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Bihar News: गया में विदेशी श्रद्धालुओं का अनोखा पिंडदान, 40 देशों के 76 लोगों ने विश्व शांति के लिए किया तर्पण

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 04 May 2026 04:27 PM IST
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सार

Bihar News: गया में 40 देशों के 76 विदेशी श्रद्धालुओं ने देवघाट पर पिंडदान कर विश्व शांति की कामना की। उन्होंने अपने पितरों के साथ-साथ वैश्विक संघर्षों में मारे गए लोगों के लिए भी तर्पण किया। इससे गया की पहचान एक अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक केंद्र के रूप में और मजबूत हुई। पढ़ें पूरी खबर...

Unique Pind Daan in Gaya as 76 Foreign Devotees from 40 Countries Perform Rituals for World Peace
विदेशी श्रद्धालुओं का अनोखा पिंडदान - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

गया की आध्यात्मिक महत्ता एक बार फिर वैश्विक स्तर पर सामने आई है। फल्गु नदी तट स्थित देवघाट पर 40 देशों से आए 76 विदेशी श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पिंडदान और तर्पण कर विश्व शांति की कामना की। इस दौरान उन्होंने केवल अपने पितरों के लिए ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए भी विशेष अनुष्ठान किया।
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पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना
सोमवार सुबह देवघाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक माहौल देखने को मिला। अमेरिका, फ्रांस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूक्रेन और रूस सहित कई देशों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने सफेद वस्त्र धारण कर पूरे अनुशासन और श्रद्धा के साथ कर्मकांड में भाग लिया। यह दृश्य स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।
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आत्मा की शांति के लिए पिंडदान 
स्थानीय पंडा छोटू बारिक ने बताया कि विदेशी श्रद्धालुओं में सनातन परंपरा और भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी आस्था देखने को मिल रही है। गया को मोक्ष की नगरी माना जाता है, जहां पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान का विशेष महत्व है। इस बार श्रद्धालुओं ने वैश्विक स्तर पर शांति का संदेश देते हुए अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में मारे गए लोगों के लिए भी तर्पण किया। श्रद्धालुओं का कहना है कि धर्म और अध्यात्म सीमाओं से परे है। गया की परंपरा पूरी दुनिया को शांति, सद्भाव और मुक्ति का संदेश देती है।

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गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में गया में विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। बौद्ध और सनातन परंपराओं के संगम के रूप में पहचान बना चुका गया अब वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। इससे स्थानीय पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों को भी नई पहचान मिल रही है।
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