Diesel Engines: क्यों डीजल को पेट्रोल इंजन की तुलना में माना जाता है ज्यादा प्रदूषणकारी? जानें असल वजहें
डीजल इंजन को पेट्रोल इंजन की तुलना में ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाला माना जाता है। यहां जानेंगे वो 5 बड़ी वजहें, जिससे पता चलता है कि डीजल इंजन पेट्रोल इंजन से ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं।
विस्तार
डीजल इंजन को पेट्रोल इंजन की तुलना में ज्यादा प्रदूषणकारी माना जाता है। यही वजह है कि भारत में छोटी कारों से डीजल इंजन धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हैं। सख्त होते उत्सर्जन नियमों के चलते डीजल इंजन को नियमों के अनुरूप बनाना महंगा और तकनीकी रूप से जटिल हो गया है, जिसका असर सीधे उपभोक्ताओं की पसंद पर भी पड़ा है।
आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि डीजल इंजन पेट्रोल इंजन से ज्यादा प्रदूषण क्यों फैलाते हैं, वो भी 5 अहम बिंदुओं में।
डीजल इंजन क्यों माने जाते हैं ज्यादा प्रदूषणकारी?
डीजल इंजन से निकलने वाले कुछ खास प्रदूषक, जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और पार्टिकुलेट मैटर (PM), पर्यावरण और सेहत दोनों के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। यही प्रदूषक डीजल इंजनों को पेट्रोल इंजनों की तुलना में ज्यादा नुकसानदायक बनाते हैं।
1. डीजल इंजन से NOx का ज्यादा उत्सर्जन
डीजल इंजन ज्यादा कंप्रेशन रेशियो और ऊंचे तापमान पर काम करते हैं। इस ज्यादा तापमान की वजह से हवा में मौजूद नाइट्रोजन और ऑक्सीजन आपस में मिलकर बड़ी मात्रा में नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) बनाते हैं।
NOx शहरी स्मॉग और एसिड रेन का बड़ा कारण है और यह सांस की बीमारियों, फेफड़ों की समस्या और लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।
2. पार्टिकुलेट मैटर (PM) की अधिक मात्रा
डीजल, पेट्रोल की तुलना में भारी और कम वाष्पशील (वोलाटाइल) ईंधन होता है। इसके कारण इंजन के कुछ हिस्सों में ईंधन पूरी तरह नहीं जल पाता, जिससे कालिख (Soot) यानी बेहद महीन पार्टिकुलेट मैटर बनता है।
ये सूक्ष्म कण सांस के साथ शरीर में गहराई तक चले जाते हैं और कैंसर, अस्थमा व हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों से जुड़े माने जाते हैं।
3. कंप्रेशन इग्निशन प्रक्रिया की भूमिका
पेट्रोल इंजन में स्पार्क प्लग की मदद से ईंधन-हवा का मिश्रण एकसमान तरीके से जलता है, जिससे दहन (कंब्शन) ज्यादा साफ होता है।
वहीं डीजल इंजन में ईंधन को बेहद गर्म और दबाव वाली हवा में इंजेक्ट किया जाता है। यह प्रक्रिया उतनी समान नहीं होती, जिससे अधजले ईंधन और PM जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन ज्यादा होता है।
4. सल्फर की अधिक मात्रा, प्रदूषण नियंत्रण और जटिल
डीजल में पारंपरिक रूप से पेट्रोल की तुलना में सल्फर की मात्रा ज्यादा होती है। इससे सल्फर डाइऑक्साइड (SOx) जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन बढ़ता है।
हालांकि अब अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल उपलब्ध है, लेकिन डीजल ईंधन की भारी संरचना के कारण सभी प्रदूषकों को एक साथ नियंत्रित करना पेट्रोल के मुकाबले ज्यादा कठिन हो जाता है।
5. लैब टेस्ट और असली सड़क हालात में फर्क
आधुनिक डीजल इंजन में डीजल पार्टिकुलेट फिल्टर (DPF) और NOx कंट्रोल सिस्टम जैसे एडवांस्ड तकनीक होती है, जो लैब टेस्ट में बेहतरीन नतीजे देती है।
लेकिन असल शहरों की धीमी ट्रैफिक परिस्थितियों में ये सिस्टम अक्सर सही तापमान तक नहीं पहुंच पाते। नतीजा यह होता है कि फिल्टर रीजनरेशन के दौरान अचानक प्रदूषण बढ़ जाता है, जो लैब आंकड़ों में दिखाई नहीं देता।
क्यों डीजल से दूरी बना रही हैं छोटी कारें
डीजल इंजन की ज्यादा प्रदूषणकारी प्रकृति, महंगे एमिशन सिस्टम और सख्त नियमों ने इन्हें छोटी कारों के लिए कम व्यवहारिक बना दिया है। यही वजह है कि आज बाजार पेट्रोल, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
