भारत जैसे विशाल ऑटोमोबाइल बाजार के बावजूद अमेरिकी कार और दोपहिया ब्रांड देश में अब भी सीमित मौजूदगी तक ही सिमटे हुए हैं। भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर दोबारा फोकस के बीच यह सवाल फिर उठ रहा है कि क्या आने वाले वर्षों में अमेरिकी ऑटो ब्रांड भारत में कोई ठोस वापसी कर पाएंगे, या वे किसी खास मार्केट तक ही सीमित रहेंगे।
American Automobile Brands: अमेरिकी कार और बाइक कंपनियां भारत में क्यों नहीं चला पाईं गाड़ी? जानें असल वजह
दुनिया के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल बाजारों में से एक होने और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर नए सिरे से ध्यान देने के बावजूद, अमेरिकी कार और टू-व्हीलर ब्रांड भारत में अभी भी मामूली खिलाड़ी बने हुए हैं।
प्रोडक्ट और बाजार के बीच तालमेल की कमी
जाटो डायनैमिक्स इंडिया के अध्यक्ष और डायरेक्टर रवि भाटिया का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में अमेरिकी ब्रांड्स का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है।
उनके मुताबिक, Jeep ने प्रीमियम एसयूवी सेगमेंट में एक स्थिर निच बनाई, जबकि Tesla (टेस्ला), जिसने 2025 में भारत में एंट्री की, ऊंचे आयात शुल्क के कारण सिर्फ 160 गाड़ियां ही बेच पाई।वहीं, Harley-Davidson ने लोकलाइजेशन के जरिए दोबारा रफ्तार पकड़ी, लेकिन Ford (फोर्ड) और Chevrolet (शेवर्ले) जैसे ब्रांड्स वॉल्यूम और प्रतिस्पर्धा बनाए रखने में नाकाम रहे और आखिरकार भारत से बाहर हो गए।
संरचनात्मक चुनौतियां बनीं बड़ी बाधा
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी कंपनियों की सबसे बड़ी कमजोरी भारत के वैल्यू-ड्रिवन सेगमेंट, जैसे कॉम्पैक्ट एसयूवी और फ्यूल-एफिशिएंट एंट्री मॉडल, के अनुरूप प्रोडक्ट न ला पाना रही।
ऊंची ऑपरेटिंग लागत, जटिल रेगुलेटरी ढांचा और सीमित लोकलाइजेशन ने उनकी व्यवहारिकता को और कमजोर किया।
इसके उलट, Harley-Davidson (हार्ले-डेविडसन) का उदाहरण दिखाता है कि लोकल को-डेवलपमेंट, बेहतर कीमत और सटीक सेगमेंट टारगेटिंग से भारत में पकड़ बनाई जा सकती है।
भारत में पूरी तरह आयातित (CBU) वाहनों पर भारी टैक्स एक और बड़ी बाधा है। 40,000 डॉलर तक की कारों पर 70 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी लगती है, जबकि इससे महंगी कारों पर कुल टैक्स लगभग 110 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।
ग्रांट थॉर्नटन भारत के ऑटो और ईवी लीडर साकेत मेहरा के मुताबिक, यही वजह है कि Ford (फोर्ड), Chevrolet (शेवर्ले) और कई अमेरिकी टू-व्हीलर ब्रांड्स भारत में स्केल हासिल नहीं कर पाए।
क्रिसिल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर हेमल ठक्कर का मानना है कि भारत में सफलता के लिए प्रोडक्ट कस्टमाइजेशन सबसे अहम है।
भविष्य में Jeep जैसे ब्रांड प्रीमियम एसयूवू सेगमेंट में आगे बढ़ सकते हैं, जबकि Harley-Davidson की ग्रोथ लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर टिकी रहेगी।
India-US ट्रेड डील से उम्मीद, लेकिन शर्तें भी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 फरवरी को भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा की, जिसमें भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ घटाने और भारत में अमेरिकी उत्पादों पर ड्यूटी शून्य करने की बात कही गई।
हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि सिर्फ टैरिफ कटौती काफी नहीं होगी। गहरी लोकलाइजेशन, मजबूत सर्विस नेटवर्क और लंबी प्रतिबद्धता के बिना अमेरिकी ब्रांड्स भारत में निच से आगे नहीं बढ़ पाएंगे।
