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Bihar: मेहनत, अनुशासन और सपनों की उड़ान! अमन कुमार बने नौसेना में बना लेफ्टिनेंट, पूरा किया दादा-दादी का सपना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सारण
Published by: सारण ब्यूरो
Updated Fri, 06 Feb 2026 12:24 PM IST
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सार
सारण जिले के भगवानपुर गांव के अमन कुमार ने भारतीय नौसेना में लेफ्टिनेंट बनकर अपने दिवंगत दादा-दादी और माता-पिता के सपने को पूरा किया। उनकी सफलता पूरे गांव और जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी।
अमन कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सारण जिले के परसा प्रखंड के भगवानपुर गांव के युवा अमन कुमार ने अपने दृढ़ संकल्प और मेहनत से एक मिसाल कायम की है। अमन ने भारतीय नौसेना में लेफ्टिनेंट बनकर न सिर्फ अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है, बल्कि अपने दिवंगत दादा-दादी के उस सपने को भी सच कर दिखाया है, जो देश की सेवा से जुड़ा था। भगवानपुर गांव निवासी किसान संतोष सिंह के छोटे पुत्र अमन कुमार ने जनवरी 2026 में लेफ्टिनेंट पद पर योगदान देकर पूरे गांव और जिले का नाम गौरवान्वित किया। अमन की यह उपलब्धि संघर्ष, अनुशासन और सकारात्मक सोच की मिसाल है।
निजी विद्यालय से हुई थी प्रारंभिक शिक्षा
अमन की प्रारंभिक शिक्षा परसा के एक निजी विद्यालय से हुई। मैट्रिक की परीक्षा उन्होंने परसा से पास की और इंटरमीडिएट की पढ़ाई उत्तर प्रदेश के वाराणसी से पूरी की। पढ़ाई के साथ-साथ उनके लक्ष्य की स्पष्टता हमेशा दिखाई देती थी। अमन की इस सफलता ने पूरे गांव में खुशी और उत्साह का माहौल पैदा कर दिया है। अमन ने बताया कि उनके दादा स्वर्गीय चंद्रिका प्रसाद सिंह रेलवे में दरोगा थे। दादी सावित्री देवी और दादा की प्रबल इच्छा थी कि उनका पोता नौसेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा करे। दादा उन्हें नौसेना से जुड़ी जानकारियां देते और निरंतर प्रेरित करते थे। अमन ने अपने दादा-दादी के सपने को साकार करने के लिए दिन-रात मेहनत की और उन्हीं के बताए मार्ग पर चलकर सफलता हासिल की।
अमन ने कहा कि माता-पिता ने हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और सही रास्ते पर चलने की सीख दी। परिवार के सहयोग और संस्कारों ने उनकी सफलता की नींव मजबूत की। उनके बड़े भाई विशाल सिंह और बहन सोनम सिंह ने बताया कि अमन बचपन से ही मेधावी था और लक्ष्य के प्रति हमेशा गंभीर रहता था। जनवरी 2025 में अमन ने जेईई की परीक्षा उत्तीर्ण कर एनआईटी जालंधर में दाखिला लिया। इस दौरान उन्होंने भारतीय नौसेना में अधिकारी बनने का सपना संजोए रखा और उसकी तैयारी में जुटे रहे। कठिन परिश्रम और लगातार अभ्यास का परिणाम यह रहा कि 12 जनवरी 2026 को उन्होंने लेफ्टिनेंट पद पर योगदान किया। अमन की यह सफलता आज के युवाओं के लिए प्रेरणा है कि सच्ची लगन, सकारात्मक सोच और निरंतर मेहनत से हर सपना पूरा किया जा सकता है।
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निजी विद्यालय से हुई थी प्रारंभिक शिक्षा
अमन की प्रारंभिक शिक्षा परसा के एक निजी विद्यालय से हुई। मैट्रिक की परीक्षा उन्होंने परसा से पास की और इंटरमीडिएट की पढ़ाई उत्तर प्रदेश के वाराणसी से पूरी की। पढ़ाई के साथ-साथ उनके लक्ष्य की स्पष्टता हमेशा दिखाई देती थी। अमन की इस सफलता ने पूरे गांव में खुशी और उत्साह का माहौल पैदा कर दिया है। अमन ने बताया कि उनके दादा स्वर्गीय चंद्रिका प्रसाद सिंह रेलवे में दरोगा थे। दादी सावित्री देवी और दादा की प्रबल इच्छा थी कि उनका पोता नौसेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा करे। दादा उन्हें नौसेना से जुड़ी जानकारियां देते और निरंतर प्रेरित करते थे। अमन ने अपने दादा-दादी के सपने को साकार करने के लिए दिन-रात मेहनत की और उन्हीं के बताए मार्ग पर चलकर सफलता हासिल की।
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माता-पिता को दिया सफलता श्रेयअमन ने कहा कि माता-पिता ने हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और सही रास्ते पर चलने की सीख दी। परिवार के सहयोग और संस्कारों ने उनकी सफलता की नींव मजबूत की। उनके बड़े भाई विशाल सिंह और बहन सोनम सिंह ने बताया कि अमन बचपन से ही मेधावी था और लक्ष्य के प्रति हमेशा गंभीर रहता था। जनवरी 2025 में अमन ने जेईई की परीक्षा उत्तीर्ण कर एनआईटी जालंधर में दाखिला लिया। इस दौरान उन्होंने भारतीय नौसेना में अधिकारी बनने का सपना संजोए रखा और उसकी तैयारी में जुटे रहे। कठिन परिश्रम और लगातार अभ्यास का परिणाम यह रहा कि 12 जनवरी 2026 को उन्होंने लेफ्टिनेंट पद पर योगदान किया। अमन की यह सफलता आज के युवाओं के लिए प्रेरणा है कि सच्ची लगन, सकारात्मक सोच और निरंतर मेहनत से हर सपना पूरा किया जा सकता है।
