Cruise Control: बाइक में क्रूज कंट्रोल जैसा लग्जरी फीचर सिर्फ मार्केटिंग का दिखावा? खरीदने से पहले जान लें बात
Premium Bike Features India: भारतीय टू-व्हीलर बाजार में अब मोटरसाइकलें सिर्फ माइलेज और पावर तक सीमित नहीं रहीं। कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए क्रूज कंट्रोल जैसे प्रीमियम फीचर्स दे रही हैं। यह फीचर लंबी दूरी की यात्राओं में कलाई के दर्द से राहत और बेहतर माइलेज देता है, लेकिन भारतीय सड़कों की अनिश्चितता और महंगे मेंटेनेंस जैसे इसके कुछ नकारात्मक पहलू भी हैं।
विस्तार
आजकल भारत में कई मिड-रेंज और प्रीमियम मोटरसाइकलों में क्रूज कंट्रोल फीचर मिलने लगा है। ये फीचर लंबी दूरी की राइड को आरामदायक बनाता है, लेकिन खराब सड़कों और शहरों में इसके नुकसान भी हैं। अगर आप भी बाइक लेने का सोच रहे हैं तो खरीदने से पहले इसके फायदे और सीमाएं जानना जरूरी है।
मोटरसाइकल में क्रूज कंट्रोल क्या होता है?
क्रूज कंट्राेल को बाइक का ऑटो-पायलट मोड कहा जा सकता है। जब राइडर किसी तय स्पीड जैसे 80 किलोमीटर प्रति घंटा, पर क्रूज कंट्रोल ऑन करता है तो बाइक उसी रफ्तार पर अपने आप चलती रहती है और एक्सीलेटर को लगातार पकड़कर रखने की जरूरत नहीं पड़ती। जैसे ही राइडर ब्रेक दबाता है या क्लच लेता है, यह सिस्टम तुरंत बंद हो जाता है और पूरा कंट्रोल फिर से राइडर के हाथ में आ जाता है। इसका मकसद बाइक को एक स्थिर और स्मूथ स्पीड पर चलाए रखना है।
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इसका फायदा कहां मिलता है?
क्रूज कंट्रोल का सबसे बड़ा फायदा लंबी दूरी और हाइवे राइडिंग में मिलता है। लगातार एक्सीलेटर पकड़कर रखने से हाथों, कलाई और उंगलियों में जो थकान और दर्द होता है, क्रूज कंट्रोल उसे काफी हद तक कम कर देता है। इससे राइड ज्यादा आरामदायक हो जाती है और लंबी यात्राओं में थकान महसूस नहीं होती। यही वजह है कि टूरिंग पसंद करने वाले राइडर्स के लिए यह फीचर काफी उपयोगी माना जाता है।
ओवरस्पीडिंग चालान से राहत
एक समान स्पीड पर बाइक चलने से माइलेज में भी सुधार देखने को मिलता है। जब स्पीड बार-बार कम-ज्यादा नहीं होती, तो इंजन पर दबाव कम पड़ता है और फ्यूल की खपत नियंत्रित रहती है। खासकर हाइवे पर सीधी सड़कों पर क्रूज कंट्रोल इस्तेमाल करने से बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी मिल सकती है। इसके अलावा, स्पीड लिमिट सेट होने के कारण बाइक तय रफ्तार से ऊपर नहीं जाती, जिससे अनजाने में होने वाली ओवरस्पीडिंग और चालान का खतरा भी कम हो जाता है।
हालांकि भारतीय सड़कों की स्थिति को देखते हुए क्रूज कंट्रोल हर जगह फायदेमंद नहीं है। शहरों, गांवों और खराब सड़कों पर गड्ढे, जानवर, ट्रैफिक और स्पीड ब्रेकर आम हैं, जहां बार-बार ब्रेक और एक्सीलेटर की जरूरत पड़ती है। ऐसी परिस्थितियों में क्रूज कंट्रोल का इस्तेमाल जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि अचानक प्रतिक्रिया देने में थोड़ी देरी हो सकती है।
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क्रूज कंट्रोल के नुकसान और चुनौतियां
क्रूज कंट्रोल वाली बाइक्स का मेंटेनेंस भी थोड़ा महंगा हो सकता है। इस फीचर के लिए राइड बाई वायर ( Ride-by-Wire) टेक्नोलॉजी और कई इलेक्ट्रॉनिक सेंसर लगाए जाते हैं। अगर इनमें कोई तकनीकी खराबी आती है, तो रिपेयर का खर्च ज्यादा हो सकता है और हर जगह इसके लिए विशेषज्ञ मैकेनिक भी नहीं मिलते।
क्रूज कंट्रोल वाली बाइक खरीदें या नहीं?
क्रूज कंट्रोल सुविधा देने वाला फीचर है, लेकिन हर राइडर के लिए जरूरी नहीं। अगर आपकी राइडिंग का 70% हिस्सा नेशनल हाईवे पर बीतता है या लंबी दूरी की यात्रा करते हैं, तो यह फीचर आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। वहीं, अगर आपकी राइडिंग शहर और ट्रैफिक तक सीमित है, तो क्रूज कंट्रोल का ज्यादा उपयोग नहीं हो पाएगा। बाइक खरीदते समय अपनी राइडिंग जरूरत और सड़कों की स्थिति को ध्यान में रखकर ही फैसला करना बेहतर होता है।
