EV Two Wheelers: भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की रफ्तार होगी तेज, अगले वित्त वर्ष में 16-18% विकास का अनुमान
Electric Two Wheelers: भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक का बाजार एक बार फिर तेजी पकड़ने जा रहा है। क्रिसिल रेटिंग्स के अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बिक्री 16 से 18 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। चालू वर्ष में चीन से आने वाले खास मैग्नेट्स की कमी के कारण उत्पादन और बिक्री पर असर पड़ा, जिससे ग्रोथ घटकर 12-13% तक सीमित रह गई।
विस्तार
भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक का बाजार एक बार फिर रफ्तार पकड़ने वाला है। क्रिसिल रेटिंग्स का अनुमान है कि अगले साल (2026-27) इनकी बिक्री में 16 से 18% की बढ़ोतरी होगी। इस साल सामान की सप्लाई में कुछ दिक्कतों की वजह से रफ्तार थोड़ी कम रही थी, लेकिन अब हालात तेजी से सुधर रहे हैं और बाजार फिर से चमकने के लिए तैयार है।
सप्लाई की बाधाएं हुईं दूर
इस साल इलेक्ट्रिक स्कूटरों की बिक्री में उतनी तेजी नहीं देखी गई जितनी पिछले साल थी। पिछले साल जहां बिक्री 22% बढ़ी थी, वहीं इस साल यह 12-13% के आसपास ही सिमट सकती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि चीन से आने वाले खास चुंबक, जो मोटर में लगते हैं, उनकी कमी हो गई थी।
क्रिसिल के सीनियर डायरेक्टर अनुज सेठी का कहना है कि सामान की कमी से साल के बीच में उत्पादन और बिक्री दोनों पर असर पड़ा। लेकिन अब अच्छी खबर यह है कि सप्लाई फिर से शुरू हो गई है और कंपनियां अब सिर्फ चीन पर निर्भर न रहकर दूसरे देशों से भी सामान मंगा रही हैं। इसीलिए उम्मीद है कि अगले साल फिर से बिक्री जोर पकड़ेगी।
1. बिक्री और विकास दर
भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में पिछले साल यानी 2024-25 में 22% की शानदार बढ़ोतरी देखी गई थी, लेकिन इस साल (2025-26) सप्लाई चेन की दिक्कतों और खास तौर पर मैग्नेट्स की कमी की वजह से यह रफ्तार थोड़ी धीमी पड़कर 12-13% तक रह सकती है। हालांकि, अगले साल (2026-27) हालात फिर से सुधरने की उम्मीद है, जहां सामान की बेहतर सप्लाई और नए मॉडल्स के आने से बाजार एक बार फिर 16-18% की तेजी से आगे बढ़ेगा।
2. बाजार हिस्सेदारी में बदलाव
बाजार में हिस्सेदारी की बात करें तो पुरानी और भरोसेमंद कंपनियों (जैसे टीवीएस, बजाज और हीरो) ने नए स्टार्टअप्स को पीछे छोड़ते हुए अपनी पकड़ काफी मजबूत कर ली है। जनवरी 2025 में जहां इन स्थापित कंपनियों की बाजार में हिस्सेदारी 47% थी, वहीं जनवरी 2026 तक यह बढ़कर 62% हो गई है। यह आंकड़े उन 10 बड़ी कंपनियों के विश्लेषण पर आधारित हैं जो भारत के कुल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार का लगभग 85% हिस्सा संभालती हैं।
3. परिचालन लागत की तुलना
अगर पेट्रोल और इलेक्ट्रिक स्कूटर को चलाने के खर्च की तुलना करें, तो दोनों के बीच जमीन-आसमान का फर्क है। जहां पेट्रोल वाले स्कूटर को चलाने का खर्च करीब 2 से ढाई रुपये प्रति किलोमीटर आता है, वहीं इलेक्ट्रिक स्कूटर को चलाने का खर्च मात्र 3 पैसे प्रति किलोमीटर है। यानी इलेक्ट्रिक स्कूटर पेट्रोल के मुकाबले जेब पर बहुत हल्का पड़ता है।
4. लागत संरचना
अगर बात करें कि एक इलेक्ट्रिक स्कूटर को बनाने में कितना खर्च आता है तो इसमें सबसे बड़ा हिस्सा बैटरी का होता है। गाड़ी को बनाने की कुल लागत का लगभग 35% से 40% पैसा सिर्फ बैटरी पर खर्च होता है। अच्छी बात यह है कि पिछले दो वर्षों में बैटरी की कीमतों में काफी गिरावट आई थी, जिससे ये गाड़ियां सस्ती हुईं, लेकिन अब कीमतों का गिरना थोड़ा थम गया है और दाम लगभग स्थिर हो गए हैं।
5. मुख्य अंतर
अब ग्राहक केवल सरकारी सब्सिडी के भरोसे नहीं हैं। बाजार में अपनी जगह बनाने के लिए कंपनियां अब इन तीन मुख्य बातों पर जोर दे रही हैं। पहली भरोसा, यानी गाड़ी कितनी मजबूत और टिकाऊ है, दूसरी सर्विस, यानी गाड़ी खराब होने पर उसे ठीक कराने की सुविधा कितनी आसान है और तीसरी रेंज, यानी कम कीमत में गाड़ी एक बार चार्ज होने पर कितनी ज्यादा दूर तक चल सकती है।
