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Bihar: अस्पताल का गजब कारनामा! टूटे पैर पर प्लास्टर की जगह बांध दिया कार्टन, वीडियो वायरल होने पर मचा हड़कंप
Fri, 07 Aug 2026 07:33 AM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Fri, 07 Aug 2026 07:33 AM IST
सार
बेगूसराय के अनुमंडलीय अस्पताल मंझौल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें सड़क हादसे में घायल युवक के टूटे पैर को कार्टन से बांधकर सदर अस्पताल रेफर किया जा रहा है। वीडियो के बाद अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि संसाधनों और फ्रैक्चर स्प्लिंट की कमी के कारण मरीज के पैर को चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत अस्थायी रूप से स्थिर कर रेफर किया गया था।
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सदर अस्पताल बेगूसराय से सामने आया चौंकाने वाला मामला
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
बेगूसराय जिले के अनुमंडलीय अस्पताल मंझौल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में सड़क दुर्घटना में घायल एक युवक के टूटे पैर को कार्टन से बांधकर बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल बेगूसराय रेफर किए जाने का दृश्य दिख रहा है। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और उपलब्ध संसाधनों को लेकर लोगों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
प्लास्टर बांधने की जगह लगाया कार्टन
जानकारी के अनुसार, नावकोठी थाना क्षेत्र के महेशवारा वार्ड-4 निवासी सदन मोहन प्रसाद सिन्हा के पुत्र कृष्ण कुमार 15 जुलाई की रात गढ़पुरा से घर लौट रहे थे। इसी दौरान मंझौल थाना क्षेत्र के हरसाइन पुल के समीप टेंपो की टक्कर से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। डायल-112 की पुलिस उन्हें इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल मंझौल लेकर पहुंची। जांच के दौरान चिकित्सकों ने पैर में गंभीर चोट और फ्रैक्चर की आशंका जताई। प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें सदर अस्पताल बेगूसराय रेफर कर दिया गया। इसी दौरान मरीज के पैर को स्थिर रखने के लिए कार्टन का उपयोग कर बांधा गया, जिसका किसी ने वीडियो बना लिया। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने अस्पताल में संसाधनों की कमी पर सवाल उठाए, जबकि चिकित्सकीय जानकार इसे मरीज के पैर को अस्थायी रूप से स्थिर रखने की प्रक्रिया बता रहे हैं।
अस्पताल में स्टाफ की कमी
अस्पताल प्रबंधक गौरी शंकर ने बताया कि अस्पताल में आर्थोपेडिक के केवल एक चिकित्सक हैं और ड्रेसर, ओटी असिस्टेंट, वार्ड ब्वॉय, फोर्थ ग्रेड कर्मियों समेत करीब 70 प्रतिशत मानव संसाधन की कमी है। उन्होंने कहा कि मरीज को चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत कार्टन से पैर स्थिर कर रेफर किया गया था।
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ये भी पढ़ें- शिक्षा विभाग की टीम पर जानलेवा हमला, बदमाशों ने कार रोककर लाठी-डंडों से पीटा; डीपीएम समेत तीन घायल
30 प्रतिशत कर्मियों के भरोसे चल रहा अस्पताल
वहीं, अस्पताल प्रभारी चिकित्सक ने बताया कि वायरल वीडियो 15 जुलाई की रात का है, जिसे अब सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों और मरीज की स्थिति को देखते हुए ऐसा किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल फिलहाल मात्र 30 प्रतिशत कर्मियों के भरोसे संचालित हो रहा है तथा फ्रैक्चर स्प्लिंट की आपूर्ति भी नहीं हो रही है। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की जांच कर अस्पताल में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है।
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प्लास्टर बांधने की जगह लगाया कार्टन
जानकारी के अनुसार, नावकोठी थाना क्षेत्र के महेशवारा वार्ड-4 निवासी सदन मोहन प्रसाद सिन्हा के पुत्र कृष्ण कुमार 15 जुलाई की रात गढ़पुरा से घर लौट रहे थे। इसी दौरान मंझौल थाना क्षेत्र के हरसाइन पुल के समीप टेंपो की टक्कर से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। डायल-112 की पुलिस उन्हें इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल मंझौल लेकर पहुंची। जांच के दौरान चिकित्सकों ने पैर में गंभीर चोट और फ्रैक्चर की आशंका जताई। प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें सदर अस्पताल बेगूसराय रेफर कर दिया गया। इसी दौरान मरीज के पैर को स्थिर रखने के लिए कार्टन का उपयोग कर बांधा गया, जिसका किसी ने वीडियो बना लिया। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने अस्पताल में संसाधनों की कमी पर सवाल उठाए, जबकि चिकित्सकीय जानकार इसे मरीज के पैर को अस्थायी रूप से स्थिर रखने की प्रक्रिया बता रहे हैं।
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अस्पताल में स्टाफ की कमी
अस्पताल प्रबंधक गौरी शंकर ने बताया कि अस्पताल में आर्थोपेडिक के केवल एक चिकित्सक हैं और ड्रेसर, ओटी असिस्टेंट, वार्ड ब्वॉय, फोर्थ ग्रेड कर्मियों समेत करीब 70 प्रतिशत मानव संसाधन की कमी है। उन्होंने कहा कि मरीज को चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत कार्टन से पैर स्थिर कर रेफर किया गया था।
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30 प्रतिशत कर्मियों के भरोसे चल रहा अस्पताल
वहीं, अस्पताल प्रभारी चिकित्सक ने बताया कि वायरल वीडियो 15 जुलाई की रात का है, जिसे अब सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों और मरीज की स्थिति को देखते हुए ऐसा किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल फिलहाल मात्र 30 प्रतिशत कर्मियों के भरोसे संचालित हो रहा है तथा फ्रैक्चर स्प्लिंट की आपूर्ति भी नहीं हो रही है। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की जांच कर अस्पताल में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है।