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बिहार पर्यटन: 165 करोड़ का बौद्ध केंद्र और पांच सितारा होटलों की योजना, मंत्री केदार गुप्ता ने बताया लक्ष्य

Mon, 28 Sep 2026 10:33 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Mon, 28 Sep 2026 10:33 AM IST
सार

पर्यटन विभाग के मंत्री केदार गुप्ता ने कहा कि डिजिटल नवाचार और सतत विकास के माध्यम से बिहार अपनी समृद्ध विरासत का संरक्षण करते हुए पर्यटकों के लिए नए अनुभव तैयार कर रहा है। बिहार को सुरक्षित, समावेशी, पर्यावरण-अनुकूल और विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य बनाने की दिशा में प्रयास जारी हैं।

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From Bodh Gaya to Valmikinagar: Bihar Plans Major Tourism Projects to Boost Global Footfall
मंत्री केदार गुप्ता के किया कार्यक्रम का शुभारंभ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विश्व पर्यटन दिवस 2026 के अवसर पर बिहार के पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम की ओर से पटना के सिख हेरिटेज गुरुनानक भवन में सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने बिहार को देश और दुनिया के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने के संकल्प को दोहराया। पर्यटन मंत्री ने कहा कि इस वर्ष विश्व पर्यटन दिवस की अंतरराष्ट्रीय थीम “डिजिटल एजेंडा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता: पर्यटन को नया रूप देने के लिए” है। यह बिहार पर्यटन नीति, 2023 के उद्देश्यों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यटन क्षेत्र तेजी से उभर रहा है। वर्ष 2025 में बिहार में 6.62 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। पर्यटकों की बढ़ती संख्या राज्य की ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के प्रति बढ़ते आकर्षण को दर्शाती है।

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कई बड़ी पर्यटन परियोजनाओं पर चल रहा काम
पर्यटन मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में पर्यटन विकास से जुड़ी कई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है। इनमें सीतामढ़ी के पुनौराधाम में माता सीता की जन्मस्थली पर भव्य मंदिर का निर्माण, सोनपुर में बाबा हरिहरनाथ मंदिर कॉरिडोर का विकास और बोधगया में 165 करोड़ रुपये की लागत से बौद्ध ध्यान एवं अनुभव केंद्र का निर्माण शामिल है। इसके अलावा सहरसा की मत्स्यगंधा झील में ग्लास ब्रिज समेत अन्य पर्यटन सुविधाओं का विकास, पटना, वैशाली और राजगीर में फाइव-स्टार होटल और इको-टूरिज्म सुविधाओं का विकास, पटना हाट सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना तथा वाल्मीकिनगर में लव-कुश पार्क के विकास की योजनाओं पर भी काम चल रहा है।
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पर्यटन सर्किट से जोड़ी जा रही धार्मिक और विरासत संपदा
‘स्वदेश दर्शन 2.0’ के तहत सोनपुर के उन्नयन, अंबिका भवानी मंदिर में पर्यटक सुविधाओं के विकास और गया में बौद्ध ध्यान केंद्र की स्थापना पर काम किया जा रहा है। वहीं धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को अलग-अलग पर्यटन सर्किट से जोड़कर सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। रामायण सर्किट में पुनौराधाम, कुशेश्वरस्थान और सिंहेश्वर को शामिल किया गया है। बौद्ध सर्किट में बोधगया, राजगीर, नालंदा और वैशाली तथा सूफी सर्किट में फुलवारी और मनेर को शामिल कर पर्यटन सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
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पांच सितारा होटलों को भी बढ़ावा
लक्जरी आतिथ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से राजगीर में दो, वैशाली में एक और पटना में दो पांच सितारा होटलों की योजनाओं पर काम किया जा रहा है। सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए मत्स्यगंधा झील और वाल्मीकि पार्क को पूरा करने तथा गया में 1,000 बेड की क्षमता वाले धर्मशाला परिसर के निर्माण का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही बिहार को घरेलू पर्यटक आगमन के मामले में देश के शीर्ष 10 राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

डिजिटल तकनीक से पर्यटन सेवाओं को आसान बनाने की तैयारी
बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक नंद किशोर ने डिजिटल तकनीक और सतत पर्यटन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार पर्यटन नीति, 2023 के तहत निवेश आकर्षित करने के साथ आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। पर्यटकों की सुविधा के लिए एकीकृत वेबसाइट और मोबाइल ऐप, ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली, जीपीएस आधारित सेवाएं और रियल-टाइम पर्यटन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

निवेशकों के लिए आकर्षक पैकेज
पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने विभिन्न प्रोत्साहन पैकेज तैयार किए हैं। 10 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं के लिए 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी और 50 करोड़ रुपये या उससे अधिक की परियोजनाओं के लिए 25 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अति पिछड़ा वर्ग, पिछड़ा वर्ग, दिव्यांग और महिला उद्यमियों के लिए विशेष पैकेज भी दिए जा रहे हैं। भूमि रूपांतरण शुल्क और स्टांप ड्यूटी की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति का प्रावधान भी किया गया है।


एक लाख लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य
पर्यटन क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने के उद्देश्य से नीति अवधि के दौरान एक लाख लोगों को कौशल विकास और प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही एक लाख से अधिक रोजगार सृजित करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। बोधगया और वैशाली स्थित होटल प्रबंधन संस्थानों में उन्नत प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है। कार्यक्रम में महाप्रबंधक चंदन चौहान और शंभू नाथ ने सतत और जिम्मेदार पर्यटन पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि पर्यावरण अनुकूल पहलों, ई-वाहनों और रोपवे जैसे गैर-मोटराइज्ड परिवहन साधनों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।

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