NEET 2026: नीट सॉल्वर गैंग के 30 लोगों को बिहार पुलिस ने पकड़ा; यूपी, एमपी, झारखंड, बंगाल से क्या है कनेक्शन?
NEET Re-Exam: नीट पुनर्परीक्षा में सॉल्वर गैंग भी एक्टिव था। फर्जी परीक्षार्थी बनकर गैंग के सदस्य दूसरे की जगह परीक्षा देने बैठ गए थे। इन सब में बायोमेट्रिक कर्मी की भी मिली भगत थी। बिहार पुलिस ने इस मामले में 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। आइये जानते हैं पूरा मामला...
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पेपरलीक के आरोपों को 21 जून को बिहार के 35 शहर समेत पूरे देश में नीट पुनर्परीक्षा हुई। गड़बड़ी रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन त्रि-स्तरीय सुरक्षा की व्यवस्था की थी। इसके बावजूद सॉल्वर गैंग ने गड़बड़ी करने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस ने इनके गिरोह के सदस्यों को पकड़ लिया। अब पुलिस की जांच में सामने आया है कि सॉल्वर गैंग के सदस्यों का कनेक्शन गया, पटना, लखीसराय के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल से है। इन राज्यों के कॉलेज में सॉल्वर गैंग के सदस्य पढ़ते हैं। यह लोग बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मियों की मदद से असली परीक्षार्थी की जगह बैठकर परीक्षा देने की कोशिश में थे। इसके लिए 50 लाख की रकम तय की गई थी लेकिन बाद में सॉल्वर गैंग ने डिस्काउंट ऑफर निकाला। इसके बाद 38 से 40 लाख में डील तय हुई।
पुलिस मुख्यालय ने क्या खुलासा किया?
उक्त सारी बातें बिहार पुलिस की जांच में सामने आयी है। पकड़ाए गए सॉल्वर गैंग के सदस्यों ने पुलिस के सामने यह सब बात कबूल की तो सब हैरान रह गए। सोमवार शाम को बिहार पुलिस मुख्यालय की ओर से बताया गया कि लखीसराय में 21 जून 2026 को चार परीक्षा केंद्रों पर नीट पुनर्परीक्षा शांतिपूर्ण और कदाचारमुक्त माहौल में आयोजित की गई। परीक्षा के सफल संचालन के लिए सभी केंद्रों पर केंद्राधीक्षक, दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी और पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। इसी दौरान जिला प्रशासन को सूचना मिली कि कुछ केंद्रों पर वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह फर्जी, स्कॉलर या डमी परीक्षार्थियों को बैठाने की कोशिश की जा रही है। सूचना मिलने के बाद केंद्राधीक्षकों, स्टैटिक टीम और फ्लाइंग स्क्वॉड के माध्यम से सत्यापन कराया गया और अनुमंडल पदाधिकारी और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच अभियान चलाया गया।
बायोमेट्रिक कर्मियों के सहयोग से केंद्र में घुसे सॉल्वर गैंग वाले
जांच के दौरान लखीसराय के केआर कॉलेज, केंद्रीय विद्यालय और उच्च विद्यालय, हसनपुर परीक्षा केंद्रों से कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि बायोमेट्रिक कर्मियों की कथित संलिप्तता और सहयोग से वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर डमी परीक्षार्थियों (सॉल्वर गैंग के सदस्य) को परीक्षा दिलाने के लिए केंद्र में प्रवेश कराया गया था। आरोप है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में दस्तावेजों की कूटरचना कर नकली आधार कार्ड को पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल किया गया, जिसके आधार पर डमी अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल कराने का प्रयास किया गया।
नौ फर्जी परीक्षार्थियों में कौन-कौन शामिल?
जांच में नौ फर्जी परीक्षार्थियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस छात्र, बीएचयू की नर्सिंग छात्रा, आयुर्वेद कॉलेज की छात्रा और मेडिकल इंटर्न शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों में न्यू जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज, एएनएमसीएच गया, एम्स रायबरेली, यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस दिल्ली, सरकारी मेडिकल कॉलेज, सतना, मध्य प्रदेश, बीएचसू, नर्सिंग समेत अन्य कॉलेज से जुड़े छात्र शामिल हैं। इनकी पहचान मंतोष, विवेक, हिमांशु, सौरभ, पुनम, अमन, रौशन, चंचल और जितेंद्र के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार, यह लोग वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे।
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एक मूल और दो सहयोगी को भी किया गया गिरफ्तार?
मामले में एक मूल अभ्यर्थी और दो सहयोगियों की भी पहचान की गई है। सहयोगियों में गया स्थित एएनएमसीएच और पावापुरी स्थित बीएमआईएमएस के एमबीबीएस छात्र शामिल हैं, जिन पर पूरे नेटवर्क के संचालन और डमी अभ्यर्थियों की व्यवस्था कराने का आरोप है। इनकी पहचान संजीत, रंजीत और अर्पित के रूप में हुई। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह संगठित तरीके से संचालित परीक्षा माफिया का नेटवर्क है, जिसमें वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर दूसरे लोगों को परीक्षा दिलाने की साजिश रची गई थी। फर्जी पहचान पत्र और दस्तावेजों के सहारे इन लोगों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
18 बायोमेट्रिक कर्मियों को भी आरोपी बनाया गया
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े कर्मियों की कथित संलिप्तता को लेकर हुआ है। पुलिस ने इस मामले में तीन सुपरवाइजर समेत कुल 18 बायोमेट्रिक कर्मियों को आरोपी बनाया है। इनमें लखीसराय और आसपास के जिलों के कई कर्मचारी शामिल हैं। इनकी पहचान बादल, कृष्णा, अंकित, मुकुंद, उदय, अखिलेश, मयंक, विशाल, राकेश, अंकित, मोहित, सुदर्शन, अमलेश, अदिति, घनश्याम, शंकर, आर्यन, चंदन के रूप में हुई। इन पर आरोप है कि बायोमेट्रिक जांच प्रक्रिया में हेरफेर कर डमी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिलाया गया। पुलिस पूरे गिरोह के नेटवर्क, आर्थिक लेन-देन और अन्य संभावित संलिप्त लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।