भारत-अमेरिका व्यापार समझौता; ऑटो कंपोनेंट सेक्टर के लिए कैसे गेम-चेंजर साबित होगी यह डील?
India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते से भारतीय ऑटो पार्ट्स उद्योग में उत्साह की लहर है। उद्योग निकाय ACMA का मानना है कि टैरिफ घटकर 18% होने से भारतीय ऑटो कंपोनेंट्स अमेरिकी बाजार में और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे निर्यात और निवेश दोनों को बढ़ावा मिलेगा। ACMA ने इस समझौते को दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों और बदलती वैश्विक सप्लाई चेन के दौर में एक बड़ा भरोसेमंद कदम बताया है।
विस्तार
भारत और अमेरिका के बीच जो नया व्यापार समझौता हुआ है, उससे भारत के ऑटो पार्ट्स (गाड़ियों के पुर्जे) बनाने वाले लोग बहुत खुश हैं। उनका मानना है कि इस डील से अमेरिका के बाजार में भारतीय सामान और भी मजबूती से बिकेगा। साथ ही, अब बिजनेस करना और निवेश करना पहले से ज्यादा आसान और भरोसेमंद हो जाएगा।
प्रमुख उद्योग निकाय ACMA की प्रतिक्रिया
भारत में ऑटो पार्ट्स बनाने वाली संस्था ACMA का कहना है कि यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते रिश्तों का नतीजा है। उन्होंने इस बड़ी कामयाबी के लिए पीएम मोदी और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की तारीफ की है। ACMA के अध्यक्ष विक्रमपति सिंघानिया ने बताया कि टैक्स (टैरिफ) को घटाकर 18% करना एक बहुत अच्छा कदम है, क्योंकि इससे अमेरिका में हमारे बने पार्ट्स और सस्ते होंगे और उनकी मांग बढ़ेगी।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बढ़ता भरोसा
सिंघानिया का कहना है कि आज के समय में जब पूरी दुनिया में सामान की सप्लाई के तरीके बदल रहे हैं, तब इस समझौते से बिजनेस करने वालों का भरोसा बढ़ेगा और वे लंबे समय के लिए निवेश कर पाएंगे। फिलहाल, भारतीय ऑटो पार्ट्स को विदेश भेजने (निर्यात करने) के लिए अमेरिका सबसे बड़ा और जरूरी देश है।
इस समझौते के संभावित लाभ
इस समझौते के लागू होने से न केवल दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा और बिजनेस के नए मौके खुलेंगे, बल्कि उन्नत विनिर्माण, इलेक्ट्रिक वाहनों और क्लीन मोबिलिटी जैसी आधुनिक टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी आपसी साझेदारी को काफी बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर, यह कदम भारत को दुनिया भर के लिए एक भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग और सोर्सिंग हब बनाने की दिशा में बेहद मददगार साबित होगा।
भारत और अमेरिका के बीच ऑटो पार्ट्स के व्यापारिक आंकड़े
अगर आंकड़ों की बात करें, तो इस साल के पहले 6 महीनों में भारत ने अमेरिका को करीब ₹26,000 करोड़ ($3,124 मिलियन) के ऑटो पार्ट्स बेचे हैं, जबकि वहां से सिर्फ ₹7,000 करोड़ ($844 मिलियन) का सामान मंगवाया है।
पूरे साल (वित्त वर्ष 2025) पर नजर डालें, तो हमारे देश के ऑटो पार्ट्स उद्योग का कुल कारोबार करीब $80.2 बिलियन रहा। इसमें से हमने दुनिया भर में $22.9 बिलियन का निर्यात किया, जिसका मतलब है कि भारत ने इस सेक्टर में $500 मिलियन का मुनाफा (ट्रेड सरप्लस) कमाया है।
