NEET 2026 : कागजी साबित हुए सरकार के बड़े-बड़े दावे; न मिली फ्री बस, न पानी... परीक्षा केंद्रों पर खुली पोल
Bihar : आज नीट की परीक्षा हो रही है। इसको लेकर सरकार और जिला प्रशासन ने अभ्यर्थियों के साथ-साथ अभिभावकों के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाएं की। लेकिन अफ़सोस ये सारी घोषणाएं महज पानी के बुलबुले बनकर रह गए। परीक्षार्थियों और अभिभावकों ने पोल खोलकर रख दी।
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देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट को लेकर बिहार सरकार और पटना जिला प्रशासन द्वारा किए गए तमाम बड़े-बड़े दावे रविवार को धरातल पर पूरी तरह कागजी साबित हुए। प्रशासन ने परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को मुफ्त बस व ट्रेन सेवा और अभिभावकों के लिए केंद्रों के बाहर विशेष इंतजाम करने का ढिंढोरा पीटा था, लेकिन परीक्षा के दिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आई। राजधानी पटना के 95 परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे हजारों परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों को भारी अव्यवस्था व भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा।
मुफ्त सफर का वादा निकला हवाई, अपनी जेब से किराया भरने को मजबूर हुए छात्र
प्रशासन ने घोषणा की थी कि नीट परीक्षार्थियों को परिवहन निगम की बसों में प्रवेश पत्र दिखाने पर मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी। लेकिन परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे छात्रों का आरोप है कि उन्हें ऐसी कोई सुविधा नहीं मिली। दूर-दराज के जिलों और राज्यों से आए छात्रों को सामान्य दिनों की तरह ही अपनी जेब ढीली कर भारी किराया चुकाना पड़ा। कई रूटों पर स्पेशल ट्रेनों के दावे भी केवल चर्चाओं तक ही सीमित रह गए।
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जो अखबारों में छपा, वो जमीन पर कहीं नहीं दिखा
'अमर उजाला' की टीम ने जब परीक्षा केंद्रों के बाहर मौजूद अभिभावकों और छात्रों से बात की, तो उनका दर्द और आक्रोश साफ छलक आया। परीक्षार्थी और अभिभावकों की एक नहीं कई कहानियां 'अमर उजाला' ने सुनी।
केस 1: बेटी को परीक्षा दिलाने आरा से आया, कोई सुविधा नहीं मिली
भोजपुर जिला से अपनी बेटी खुशी कुमारी को परीक्षा दिलाने पटना पहुंचे गोपाल जी ने प्रशासनिक दावों पर गहरा असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से अखबारों और टीवी पर देख रहे थे कि सरकार ने परीक्षार्थियों के लिए बहुत इंतजाम किए हैं। लेकिन यहां आने पर पता चला कि सब कुछ महज दिखावा था। हमें रास्ते से लेकर केंद्र तक कोई सरकारी मदद या सुविधा नहीं मिली।
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केस 2: भीषण गर्मी में न छाया की व्यवस्था, न पीने का पानी
मसौढ़ी से अपनी बेटी को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने आईं सोनम कुमारी ने बताया कि अभिभावकों के लिए परीक्षा केंद्र से 100 मीटर दूर छायादार स्थल और शुद्ध पेयजल की गारंटी दी गई थी। लेकिन इस चिलचिलाती धूप में सिर छिपाने तक की जगह नहीं है। अभ्यर्थी और उनके माता-पिता खुद के भरोसे ही यहां संघर्ष कर रहे हैं।
केस 3. खुद का और बेटी का टिकट कटाकर आया हूं
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से आए मोहम्मद जाकिर हुसैन ने कहा कि मैं अपनी बेटी को परीक्षा दिलाने के लिए लाया था, लेकिन मुझे किसी भी सरकारी सहायता का लाभ नहीं मिला। उन्होंने रेलवे टिकट दिखाते हुए कहा कि मैंने अपना और अपनी बेटी का टिकट कटाया और पटना के बापू परीक्षा केंद्र तक पहुंचा। यहां तक कि पटना जंक्शन पर भी मुझे फ्री वाली बस या इस तरह का कोई पोस्टर नजर नहीं आया।
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कागजों में सिमट कर रह गईं घोषणाएं
परीक्षा केंद्रों के बाहर मौजूद अन्य दर्जनों अभिभावकों ने भी प्रशासन के रवैये पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि सरकार और जिला प्रशासन की तरफ से जमीनी स्तर पर कोई भी ऐसी व्यवस्था नजर नहीं आई, जिसकी चर्चा पिछले कई दिनों से लगातार सरकारी विज्ञापनों और समाचारों में की जा रही थी। बहरहाल, भारी प्रशासनिक दावों के बीच आयोजित हुई इस महापरीक्षा ने एक बार फिर सरकारी तंत्र की तैयारियों और उनके क्रियान्वयन की पोल खोलकर रख दी है।
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क्या कहते हैं पटना के डीएम
इस संबंध में पटना के डीएम कुंदन कुमार ने 'अमर उजाला' को बताया कि अभी परीक्षा होने दें। आप जिस बात की चर्चा कर रहे हैं वह सारी व्यवस्थाएं की गई हैं। मैंने कई परीक्षा केन्द्रों पर यह पाया कि व्यवस्थाएं की गई हैं।