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छपरा का 1000 साल पुराना मंदिर: स्वयंभू शिवलिंग और जीवित समाधि का रहस्य; जानें बाबा धर्मनाथ धनी की कथा

Mon, 17 Aug 2026 04:03 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सारण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सारण Published by: प्रतीक पांडेय Updated Mon, 17 Aug 2026 04:03 PM IST
सार

Bihar News: छपरा के रतनपुरा इलाके में स्थित बाबा धर्मनाथ धनी मंदिर को स्थानीय लोग करीब एक हजार वर्ष से अधिक पुराना मानते हैं। लोक मान्यता के अनुसार यहां स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ था और संत बाबा धर्मनाथ ने यहीं साधना करते हुए जीवित समाधि ली थी। मंदिर परिसर में अन्य संतों की समाधियां भी हैं। जानिए क्या है इस मंदिर की खासियत...
 

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chapra baba dharmanath dhani temple 1000 year old history shivling
बाबा धर्मनाथ धनी मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार के छपरा शहर के रतनपुरा इलाके में स्थित बाबा धर्मनाथ धनी मंदिर स्थानीय लोगों के लिए केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक विश्वास का जीवंत प्रतीक है। इस प्राचीन मंदिर का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष से भी अधिक पुराना माना जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार, 1016 ईस्वी के आसपास यह पूरा इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ एक निर्जन क्षेत्र था। इसी दौरान इस शांत और एकांत वातावरण में भगवान शिव का एक स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ था। उस कालखंड में इस भूमि पर संत बाबा धर्मनाथ कठोर तपस्या किया करते थे।
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किंवदंतियों के अनुसार, उन्होंने ही सबसे पहले इस चमत्कारी शिवलिंग के दर्शन किए और इसके बाद यहां भगवान भोलेनाथ की विधिवत पूजा-अर्चना की शुरुआत की। आगे चलकर इन्हीं संत के नाम पर इस पावन स्थल का नाम बाबा धर्मनाथ धनी मंदिर पड़ा।
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परिसर में हैं कई समाधियां
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता और रहस्य संत बाबा धर्मनाथ की समाधि से जुड़ा है। लोककथाओं के अनुसार, भगवान शिव के दर्शन और लंबे समय तक साधना करने के बाद बाबा धर्मनाथ ने इसी पवित्र शिवलिंग के ठीक बगल में जीवित समाधि ले ली थी। आज भी मंदिर परिसर में बाबा धर्मनाथ की वह समाधि श्रद्धा के साथ मौजूद है।
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इतना ही नहीं, परिसर में लगभग 13 अन्य संत-महात्माओं की समाधियां भी स्थित हैं, जो इस स्थान की गहरी आध्यात्मिक परंपरा की गवाही देती हैं। मंदिर की पूजा-पद्धति की निरंतरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शैव संप्रदाय से जुड़े पुजारियों की 14वीं पीढ़ी वर्तमान समय में मंदिर की पूजा-पाठ और देखरेख की जिम्मेदारी संभाल रही है।

सावन में उमड़ता है आस्था का सैलाब
बाबा धर्मनाथ धनी मंदिर को लेकर छपरा सहित दूर-दराज के इलाकों के श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से यहां पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करता है, उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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विशेष रूप से सावन के महीने में मंदिर का वातावरण भक्तिमय हो जाता है। सावन के प्रत्येक सोमवार और महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं और भगवान शिव का भव्य श्रृंगार किया जाता है। इन अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं।

कभी मंदिर के नीचे से बहती थी सरयू की धारा
मंदिर की कहानी केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ा भौगोलिक इतिहास भी रोचक है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, कभी सरयू नदी की मुख्य धारा मंदिर के ठीक नीचे से होकर बहती थी। समय के साथ प्राकृतिक बदलावों के कारण नदी की धारा धीरे-धीरे इस स्थान से दूर चली गई। प्रकृति के इस परिवर्तन के बावजूद बाबा धर्मनाथ धनी मंदिर आज भी उसी स्थान पर मौजूद है और छपरा क्षेत्र में आस्था के प्रमुख केंद्रों में शामिल है।

 
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