का शक होता है।टायर, ब्रेक और अंडरबॉडी पर खास ध्यान दें- इनकी मरम्मत महंगी पड़ सकती है। 

4) ओनरशिप और दस्तावेज़ों की सटीकता जांचें
आमतौर पर सिंगल-ओनर कार को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि उसकी इस्तेमाल हिस्ट्री और कागजात सत्यापित करना आसान होता है।
रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) में सेलर का नाम और पता सही हो, और चेसिस/इंजन नंबर में कोई विसंगति न हो, इसकी जांच जरूर करें। 

5) कानूनी कागजात और बकाया साफ हों

खरीद से पहले यह पक्का करें कि:

  • वैध इंश्योरेंस और अपडेटेड PUC मौजूद हो
  • रोड टैक्स पूरा भरा हो
  • कोई पेंडिंग लोन, चालान या कानूनी केस न हो

अगर कार हाइपोथेक्शन में है या राज्य बदलकर ट्रांसफर होनी है, तो नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना जरूरी है। ताकि ओनरशिप ट्रांसफर बिना अड़चन हो सके।

निष्कर्ष: जांच-पड़ताल ही सबसे बड़ी सुरक्षा 
सेकेंड-हैंड कार में अच्छा सौदा वही है, जिसमें मेंटेनेंस, रिकॉर्ड और कागजात, तीनों साफ हों। इन पांच स्टेप्स को अपनाकर आप न सिर्फ ठगी से बच सकते हैं, बल्कि लंबे समय तक परेशानी-रहित मालिकाना अनुभव भी सुनिश्चित कर सकते हैं।

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