Bihar: क्या राबड़ी ने छोटू छलिया को लालू के जन्मदिन पर दिया हीरे का कंगन? जदयू ने उठाए सवाल, ED से शिकायत
Bihar : पूर्व सीएम राबड़ी देवी के कंगन पर उठाया गया सवाल अब राजनीतिक महकमा में कई सवालों को जन्म दे रहा है। राजनीतिक जानकार कहते हैं कि राबड़ी देवी से की गई शुरुआत अब हर तबके के महिला के मंगलसूत्र तक जाएगा। यह राजनीति नहीं, बल्कि कुछ और है।
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विस्तार
राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के जन्मदिन पर दिया गया उपहार अब कानूनी और सियासी विवादों में घिर गया है। जनता दल यूनाइटेड के मुख्य प्रवक्ता ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा एक भोजपुरी गायक को हीरे का कंगन भेंट किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। नीरज कुमार ने इस कंगन के वित्तीय स्रोत पर सवाल उठाते हुए इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जदयू प्रवक्ता ने इस मामले की गहन जांच के लिए बिहार झारखण्ड के प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त, प्रवर्तन निदेशालय के पटना क्षेत्रीय निदेशक और बिहार के लोकायुक्त को एक आधिकारिक पत्र सौंपा है।
राबड़ी देवी ने किसे दिया हीरे का कंगन?
नीरज कुमार ने अपने पत्र में मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए लिखा है कि लालू प्रसाद यादव के जन्मदिवस समारोह के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भोजपुर के निवासी और भोजपुरी गायक राम शरण यादव उर्फ छोटू छलिया को एक बहुमूल्य कंगन उपहार स्वरूप भेंट किया था। स्वयं गायक छोटू छलिया ने भी सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि उन्हें राबड़ी देवी द्वारा हीरे का कंगन दिया गया है।
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छोटू छलिया ने किया स्वीकार
इस मामले में स्वयं राम शरण यादव उर्फ छोटू छलिया ने मीडिया में और सोशल मीडिया पर इस बात को स्वीकार किया है कि संबंधित हीरे का कंगन उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने दिया गया था, जो एक अत्यंत मूल्यवान आभूषण है। यह तथ्य स्वयं छोटू छलिया के कथन से सार्वजनिक रूप से सामने आया है।
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जदयू ने उठाए गंभीर सवाल
नीरज कुमार ने जमीन के बदले नौकरी मामले का जिक्र करते हुए कहा कि लालू परिवार पहले से ही सीबीआई की चार्जशीट और अदालत के आरोपों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में इस कीमती कंगन को लेकर वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने जांच एजेंसियों से 6 बिंदुओं उन्होंने कंगन का मूल्यांकन, बिल और स्रोत की जांच, टैक्स चोरी की जांच, बेनामी संपत्ति कानून, मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रामक दावों की जांच पर कार्रवाई की मांग की है। जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने मांग करते हुए कहा है कि कंगन की वास्तविक प्रकृति, शुद्धता और बाजार मूल्य का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया जाए। दूसरी मांग में कहा कि कंगन की खरीद के बिल, भुगतान के माध्यम और उपहार हस्तांतरण की परिस्थितियों का सत्यापन हो। तीसरी मांग में कहा कि आयकर अधिनियम, 1961 के तहत इस अघोषित उपहार और कर देनदारी की जांच की जाए। चौथी मांग में कहा कि बेनामी लेन-देन अधिनियम, 1988 के संभावित पहलुओं को खंगाला जाए। पांचवी मांग में कहा कि यदि यह अवैध आय का मामला साबित होता है, तो धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत मामला दर्ज हो। और अंत में कहा कि यदि यह कंगन हीरा नहीं है और जनता के बीच भ्रामक जानकारी फैलाई गई है, तो उसकी भी निष्पक्ष जांच की जाए। इस संबंध में जदयू नेता नीरज कुमार ने कहा कि उन्होंने पत्र के साथ-साथ संबंधित समाचारों की प्रतियां, सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो क्लिप भी सबूत के तौर पर एजेंसियों को सौंपे हैं। उन्होंने जनहित व पारदर्शिता के हित में जल्द से जल्द कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
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यह राजनीति का पतन तो नहीं ?
इस संबंध में वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी कहते हैं कि यह बेवजह का मुद्दा खड़ा करने जैसा है। इस मुद्दे का कोई औचित्य नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री के पास यह गहना कहाँ से आया या उन्होंने इसे खरीदा, यह सवाल करना उचित नहीं है। दूसरी बात यह कि यह मामला गिफ्ट देने और लेने वाले के बीच का है, इसलिए इसमें व्यक्तिगत रूप से प्रवेश करना तो गलत है ही लेकिन साथ ही साथ इस मुद्दे पर राजनीति करना भी गलत है।
इस संबंध में वरिष्ठ पत्रकार अभिरंजन कुमार का कहना है कि सवाल सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का या फिर नीरज कुमार का नहीं बल्कि आम महिला और उन विधायकों और मंत्रियों का भी है। राबड़ी देवी कोई साधारण महिला नहीं बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री और लालू यादव की पत्नी हैं। आज की तारीख में उनके पुत्र तेजस्वी यादव नेता प्रतिपक्ष हैं, बेटी मीसा भारती सांसद हैं और पुत्र तेज प्रताप यादव राजनीति में सक्रिय हैं। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के पास अगर हीरे का कंगन है तो कोई बड़ी बात नहीं। अब सवाल उन मुखिया, विधायकों और मंत्रियों का भी है, जो एक बार बनने के बाद उनके पास अकूत संपत्ति आ जाती है चाहे वह किसी भी पार्टी के क्यों न हों। फिर ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से यह व्यक्तिगत सवाल पूछना कितना सही है?
वहीं इस संबंध में राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इसकी शुरुआत सत्ता पक्ष ने भले ही राबड़ी देवी से की है लेकिन आने वाले समय में अब मुमकिन है कि राजनीति में महिला के मंगलसूत्र पर भी सवाल किए जा सकते हैं। यह गलत है। ऐसे में यह पूछना शायद गलत नहीं है कि यह राजनीतिक पतन नहीं तो और क्या है?