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पुरानी गाड़ी भी अब लोन पर: क्यों ग्राहक अब यूज्ड कार फाइनेंस पर कर रहे अधिक भरोसा? सामने आई चौंकाने वाली बात

Thu, 20 Aug 2026 03:20 PM IST
जागृति शुक्ला ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति शुक्ला Updated Thu, 20 Aug 2026 03:20 PM IST
सार

Used Car Loan: भारत में पुरानी कारों की बढ़ती मांग के साथ-साथ इन्हें लोन पर खरीदने का चलन भी काफी तेजी से बढ़ा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में पुरानी कारों के लिए फाइनेंसिंग का दायरा नए ऑटो लोन की तुलना में काफी तेजी से फैला है। लेकिन इस सेगमेंट में इतनी जबरदस्त ग्रोथ की मुख्य वजह क्या है? और भारतीय खरीदार पुरानी कार को फाइनेंस कराना इतना पसंद क्यों कर रहे हैं? आइए, जानते हैं इस रिपोर्ट के आंकड़े और इसके पीछे की वजहें...
 

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Used Car Loans Surge 3x 5 Years ₹1.3 Lakh Crore, Report
पांच साल में तीन गुना बढ़ा लोन का बाजार - फोटो : amarujala.com

विस्तार

Used Car Finance: कार खरीदना हर किसी का सपना होता है, लेकिन नई कार का बजट हर किसी की जेब को रास नहीं आता, खासकर मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए। यही वजह है कि देश में अब पुरानी कारों की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन यहां सबसे चौंकाने वाली बात है कि अब लोग पुरानी कारों को भी लोन पर खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी Crif High Mark की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों (जून 2021 से जून 2026) के दौरान पुरानी कारों के लिए ली जाने वाली फाइनेंसिंग का दायरा नए ऑटो लोन की तुलना में कहीं अधिक तेजी से फैला है। आज ज्यादा से ज्यादा भारतीय पुरानी कार खरीदने के लिए अनौपचारिक तरीकों के बजाय बैंकों और NBFC जैसे औपचारिक वित्तीय संस्थानों पर भरोसा जता रहे हैं।
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पांच साल में 40 हजार करोड़ से 1.3 लाख करोड़ हुआ पोर्टफोलियो
  • CRIF हाई मार्क के अनुसार, जून 2021 में पुरानी कारों के फाइनेंस का बकाया पोर्टफोलियो करीब 40 हजार करोड़ रुपये था। जो जून 2026 तक बढ़कर 1.3 लाख करोड़ रुपये हो गया।
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  • यानी पांच साल में इस सेगमेंट में फाइनेंसिंग में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली। इसकी सालाना कंपाउंडेड ग्रोथ रेट यानी CAGR 26.2 प्रतिशत रही। हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि पुरानी कारों की फाइनेंसिंग का शुरुआती आधार ऑटो लोन की तुलना में कम था।
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ऑटो लोन बढ़ा, लेकिन रफ्तार रही कम
  • हालांकि इस दौरान ऑटो लोन का बकाए पोर्टफोलियो में भी बढ़त देखी गई है। जून 2021 में यह करीब 4.4 लाख करोड़ रुपये था, जो जून 2026 में बढ़कर 9.9 लाख करोड़ रुपये हो गया।
  • इस दौरान ऑटो लोन पोर्टफोलियो की CAGR 17.6 प्रतिशत रही। यानी पुरानी कारों की फाइनेंसिंग की ग्रोथ रफ्तार ऑटो लोन की तुलना में ज्यादा रही।

फाइनेंसरों के सामने बढ़ा क्रेडिट रिस्क
  • पुरानी कारों के फाइनेंसिंग सेगमेंट में तेज ग्रोथ के साथ कुछ जोखिम भी सामने आए हैं। CRIF हाई मार्क की रिपोर्ट की मानें तो 31-90 दिनों तक बिना भुगतान वाले लोन का अनुपात पुरानी कारों के पोर्टफोलियो में बढ़कर 3.1 प्रतिशत हो गया।
  • ऑटो लोन में यह आंकड़ा 2.1 प्रतिशत रहा। यानी इस अवधि में पुरानी कारों के लोन में भुगतान संबंधी दबाव ज्यादा दिखाई दिया।

91-180 दिन वाले लोन में तस्वीर थोड़ी अलग
  • 91-180 दिनों तक बिना भुगतान वाले लोन की बात करें तो पुरानी कारों के लोन का आंकड़ा 1 प्रतिशत रहा। वहीं, ऑटो लोन में यह आंकड़ा और बेहतर रहा और सिर्फ 0.6 प्रतिशत दर्ज किया गया।
  • इससे पता चलता है कि पुरानी कारों की फाइनेंसिंग में शुरुआती स्तर पर भुगतान का दबाव ज्यादा है, हालांकि लंबी अवधि के इस बकाये में भी ऑटो लोन की स्थिति बेहतर रही।



पुरानी कारों के ग्राहकों पर ज्यादा कर्ज का बोझ?
  • इस रिपोर्ट में उधारकर्ताओं के लीवरेज यानी कर्ज के बोझ को लेकर भी कई बातें सामने आई हैं। जैसे ऑटो लोन और पुरानी कारों के लोन, दोनों में दो से ज्यादा लोन लेने वाले उधारकर्ताओं का अनुपात लगभग समान है। लेकिन पुरानी कारों के लोन वाले ग्राहकों की बात करें तो ऐसे उधारकर्ताओं की हिस्सेदारी ज्यादा है, जिनके पास पहले से पर्सनल लोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन और क्रेडिट कार्ड जैसे असुरक्षित कंजम्पशन लोन मौजूद हैं। पुरानी कारों के फाइनेंस सेगमेंट में ऐसे उधारकर्ताओं का अनुपात 9.2 प्रतिशत है, जबकि ऑटो लोन सेगमेंट में यह 6.4 प्रतिशत है।
  • CRIF High Mark के मुताबिक, कुल मिलाकर व्हील फाइनेंस सेगमेंट में एसेट क्वालिटी स्थिर होने के संकेत मिल रहे हैं। इस सेगमेंट में टू-व्हीलर और कमर्शियल व्हीकल फाइनेंस भी शामिल हैं। यानी अलग-अलग वाहन फाइनेंस सेगमेंट में ग्रोथ के साथ क्रेडिट क्वालिटी पर भी नजर रखी जा रही है।
कमर्शियल व्हीकल फाइनेंस कैसा रहा?
  • इस रिपोर्ट में व्यावसायिक वाहन के आंकड़ो का भी जिक्र किया गया है। इसके अनुसार, पिछले पांच साल में इसका बकाया पोर्टफोलियो 3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 7.4 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान इसकी CAGR 20.1 प्रतिशत रही। CRIF मार्क के मुताबिक, यह व्हील फाइनेंस सेगमेंट में दूसरी सबसे तेज बढ़ने वाली कैटेगरी रही।

लोग धड़ल्ले से क्यों लोन पर खरीद रहें पुरानी कार?
  • रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि ज्यादा भारतीय अपनी पुरानी कार की खरीदारी के लिए अब औपचारिक वित्तीय संस्थानों से फंडिंग लेना पसंद कर रहे हैं। इसी वजह से इस सेगमेंट का फाइनेंसिंग पोर्टफोलियो पिछले पांच साल में ऑटो लोन की तुलना में तेज गति से बढ़ा है।
  • हालांकि, पुरानी कारों के लोन में भुगतान से संबंधित दबवा और असुरक्षित कर्ज वाले ग्राहकों की ज्यादा हिस्सेदारी यह भी बताती है कि फाइनेंस कंपनियों के लिए इस सेगमेंट में क्रेडिट रिस्क पर नजर रखना जरूरी रहेगा।
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