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Bihar: रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए जवान के लिए गयाजी में पिंडदान, विदेशी परिवार की आस्था देख भावुक हुए लोग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 15 May 2026 08:43 PM IST
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सार
रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए जवान की आत्मा की शांति के लिए रूस से आया परिवार गयाजी पहुंचा। फल्गु नदी तट पर वैदिक रीति से पिंडदान किया गया। विदेशी परिवार की आस्था और भावुक श्रद्धांजलि ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया है।
गयाजी के पवित्र फल्गु नदी के तट पर पिंडदान करते विदेशी
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
गया में शुक्रवार को एक बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला। रूस-यूक्रेन युद्ध में जान गंवाने वाले एक जवान की आत्मा की शांति के लिए रूस से आया परिवार पवित्र फल्गु नदी तट पहुंचा, जहां पूरे वैदिक विधि-विधान के साथ पिंडदान किया गया। विदेशी परिवार की आस्था और श्रद्धा ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।
शांति के लिए परिवार के सदस्य पहुंचे गयाजी
जानकारी के अनुसार, युद्ध में मारे गए जवान का नाम फेस टू बाल फेस बताया गया। उनकी आत्मा की शांति के लिए उनकी बहन ललिता राधा रानी फेस, जीजा सुंदरा फेस और परिवार के अन्य सदस्य गयाजी पहुंचे। परिवार के साथ एक छोटी बच्ची भी मौजूद थी, जिसने धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया। फल्गु नदी किनारे वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-पाठ के बीच जब परिवार ने अपने प्रियजन को श्रद्धांजलि अर्पित की, तो वहां मौजूद श्रद्धालु भी भावुक हो उठे। परिवार के सदस्य लगातार मृत आत्मा की शांति और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करते रहे।
घर में सुख-शांति बनी रहे
शहीद जवान के जीजा सुंदरा फेस ने बताया कि युद्ध में उनके साले की मौत के बाद पूरा परिवार गहरे सदमे में है। उन्होंने कहा कि गयाजी में पिंडदान की धार्मिक मान्यता पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है और उन्हें विश्वास है कि यहां अनुष्ठान कराने से मृत आत्मा को शांति मिलेगी। उन्होंने कहा कि वे अपने साले और पिता की आत्मा की शांति के लिए गयाजी आए हैं। परिवार की कामना है कि घर में सुख-शांति बनी रहे। सुंदरा फेस ने बताया कि रूस में भी लोगों को गयाजी की धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता के बारे में जानकारी है, यही वजह है कि वे हजारों किलोमीटर की यात्रा कर यहां पहुंचे हैं।
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ये भी पढ़ें- Bihar : पटना में हत्या, शव के तीन टुकड़े किए और सिर लेकर फरार; मौत का राज खुलने पर पत्नी की पिटाई, सड़क जाम
वैश्विक पहचान दर्शाता है गयाजी
पवित्र फल्गु नदी तट पर पिंडदान की प्रक्रिया स्थानीय पुरोहित कुमार गौरव की देखरेख में संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि विदेशी श्रद्धालुओं का गयाजी आना यहां की वैश्विक पहचान को दर्शाता है। पुरोहित कुमार गौरव ने कहा कि गयाजी की मान्यता केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर के लोग यहां अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पहुंचते हैं। लोगों का विश्वास है कि यहां पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त होता है।
गौरतलब है कि हर साल देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पवित्र फल्गु नदी तट पर पिंडदान और श्राद्ध कर्म के लिए पहुंचते हैं। विदेशी श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या गयाजी की आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत कर रही है। रूस से आए इस परिवार की श्रद्धा और भावनाओं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि गयाजी केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लोगों की आस्था का केंद्र बन चुका है।
शांति के लिए परिवार के सदस्य पहुंचे गयाजी
जानकारी के अनुसार, युद्ध में मारे गए जवान का नाम फेस टू बाल फेस बताया गया। उनकी आत्मा की शांति के लिए उनकी बहन ललिता राधा रानी फेस, जीजा सुंदरा फेस और परिवार के अन्य सदस्य गयाजी पहुंचे। परिवार के साथ एक छोटी बच्ची भी मौजूद थी, जिसने धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया। फल्गु नदी किनारे वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-पाठ के बीच जब परिवार ने अपने प्रियजन को श्रद्धांजलि अर्पित की, तो वहां मौजूद श्रद्धालु भी भावुक हो उठे। परिवार के सदस्य लगातार मृत आत्मा की शांति और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करते रहे।
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घर में सुख-शांति बनी रहे
शहीद जवान के जीजा सुंदरा फेस ने बताया कि युद्ध में उनके साले की मौत के बाद पूरा परिवार गहरे सदमे में है। उन्होंने कहा कि गयाजी में पिंडदान की धार्मिक मान्यता पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है और उन्हें विश्वास है कि यहां अनुष्ठान कराने से मृत आत्मा को शांति मिलेगी। उन्होंने कहा कि वे अपने साले और पिता की आत्मा की शांति के लिए गयाजी आए हैं। परिवार की कामना है कि घर में सुख-शांति बनी रहे। सुंदरा फेस ने बताया कि रूस में भी लोगों को गयाजी की धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता के बारे में जानकारी है, यही वजह है कि वे हजारों किलोमीटर की यात्रा कर यहां पहुंचे हैं।
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वैश्विक पहचान दर्शाता है गयाजी
पवित्र फल्गु नदी तट पर पिंडदान की प्रक्रिया स्थानीय पुरोहित कुमार गौरव की देखरेख में संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि विदेशी श्रद्धालुओं का गयाजी आना यहां की वैश्विक पहचान को दर्शाता है। पुरोहित कुमार गौरव ने कहा कि गयाजी की मान्यता केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर के लोग यहां अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पहुंचते हैं। लोगों का विश्वास है कि यहां पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त होता है।
गौरतलब है कि हर साल देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पवित्र फल्गु नदी तट पर पिंडदान और श्राद्ध कर्म के लिए पहुंचते हैं। विदेशी श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या गयाजी की आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत कर रही है। रूस से आए इस परिवार की श्रद्धा और भावनाओं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि गयाजी केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लोगों की आस्था का केंद्र बन चुका है।