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गयाजी में चौथे दिन मोक्ष की त्रिवेणी: ब्रह्मसरोवर में तर्पण, काकबलि और तारक ब्रह्म दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब
Wed, 30 Sep 2026 02:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया जी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया जी
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2026 02:30 PM IST
सार
Pitru Paksha: विश्व प्रसिद्ध गयाजी पितृपक्ष मेले के चौथे दिन ब्रह्मसरोवर में तर्पण, काकबलि और तारक ब्रह्म दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। पितरों की शांति और मोक्ष की कामना से अनुष्ठान संपन्न हुए।
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ब्रह्मसरोवर में पितरों की शांति और मोक्ष की कामना
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
विश्व प्रसिद्ध गयाजी पितृपक्ष मेले के चौथे दिन सोमवार को ब्रह्मसरोवर में पिंडदान और तर्पण के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सनातन परंपरा के अनुसार इस दिन ब्रह्मसरोवर तर्पण, काकबलि और तारक ब्रह्म दर्शन का विशेष महत्व है। देशभर से आए पिंडदानियों ने अपने पितरों की शांति और मोक्ष की कामना के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए।
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ब्रह्मसरोवर में तर्पण के लिए उमड़ी श्रद्धा
पितृपक्ष मेले के चौथे दिन सुबह से ही ब्रह्मसरोवर परिसर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब देखने को मिला। पिंडदानियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तर्पण और पिंडदान कर अपने पूर्वजों के तारण की प्रार्थना की। धार्मिक मान्यता है कि ब्रह्मसरोवर की उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा के यज्ञ से हुई थी। यहां तर्पण करने से पितरों को शांति और साधक को पुण्य की प्राप्ति होती है। योगेश अग्रवाल, आकाश अग्रवाल और संजीव कुमार सहित कई श्रद्धालुओं ने कहा कि गयाजी में पिंडदान करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है।
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काकबलि की परंपरा निभाई
तर्पण के बाद श्रद्धालुओं ने काकबलि का विधान पूरा किया। शास्त्रों में कौए को यम का दूत और पितरों का प्रतिनिधि माना गया है। मान्यता है कि जब कौआ अर्पित पिंड का अंश ग्रहण करता है तो इसे पूर्वजों द्वारा श्रद्धा स्वीकार किए जाने का प्रतीक माना जाता है। पुरोहित अरुण कुमार मिश्र ने बताया कि काकबलि की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसका पितृ तर्पण में विशेष महत्व है।
तारक ब्रह्म दर्शन को उमड़ी भीड़
धार्मिक अनुष्ठानों के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु तारक ब्रह्म के दर्शन के लिए पहुंचे। मान्यता है कि तारक ब्रह्म के दर्शन से पितरों की आत्मा को सद्गति प्राप्त होती है और पिंडदान करने वाले को पितृ ऋण से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है। नई पीढ़ी के श्रद्धालु तरुण यादव और हिमांशु कुमार ने कहा कि सनातन परंपराओं को जानने और निभाने का यह अवसर उनके लिए गर्व की बात है।
आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम
विश्व प्रसिद्ध गयाजी पितृपक्ष मेले का चौथा दिन आस्था, श्रद्धा और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम बन गया। ब्रह्मसरोवर में तर्पण, काकबलि और तारक ब्रह्म दर्शन के साथ श्रद्धालुओं ने अपने पितरों के मोक्ष और परिवार के कल्याण की कामना की। दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।