Bihar: मरीज की मौत पर हंगामा, 48 हजार के इंजेक्शन के बाद बिगड़ी हालत; परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
पूर्णिया के लाइन बाजार स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान 55 वर्षीय सागर महतो की मौत के बाद भारी हंगामा हो गया। परिजनों ने डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है।परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल ने छह घंटे के भीतर इलाज और जांच के नाम पर करीब डेढ़ लाख रुपये जमा करवा लिए।
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पूर्णिया के चिकित्सा केंद्र माने जाने वाले लाइन बाजार स्थित एक निजी अस्पताल में गुरुवार को उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब इलाज के दौरान एक मरीज की मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों पर इलाज में गंभीर लापरवाही और गलत उपचार करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए।
मृतक की पहचान श्रीनगर प्रखंड निवासी 55 वर्षीय सागर महतो के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह सांस फूलने की बीमारी से पीड़ित थे और इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराए गए थे।
48 हजार रुपये के इंजेक्शन के बाद मौत का आरोप
मृतक के पुत्र आनंद कुमार और अन्य परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने मरीज की हालत गंभीर बताते हुए एक महंगा लाइफ-सेविंग इंजेक्शन लाने को कहा था, जिसकी कीमत करीब 48 हजार रुपये थी। परिजनों ने किसी तरह रकम की व्यवस्था कर इंजेक्शन अस्पताल को उपलब्ध कराया।
परिजनों का दावा है कि इंजेक्शन लगाए जाने के बाद मरीज की तबीयत में सुधार होने के बजाय और गिरावट आ गई। उनका आरोप है कि इंजेक्शन देने के कुछ ही मिनट बाद सागर महतो की मौत हो गई। परिवार का कहना है कि अस्पताल ने इलाज के नाम पर भर्ती के मात्र छह घंटे के भीतर दवा, जांच और बेड चार्ज के मद में करीब डेढ़ लाख रुपये जमा करा लिए, लेकिन मरीज को बचाया नहीं जा सका।
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मौत की जानकारी देर से देने का आरोप
परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर यह भी आरोप लगाया कि मरीज की मौत होने के काफी देर बाद तक उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई। जब उन्हें मौत की सूचना मिली तो परिवार के लोग और ग्रामीण आक्रोशित हो गए। घटना की खबर फैलते ही श्रीनगर और लाइन बाजार क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच गए। बढ़ते हंगामे को देखते हुए अस्पताल के कई कर्मचारी मौके से हट गए।
पुलिस और जनप्रतिनिधियों ने संभाला मोर्चा
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस तत्काल अस्पताल पहुंची और हालात को नियंत्रित करने में जुट गई। इस बीच कसबा विधायक प्रतिनिधि प्रशांत झा समेत कई स्थानीय जनप्रतिनिधि भी अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। पुलिस और जनप्रतिनिधियों ने परिजनों को समझाकर शांत कराया।
जांच के लिए बनेगा मेडिकल बोर्ड
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि मृतक के परिजनों से लिखित शिकायत प्राप्त कर ली गई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा। इलाज से संबंधित दस्तावेजों, दवाओं और 48 हजार रुपये के इंजेक्शन की भी जांच होगी। प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में डॉक्टर या अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आती है तो अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने से लेकर संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने तक की सख्त कार्रवाई की जाएगी।