EV: इलेक्ट्रिक वाहनों के दरवाजों पर चीन का बड़ा फैसला; क्या भारत भी अपनाएगा ये कड़े सुरक्षा मानक?
Hidden Door Handles: चीन ने इलेक्ट्रिक कारों की सुरक्षा को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए छिपे हुए (पॉप-आउट) डोर हैंडल्स पर प्रतिबंध लगा दिया है। चीन के उद्योग मंत्रालय मिनिस्ट्री ऑफ इंडस्ट्री एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी (MIIT) के जरिए जारी नए नियमों के तहत अब हर कार में अंदर और बाहर दोनों तरफ हाथ से खुलने वाला मैकेनिकल हैंडल अनिवार्य होगा, ताकि बिजली फेल होने या आग लगने जैसी स्थिति में दरवाजे आसानी से खोले जा सकें। यह नियम 1 जनवरी 2027 से नई कारों पर लागू होगा, जबकि मौजूदा मॉडलों को 2029 तक का समय दिया गया है।
विस्तार
चीन ने ऑटोमोबाइल की दुनिया में एक बड़ा सुरक्षा कदम उठाते हुए इलेक्ट्रिक कारों के 'छिपे हुए' डोर हैंडल्स पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है और वह ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। टेस्ला जैसी कंपनियों के जरिए स्टाइलिश और मॉडर्न दिखाने के लिए शुरू किए गए ये हैंडल्स अब सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक माने जा रहे हैं। दरअसल, हाल के कुछ हादसों में देखा गया कि कार की बिजली गुल होने या आग लगने की स्थिति में ये हैंडल्स बाहर नहीं निकल पाए, जिससे लोग अंदर ही फंस गए और बचाव कार्य में दिक्कत हुई। इसी खतरे को देखते हुए अब चीन ने स्टाइल के बजाय यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।
नया नियम क्या है?
चीन के उद्योग मंत्रालय (MIIT) ने सुरक्षा को लेकर नए सख्त नियम जारी किए हैं। इनके मुताबिक, अब चीन में बिकने वाली हर कार के दरवाजों में अंदर और बाहर, दोनों तरफ 'मैकेनिकल रिलीज' यानी हाथ से खुलने वाले मैनुअल हैंडल होना अनिवार्य होगा। इसका मतलब है कि अगर कार की बिजली या सेंसर काम न करें, तो भी दरवाजे हाथ से आसानी से खुल सकें।
यह नियम 1 जनवरी, 2027 से नई कारों के लिए लागू हो जाएगा, जबकि जिन कारों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, उन्हें यह बदलाव करने के लिए जनवरी 2029 तक की मोहलत दी गई है। इसके साथ ही, अब डिजाइन ऐसा होना चाहिए कि कार के बाहरी हैंडल में हाथ फंसाने के लिए कम से कम 6cm x 2cm की जगह जरूर हो, ताकि इमरजेंसी में दरवाजे को मजबूती से खींचकर खोला जा सके।
प्रतिबंध की मुख्य वजह: सुरक्षा या स्टाइल?
यह फैसला चीन में हुई कई बड़ी दुर्घटनाओं को देखते हुए लिया गया है। हाल ही में शाओमी की इलेक्ट्रिक कारों के एक्सीडेंट में यह समस्या सामने आई कि बिजली गुल होते ही कार के दरवाजे लॉक हो गए और अंदर फंसे लोग बाहर नहीं निकल पाए।
हैंडल्स का यह मुद्दा इसलिए भी बड़ा है क्योंकि इस समय चीन में बिकने वाली लगभग 60% टॉप इलेक्ट्रिक कारों में यही 'छिपे हुए' हैंडल लगे हैं। अब टेस्ला के लोकप्रिय मॉडल 3 और Y, बीएमडब्ल्यू की iX3 और चीन की बड़ी कंपनियों जैसे NIO और Li Auto को अपनी कारों के डिजाइन में बड़े बदलाव करने होंगे ताकि वे सुरक्षा के नए पैमानों पर खरी उतर सकें।
भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
सबसे पहले, भारत अपने सुरक्षा मानकों (भारत NCAP) को लगातार बेहतर बना रहा है। चीन जैसे बड़े देश के इस फैसले के बाद, भारत सरकार भी भविष्य में इलेक्ट्रिक कारों की सुरक्षा तय करते समय इसे एक मिसाल की तरह इस्तेमाल कर सकती है।
दूसरा, भारत की सड़कों और यहां के मौसम (जैसे भारी गर्मी और मानसून) में इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम फेल होने का खतरा हमेशा रहता है। महिंद्रा XUV700 जैसी कई भारतीय कारों में भी आजकल ऐसे 'पॉप-आउट' हैंडल आ रहे हैं। ऐसे में हाथ से खुलने वाले मैनुअल हैंडल भारतीय ग्राहकों के लिए जान बचाने वाला फीचर साबित हो सकते हैं।
तीसरी बात व्यापार से जुड़ी है। जो भारतीय कंपनियां अपनी कारें विदेश भेजना चाहती हैं, उन्हें अब चीन के इन नए नियमों का ध्यान रखना होगा, क्योंकि चीन अब दुनिया के लिए ऑटोमोबाइल के नियम तय करने वाला देश बनता जा रहा है। साथ ही, भारतीय ग्राहकों में अब सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है, इसलिए वे स्टाइल के बजाय भरोसेमंद मैकेनिकल हैंडल को ज्यादा पसंद कर सकते हैं।
जैसा कि ऑटोमोबिलिटी के संस्थापक बिल रुसो ने कहा है, चीन अब सिर्फ दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक कार बाजार ही नहीं रहा, बल्कि वह अब नई तकनीकों के लिए ऐसे नियम बना रहा है जिसका पालन पूरी दुनिया को करना पड़ सकता है।
