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Car Shaking: क्या हाईवे पर जाते ही आपकी कार भी कांपने लगती है? मैकेनिक के पास जाने से पहले जान लें ये 5 कारण

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Mon, 25 May 2026 12:11 AM IST
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सार

Car Shaking At High Speed: क्या आपकी कार भी 60 km/h की स्पीड पार करते ही कांपने लगती है? अगर हां तो इसे नजरअंदाज करना आपकी सुरक्षा और जेब दोनों पर भारी पड़ सकता है। इस लेख के जरिए जानेंगे कार के वाइब्रेट होने के 5 मुख्य कारण और भारी-भरकम रिपेयर बिल से बचने के आसान उपाय, ताकि आपका सफर हमेशा सुरक्षित रहे।

Why Your Car Shakes Above 60 km/h: 5 Common Reasons And Easy Fixes
Car Shaking - फोटो : AI
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विस्तार

अगर आपकी कार हाई स्पीड पर कांपने लगती है तो यह सिर्फ सफर को असहज बनाने वाली बात नहीं है। बल्कि आपकी गाड़ी की ओर से दी जा रही एक गंभीर सेफ्टी वॉर्निंग है। भारत में हाईवे और एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले ड्राइवर्स अक्सर इस समस्या का सामना करते हैं। लेकिन अफसोस कि ज्यादातर लोग इसे तब तक नजरअंदाज करते हैं जब तक कि यह मामला बड़ा होकर उनकी जेब पर भारी न पड़ जाए।



दरअसल, गाड़ी के कांपने के पीछे घिसे हुए टायर्स से लेकर सस्पेंशन में खराबी तक कई कारण हो सकते हैं। इन्हें समय रहते आसानी से सुधारा जा सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर हाई स्पीड पर कार के थरथराने के वे कौन से मुख्य कारण हैं जिनसे आपको सावधान रहने की जरूरत है।

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1. असंतुलित टायर 

तेज स्पीड में कार के कांपने का सबसे बड़ा कारण टायर्स का अनबैलेंस होना है। जब टायर्स का वजन सभी तरफ बराबर नहीं होता तो स्पीड बढ़ने के साथ वाइब्रेशन भी बढ़ने लगता है।

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समाधान: किसी भी नजदीकी सर्विस सेंटर पर जाकर व्हील बैलेंसिंग कराएं। इसमें मुश्किल से 600 से 1 हजार रुपये का खर्च आता है और समस्या तुरंत ठीक हो जाती है।


2. गलत व्हील अलाइनमेंट 

अगर पहियों का अलाइनमेंट सही नहीं है तो टायर सड़क पर सही तरीके से नहीं टिकते, जिससे गाड़ी अनस्टेबल हो जाती है। बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक में शायद आपको इसका पता न चले। लेकिन हाई स्पीड पर गाड़ी एक तरफ भागने लगती है और कांपती है।

समाधान: हर 10 हजार किलोमीटर पर अपनी कार का अलाइनमेंट जरूर चेक कराएं।


3. खराब सस्पेंशन 

आपकी गाड़ी का सस्पेंशन झटकों को सोखता है और कार को स्टेबल रखता है। भारत की खराब सड़कों के कारण शॉक एब्जॉर्बर या स्ट्रट्स जल्दी घिस जाते हैं। सस्पेंशन खराब होने पर स्टीयरिंग व्हील कांपने लगता है और हाई स्पीड पर वाइब्रेशन बढ़ जाता है।

समाधान: 20 हजार किलोमीटर के बाद सस्पेंशन की जांच कराने में देरी न करें।


4. खराब ब्रेक रोटर्स 

अगर हाई स्पीड पर ब्रेक लगाते समय आपकी कार कांपती है तो इसके पीछे खराब ब्रेक रोटर्स हो सकते हैं। रोटर का सरफेस ऊबड़-खाबड़ होने पर ब्रेक पैड्स सही से ग्रिप नहीं कर पाते। इससे स्टीयरिंग या ब्रेक पैडल में वाइब्रेशन होता है।

समाधान: इसे कभी नजरअंदाज न करें क्योंकि यह गाड़ी रुकने की दूरी को बढ़ा देता है। सुरक्षा से समझौता न करें और तुरंत रोटर्स बदलवाएं।


5. डैमेज एक्सेल या सीवी जॉइंट 

अगर आपकी कार किसी खास स्पीड के बजाय एक्सीलेटर दबाते समय कांपती है तो ड्राइवशाफ्ट या इंजन माउंट्स में दिक्कत हो सकती है। अगर सीवी जॉइंट का बूट फट जाए तो पानी और गंदगी अंदर जाकर एक्सल की ग्रीस खत्म कर देते हैं। इससे मेटल आपस में रगड़ खाने लगता है और हाईवे पर एक्सल पूरी तरह टूट सकता है।


6. स्पार्क प्लग और इंजन माउंट्स 

कई बार इंजन मिसफायर, खराब स्पार्क प्लग या फ्यूल सिस्टम की दिक्कत से भी कार एक्सीलेरेशन के दौरान वाइब्रेट करती है। गंदे स्पार्क प्लग्स इंजन मिसफायर का कारण बनते हैं।

समाधान: एक स्पार्क प्लग को बदलने का खर्च सिर्फ 200 से 800 रुपये आता है, फिर भी लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। इससे माइलेज भी गिरता है और कार भी कांपती है।


गाड़ी चलाना कब तुरंत रोक दें?

अगर आपकी कार 60 किमी/घंटा की रफ्तार के ऊपर तेज वाइब्रेशन कर रही है, स्टीयरिंग में झटके महसूस हो रहे हैं या ब्रेक लगाने पर गाड़ी असामान्य रूप से कांप रही है तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। क्योंकि यह सीधे तौर पर आपकी सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकता है।

ऐसी स्थिति में समझदारी इसी में है कि आप तुरंत अपनी गाड़ी की रफ्तार कम कर दें, हाईवे से बाहर निकल जाएं और किसी नजदीकी विशेषज्ञ मैकेनिक से इसकी जांच करवाएं। याद रखें, आज महज 500 रुपये की छोटी सी चेकिंग आपको भविष्य में 50 हजार रुपये तक के भारी-भरकम रिपेयर बिल से बचा सकती है।


गाड़ी को स्मूथ रखने के 5 क्विक टिप्स 


1. व्हील बैलेंसिंग और रोटेशन: टायर्स को एक समान घिसने और स्टेबिलिटी बढ़ाने के लिए इसे नियमित रूप से कराएं।

2. सस्पेंशन की जांच: खराब शॉक एब्जॉर्बर, स्ट्रट्स या बुशिंग को तुरंत बदलें।

3. ब्रेक चेक: खराब ब्रेक रोटर्स और घिसे हुए ब्रेक पैड्स को नजरअंदाज न करें।

4. रेगुलर अलाइनमेंट: हर 10 हजार किलोमीटर पर व्हील अलाइनमेंट अपने सर्विस शेड्यूल में शामिल करें।

5. स्पार्क प्लग रिप्लेसमेंट: हर 25 हजार किलोमीटर पर स्पार्क प्लग बदलवाएं।

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