परिवार के सात बच्चे चले गए, अब क्या मांगें?: नाव हादसे में अपनों को खोने वाले पिता का छलका दर्द, बिलखते रहे
वैशाली के राघोपुर में नाव हादसे में एक परिवार के सात बच्चों की मौत हो गई। सुरेश राय का आरोप है कि जर्जर नाव की शिकायत तीन साल से की जा रही थी, लेकिन प्रशासन ने मरम्मत नहीं कराई। हादसे के बाद अधिकारियों पर कार्रवाई हुई।
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बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में हुए दर्दनाक नाव हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस हादसे में अपने परिवार के सात बच्चों को खोने वाले सुरेश राय का दर्द छलक पड़ा। रोते हुए उन्होंने कहा, “मेरी आंखों के सामने 15 से ज्यादा बच्चे डूब रहे थे। हम लोग लकड़ी के सहारे शवों को बाहर निकाल रहे थे। हमने तीन साल पहले प्रशासन से नाव की खराब हालत की शिकायत की थी। हर बार आश्वासन मिलता था कि मरम्मत करा दी जाएगी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। आज हमारे परिवार के सात बच्चों की मौत हो गई। अब हम क्या मांग सकते हैं?” यह कहते हुए सुरेश राय भावुक हो गए। उनकी आंखों में आंसू थे और जुबान पर व्यवस्था के प्रति नाराजगी। उनका आरोप है कि समय रहते प्रशासन ने नाव की मरम्मत कराई होती, तो शायद इस दर्दनाक हादसे को टाला जा सकता था।
मंगलवार रात 8:30 बजे गंगा से जुड़े ढाब में पलटी नाव, करीब 30 लोग थे सवार
दरअसल, वैशाली जिले के राघोपुर थाना क्षेत्र की रामपुर श्यामचंद पंचायत में मंगलवार रात करीब 8:30 बजे गंगा नदी से जुड़े ढाब में एक निजी नाव पलट गई। नाव पर करीब 30 लोग सवार थे और सभी भोज खाने जा रहे थे। नाव के ओवरलोड होने और जर्जर हालत में होने के कारण बीच ढाब में वह अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में 20 से ज्यादा लोग डूब गए।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में बचाव अभियान शुरू किया। अब तक 13 बच्चों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें नौ बच्चियां और चार बच्चे शामिल हैं। हादसे के करीब 10 घंटे बाद भी लापता लोगों की तलाश में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी था। छह घायलों को इलाज के लिए पटना के एनएमसीएच रेफर किया गया है।
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तीन साल से जर्जर नाव की शिकायत, हर बार मिला सिर्फ आश्वासन
परिजनों का आरोप है कि हादसे में शामिल नाव तीन साल पहले बाढ़ के दौरान अंचल प्रशासन की ओर से स्थानीय मुखिया के सौजन्य से ग्रामीणों को उपलब्ध कराई गई थी। तीन साल में नाव की हालत पूरी तरह खराब हो गई थी। ग्रामीणों ने कई बार अंचल अधिकारी से इसकी शिकायत की, लेकिन हर बार मरम्मत कराने का आश्वासन देकर मामला टाल दिया गया। परिजनों का कहना है कि यदि शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की गई होती और नाव की मरम्मत कराई गई होती, तो शायद इतने परिवारों को अपने बच्चों को नहीं खोना पड़ता। हादसे के बाद अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अंचलाधिकारी और थानाध्यक्ष के वेतन पर रोक
हादसे के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए राघोपुर के अंचलाधिकारी और थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा है। अगले आदेश तक दोनों के वेतन पर रोक लगा दी गई है।प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान, कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत तीन-तीन हजार रुपये और मुख्यमंत्री पारिवारिक लाभ योजना के तहत 20-20 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री राहत कोष से भी मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये देने की घोषणा की गई है।
हालांकि, आर्थिक सहायता के एलान के बीच सुरेश राय जैसे परिजनों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन बच्चों को उन्होंने अपनी आंखों के सामने डूबते देखा, क्या उन्हें बचाया जा सकता था? तीन साल से की जा रही शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई हुई होती, तो शायद आज कई परिवारों के घरों में मातम नहीं पसरा होता।