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Bihar: सिविल सर्जन पर हमले के विरोध में बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ सख्त, 22 जुलाई को ओपीडी बहिष्कार की चेतावनी

Sun, 19 Jul 2026 04:58 PM IST
सारण ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा Published by: सारण ब्यूरो Updated Sun, 19 Jul 2026 04:58 PM IST
सार

अरवल में सिविल सर्जन पर हमले के विरोध में बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने कार्रवाई की मांग की है। दोषियों पर 21 जुलाई तक कार्रवाई नहीं होने पर 22 जुलाई को पूरे बिहार में ओपीडी बहिष्कार की चेतावनी दी गई है।

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Bihar Health Services Association strongly opposes attack on Civil Surgeon in Arwal, warns of OPD boycott
संघ के महासचिव डॉ रोहित कुमार

विस्तार

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अरवल सदर अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद सिविल सर्जन पर हुए हमले की बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने कड़ी निंदा की है। संघ ने दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई के साथ ही चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

संघ के महासचिव डॉ. रोहित कुमार ने बताया कि इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि यदि 21 जुलाई 2026 तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो 22 जुलाई को पूरे बिहार में ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा। हालांकि, इस दौरान आपातकालीन सेवाएं पूर्ववत जारी रहेंगी।

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चिकित्सकों और स्वास्थ्य अधिकारियों पर हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं
सारण जिले के मांझी प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (एमओआईसी) डॉ. रोहित कुमार ने बताया कि अरवल सदर अस्पताल में एक प्रसूता की सिजेरियन ऑपरेशन के बाद उत्पन्न चिकित्सीय जटिलताओं के कारण मौत हो गई थी। चिकित्सकों ने मरीज को बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। उन्होंने बताया कि घटना के बाद कुछ असामाजिक तत्वों ने कथित रूप से राजनीतिक संरक्षण में अस्पताल परिसर में हंगामा किया और सिविल सर्जन पर पीछे से हमला कर दिया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।

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डॉ. रोहित कुमार ने कहा कि चिकित्सकों और स्वास्थ्य अधिकारियों पर इस तरह की हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। किसी मरीज की मृत्यु या प्रतिकूल चिकित्सीय परिणाम को हिंसा का आधार बनाना कानून व्यवस्था के खिलाफ है। ऐसी घटनाएं स्वास्थ्यकर्मियों का मनोबल गिराती हैं और आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में बाधा उत्पन्न करती हैं।


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चिकित्सकों की सुरक्षा पूरे समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था का विषय
बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के महासचिव डॉ. रोहित कुमार ने राज्य सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें 24 घंटे के भीतर सभी आरोपितों की पहचान कर गिरफ्तारी, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर त्वरित कार्रवाई, दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई तथा सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करना शामिल है।

संघ ने अस्पतालों में हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी सुरक्षा प्रोटोकॉल और त्वरित पुलिस हस्तक्षेप की व्यवस्था लागू करने की भी मांग की है। डॉ. रोहित कुमार ने कहा कि चिकित्सकों की सुरक्षा केवल डॉक्टरों का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा विषय है। यदि स्वास्थ्यकर्मी सुरक्षित नहीं होंगे तो आम जनता को बेहतर और निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना मुश्किल होगा। उन्होंने राज्य सरकार से मामले में शीघ्र और निर्णायक कार्रवाई करने की अपील की है।

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