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Bihar: खतरे में 549 करोड़ का पुल! बिहार-UP को जोड़ने वाले पुल के स्पैन में बढ़ा गैप; भारी वाहनों की एंट्री बैन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज Published by: सारण ब्यूरो Updated Wed, 27 May 2026 12:45 PM IST
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सार

गोपालगंज के जादोपुर-मंगलपुर महासेतु के स्पैन में गैप बढ़ने के बाद भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। विशेषज्ञों ने स्टील प्लेट लगाने की सलाह दी है। प्रशासन ने 20 दिनों में मरम्मत पूरी करने का दावा किया है।

Bihar-UP Border News Traffic Diverted as 10-Year-Old bridge Develops Dangerous Gap
जादोपुर-मंगलपुर महासेतु में बढ़ा गैप - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

उत्तर बिहार और उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण जादोपुर-मंगलपुर महासेतु में तकनीकी खराबी सामने आने के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। गंडक नदी पर बने इस पुल के स्पैन के बीच अचानक गैप बढ़ने की सूचना मिलते ही एहतियातन भारी वाहनों के परिचालन पर तत्काल रोक लगा दी गई है। यह पुल बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन का प्रमुख मार्ग माना जाता है। ऐसे में तकनीकी खराबी की खबर के बाद प्रशासन और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।


विशेषज्ञों की टीम ने किया निरीक्षण
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एनआईटी पटना और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर पुल का निरीक्षण किया। जांच के बाद विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि स्पैन के बीच बढ़ रहे गैप को नियंत्रित करने के लिए तत्काल स्टील प्लेट लगाई जाए। गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने बताया कि पुल पूरी तरह कंक्रीट संरचना पर आधारित है, इसलिए बढ़े हुए गैप को तकनीकी रूप से कम करना संभव नहीं है। हालांकि स्टील प्लेट लगाने से कंपन को नियंत्रित किया जा सकेगा और पुल सुरक्षित रहेगा।
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पुल पर चौबीसों घंटे निगरानी
सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने पुल के दोनों ओर मजबूत लोहे की बैरिकेडिंग कर दी है। साथ ही पूरे क्षेत्र की 24 घंटे निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके। प्रशासन का कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए जाते तो पुल को गंभीर नुकसान पहुंच सकता था।
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20 दिनों में मरम्मत का दावा
जिला प्रशासन ने दावा किया है कि अगले 20 दिनों के भीतर मरम्मत कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद भारी वाहनों की आवाजाही फिर से सामान्य कर दी जाएगी।

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हालांकि, पुल पर भारी वाहनों की रोक से व्यापार और माल ढुलाई प्रभावित होने लगी है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर के अलावा बिहार के गोपालगंज, सिवान, बेतिया, बगहा और नेपाल जाने वाले सैकड़ों वाहन प्रतिदिन इसी मार्ग का उपयोग करते हैं।

549 करोड़ की लागत से बना था पुल
गौरतलब है कि इस महासेतु का निर्माण करीब 549 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया था। इसका उद्घाटन मार्च 2016 में हुआ था। उद्घाटन के करीब एक दशक के भीतर पुल में आई इस तकनीकी खराबी ने निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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