Bihar: नवादा के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. शत्रुधन प्रसाद सिंह का निधन, 51 साल तक मरीजों की सेवा; शोक की लहर
नवादा के प्रख्यात चिकित्सक व समाजसेवी डॉ. शत्रुधन प्रसाद सिंह का 79 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। कैंसर से जूझते हुए भी वे अंतिम समय तक मरीजों की सेवा करते रहे। उनके निधन से जिले में शोक की लहर है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नवादा जिले के प्रख्यात चिकित्सक और समाजसेवी डॉ. शत्रुधन प्रसाद सिंह का शुक्रवार देर रात निधन हो गया। वे 79 वर्ष के थे और लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। उनका इलाज मुंबई और पटना के चिकित्सकों की देखरेख में चल रहा था। गंभीर बीमारी के बावजूद उन्होंने अंतिम समय तक मरीजों की सेवा जारी रखी, जो उनके अदम्य साहस और समर्पण का परिचायक है। शनिवार सुबह जैसे ही उनके निधन की खबर फैली, बड़ी संख्या में चिकित्सक, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और उनके द्वारा इलाज किए गए मरीज उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने लगे और श्रद्धांजलि अर्पित की।
दिग्गज पहुंचे
श्रद्धांजलि देने वालों में पूर्व श्रम राज्यमंत्री राजबल्लभ प्रसाद यादव, भाजपा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी नवल किशोर यादव, जदयू एमएलसी सह मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार, भाजपा जिलाध्यक्ष अनिल मेहता, जदयू जिलाध्यक्ष राजकिशोर दांगी, लोजपा (रामविलास) जिलाध्यक्ष मनोज सिंह समेत कई गणमान्य लोग शामिल रहे। इसके अलावा पूर्व सिविल सर्जन डॉ. विमल प्रसाद सिंह, डॉ. महेश कुमार, डॉ. बी.के. सिंह, डॉ. के.पी. सिंह, डॉ. नरेंद्र प्रसाद सिंह, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. गिरिजेश कुमार, डॉ. रोहित शांडिल्य और सुधीर सिंह ने भी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान क्रिकेटर ईशान किशन के परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे। उनकी दादी और पूर्व सिविल सर्जन डॉ. सावित्री शर्मा, पिता प्रणव पांडे, भाई डॉ. जय किशन सहित अन्य परिजन अंतिम दर्शन में शामिल हुए। डॉ. सिंह से गहरा आत्मीय संबंध होने के कारण प्रणव पांडे भावुक होकर फूट-फूटकर रो पड़े।
पढ़ें: शराब माफियाओं पर छापेमारी करने गई बिहार पुलिस की गाड़ी रेत में फंसी, जवानों ने धक्का लगाकर निकाला बाहर
अंतिम संस्कार के लिए शवयात्रा सावित्री सेवा सदन से प्रजातंत्र चौक होते हुए थाना रोड के रास्ते अकबरपुर प्रखंड स्थित पारा मेडिकल कॉलेज, लोहानीपुर पहुंची, जहां उनके बड़े पुत्र राकेश शर्मा ने मुखाग्नि दी। डॉ. सिंह मूल रूप से मुजफ्फरपुर के सकरा गांव के निवासी थे, लेकिन 1975 में नवादा आने के बाद यहीं बस गए। उन्होंने 51 वर्षों तक जिले में चिकित्सा सेवा दी। उन्होंने लंगट सिंह कॉलेज से आईएससी, डीएमसीएच से एमबीबीएस और पीएमसीएच से हाउस सर्जन का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
पलामू से की थी करियर की शुरुआत
अपने करियर की शुरुआत उन्होंने 1972 में पलामू से की थी। बाद में नवादा में मेडिकल ऑफिसर, रेडियोलॉजिस्ट और जिला यक्ष्मा पदाधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वर्ष 1995 में उन्होंने सरकारी सेवा से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई और नीतीश कुमार के साथ समता पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे। उन्होंने नवादा विधानसभा से चुनाव भी लड़ा, लेकिन बाद में राजनीति से संन्यास ले लिया।
जरूरतमंद मरीजों का इलाज मुफ्त करते थे
डॉ. सिंह की सबसे बड़ी पहचान उनकी सेवा भावना थी। वे लगभग 25 प्रतिशत गरीब और जरूरतमंद मरीजों का इलाज मुफ्त करते थे और उन्हें दवाएं भी उपलब्ध कराते थे। वे नियमित रूप से निःशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित करते थे। वर्ष 2022 में कैंसर की पुष्टि होने के बाद भी वे प्रतिदिन करीब 25 मरीजों का इलाज करते रहे। कठिन परिस्थितियों में भी उनका यह समर्पण लोगों के लिए प्रेरणा बना रहा है। डॉ. सिंह कहते थे कि उनका नवादा से केवल डॉक्टर-मरीज का रिश्ता नहीं, बल्कि आत्मीय जुड़ाव है। जीवन के अंतिम क्षणों तक उन्हें लोगों का यही प्यार मिलता रहा। उनके निधन से नवादा जिले ने एक समर्पित चिकित्सक, संवेदनशील समाजसेवी और प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व को खो दिया है।