Bihar: पटना में पहली बार कहां सफल हुआ जीवित दाता लिवर ट्रांसप्लांट? पत्नी ने पति को दिया लिवर का हिस्सा
Patna AIIMS: एम्स पटना में इससे पहले बिहार का पहला डीसेस्ड डोनर लिवर ट्रांसप्लांट भी सफलतापूर्वक किया जा चुका है। इस लिविंग डोनर ट्रांसप्लांट की सफलता के बाद संस्थान में संपूर्ण लिवर ट्रांसप्लांट के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। साथ ही बीपीएल श्रेणी के शुरुआती पांच पात्र मरीजों को एम्स रिलीफ फंड से आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।
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पटना एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) के डॉक्टरों ने लिवर ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में पहली बार लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट (LDLT) सफलतापूर्वक किया गया। पटना के रहने वाले 54 वर्षीय मरीज को उसकी पत्नी ने अपने लिवर का एक हिस्सा दान किया। जटिल सर्जरी के बाद मरीज और डोनर दोनों की स्थिति चिकित्सकों की निगरानी में बताई गई है। 54 वर्षीय मरीज ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस से पीड़ित था। बीमारी के कारण उसका लिवर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। डॉक्टरों के अनुसार, मरीज के लिए लिवर ट्रांसप्लांट ही प्रमुख उपचार विकल्प रह गया था। इसके बाद मरीज की पत्नी ने लिवर का एक हिस्सा दान करने की इच्छा जताई। चिकित्सकीय जांच के बाद दोनों को ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त पाया गया।
कैसे होता है लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट?
लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट में स्वस्थ व्यक्ति के लिवर का एक हिस्सा निकालकर मरीज में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस दौरान रक्त वाहिकाओं और पित्त नलिकाओं को बेहद सावधानी से जोड़ा जाता है। लिवर की खासियत है कि इसमें दोबारा बढ़ने की क्षमता होती है। ट्रांसप्लांट के बाद डोनर के शरीर में बचा हुआ लिवर और मरीज में प्रत्यारोपित किया गया हिस्सा धीरे-धीरे बढ़कर पर्याप्त आकार हासिल कर सकता है।
विशेषज्ञों की टीम ने मिलकर किया जटिल ऑपरेशन
इस ट्रांसप्लांट कार्यक्रम को एम्स पटना के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. उत्पल आनंद के नेतृत्व में विकसित किया गया है। कोर टीम में डॉ. कुणाल पराशर, डॉ. बसंत नारायण सिंह और डॉ. किसलय कांत शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम में प्रो. उमेश कुमार भदानी, डॉ. कुणाल सिंह और डॉ. रजनीश कुमार ने भूमिका निभाई। इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी से प्रो. राजीव नयन प्रियदर्शी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग से प्रो. रमेश कुमार भी टीम का हिस्सा रहे। ट्रांसप्लांट सेंटर फॉर लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (CLBS) की टीम ने प्रो. सुभाष गुप्ता के नेतृत्व में सहयोग किया। चिकित्सकों के मुताबिक, ऐसे जटिल ट्रांसप्लांट में सर्जरी से लेकर एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, रेडियोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, नर्सिंग और ब्लड बैंक तक कई टीमों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होता है।
बीपीएल मरीजों को एम्स रिलीफ फंड से मिलेगी मदद
एम्स पटना के लिवर ट्रांसप्लांट कार्यक्रम की एक अहम पहल आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को उपचार उपलब्ध कराना है। संस्थान के अनुसार, बीपीएल श्रेणी के शुरुआती पांच पात्र मरीजों को एम्स रिलीफ फंड से आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इससे महंगे लिवर ट्रांसप्लांट का खर्च उठाने में असमर्थ जरूरतमंद परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल के नेतृत्व में इस कार्यक्रम को विकसित किया गया है। उप निदेशक (प्रशासन) नीलोत्पल बाल और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. प्रशांत कुमार सिंह का भी संस्थागत सहयोग रहा।
बिहार के मरीजों को अपने राज्य में मिलेगी उन्नत सुविधा
एम्स पटना में लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट की शुरुआत बिहार और आसपास के राज्यों के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। निजी अस्पतालों में लिवर ट्रांसप्लांट की अधिक लागत के बीच सरकारी संस्थान में यह सुविधा मिलने से जरूरतमंद मरीजों को अपने राज्य में ही उन्नत उपचार का विकल्प मिलेगा। संस्थान का लक्ष्य आने वाले समय में लिवर ट्रांसप्लांट कार्यक्रम का और विस्तार कर अधिक से अधिक जरूरतमंद मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है।