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बिहार: झाड़-फूंक में गंवाई जिंदगी! सांप के डसने से गर्भवती चंपा की मौत, मां की ममता से महरूम हुए चार मासूम

Fri, 23 Oct 2026 04:22 PM IST
मुंगेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय Published by: मुंगेर ब्यूरो Updated Fri, 23 Oct 2026 04:22 PM IST
सार

बेगूसराय के नवकोठी प्रखंड में सांप के डसने से गर्भवती चंपा देवी की मौत हो गई। आरोप है कि समय पर अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक का सहारा लिया गया। मां की मौत से चार मासूम बच्चों के सिर से ममता का साया उठ गया।

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Life lost to faith healing! Pregnant Champa dies from a snakebite, leaving four innocent children
बेगूसराय शोकाकुल परिजन

विस्तार

चार मासूम बच्चों की आंखों में अब मां के लौटने का इंतजार शायद जिंदगी भर रहेगा। जिस मां की गोद में उन्हें सुकून मिलता था और जिस आंचल में उनका बचपन सुरक्षित था, उसी मां की दर्दनाक मौत ने चारों बच्चों की दुनिया उजाड़ दी। बेगूसराय जिले के नावकोठी प्रखंड की पहसारा पूर्वी पंचायत स्थित मजनूपुर महादलित टोले में गुरुवार को सांप के काटने से गर्भवती चंपा देवी की मौत हो गई।

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बताया जाता है कि सांप के डसने के बाद परिजन उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने में जुटे रहे। समय पर इलाज नहीं मिलने के बीच देर रात महिला ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा है।

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सांप के डसने के बाद अस्पताल की जगह झाड़-फूंक का सहारा
मृतका की पहचान मजनूपुर वार्ड संख्या-3 निवासी कृष्णा सदा की पत्नी चंपा देवी के रूप में हुई है। बताया जाता है कि गुरुवार को घरेलू कामकाज के दौरान किसी विषैले सांप ने उन्हें डस लिया। सांप के काटने के बाद महिला को तत्काल अस्पताल ले जाकर उपचार कराने की जरूरत थी, लेकिन परिजन उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने में लग गए। इस दौरान उनकी हालत बिगड़ती चली गई और गुरुवार देर रात उनकी मौत हो गई।

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इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर सांप के काटने जैसी आपात स्थिति में अंधविश्वास के बजाय समय पर चिकित्सा सुविधा लेने की जरूरत को सामने ला दिया है। हालांकि, महिला को अस्पताल ले जाने की कोशिश कब हुई और इलाज में देरी की परिस्थितियां क्या थीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

चार मासूमों से छिन गया मां का आंचल
चंपा देवी अपने पीछे चार छोटे-छोटे बच्चों को छोड़ गई हैं। सबसे बड़ा बेटा सत्यम कुमार महज 10 वर्ष का है। वहीं, सुकांत कुमारी 8 वर्ष, विद्या कुमारी 6 वर्ष और अंशिका कुमारी केवल 4 वर्ष की है। इन मासूमों को अभी मां की ममता, देखभाल और सहारे की सबसे अधिक जरूरत थी, लेकिन नियति ने उनसे यह सहारा छीन लिया।

जिस उम्र में बच्चों को मां की गोद में बैठकर कहानियां सुननी चाहिए, स्कूल से लौटकर मां के हाथों से खाना खाना चाहिए और छोटी-छोटी बातों पर मां से लिपट जाना चाहिए, उस उम्र में चारों बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया। घर में अब मां की आवाज नहीं गूंजेगी। चारों बच्चों के भविष्य और परवरिश को लेकर परिवार के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।



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मजदूरी करने बाहर गए थे पति, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
घटना के समय चंपा देवी के पति कृष्णा सदा मजदूरी करने के लिए बाहर गए हुए थे। परिवार की रोजी-रोटी के लिए मेहनत-मजदूरी करने वाले कृष्णा सदा के घर लौटने से पहले ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पत्नी की मौत और चार छोटे बच्चों की जिम्मेदारी ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है।

मजनूपुर महादलित टोले में इस घटना को लेकर शोक का माहौल है। चंपा देवी की मौत ने न केवल उनके परिवार, बल्कि आसपास के लोगों को भी झकझोर कर रख दिया है।

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