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Bihar: जदयू विधायक पप्पू पांडेय को कोर्ट से राहत, भाई और CA राहुल पर गिरफ्तारी का खतरा! 27 मई पर टिकी नजरें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज Published by: सारण ब्यूरो Updated Tue, 19 May 2026 12:09 PM IST
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सार

Bihar: गोपालगंज के चर्चित जमीन कब्जा और रंगदारी मामले में जदयू विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय को फिलहाल अदालत से राहत मिली है और उनकी गिरफ्तारी पर रोक बरकरार रखी गई है।  

stay on arrest of JDU MLA Pappu Pandey in Gopalganj remains in effect setback for Satish Pandey and CA Rahul
अपने भाई के साथ जदयू विधायक - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

बिहार के गोपालगंज जिले से इस वक्त की एक बड़ी राजनीतिक और कानूनी खबर सामने आ रही है। कुचायकोट विधानसभा क्षेत्र से जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के बाहुबली विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय को अदालत से फिलहाल बड़ी राहत मिल गई है। भू-माफियाओं को संरक्षण देने और रंगदारी से जुड़े एक चर्चित मामले में विधायक की गिरफ्तारी पर कोर्ट ने रोक बरकरार रखी है। इस मामले की अगली सुनवाई अब आगामी 27 मई को मुकर्रर की गई है।



गिरफ्तारी की तलवार लटकी
एक तरफ जहां जदयू विधायक पप्पू पांडेय को तात्कालिक राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ इस केस के सह-आरोपियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। मामले के मुख्य आरोपी और विधायक के भाई सतीश पांडेय तथा चार्टर्ड अकाउंटेंट राहुल तिवारी को अदालत से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अग्रिम जमानत याचिका नामंजूर होने के बाद अब इन दोनों आरोपियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है और पुलिस किसी भी वक्त उन्हें हिरासत में ले सकती है।
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क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद कुचायकोट थाना क्षेत्र के बेलवा इलाके से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि बेलवा में स्थित करीब 16 एकड़ की कीमती जमीन पर भू-माफियाओं द्वारा अवैध कब्जा करने का प्रयास किया गया। इस जमीन विवाद में न सिर्फ जबरन जमीन हड़पने की कोशिश की गई, बल्कि विरोध करने पर पीड़ितों को जान से मारने की धमकी भी दी गई। पुलिस जांच और दर्ज प्राथमिकी के अनुसार विधायक पप्पू पांडेय पर भू-माफियाओं को सीधे तौर पर संरक्षण देने और अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप है। वहीं सतीश पांडेय और सीए राहुल तिवारी पर जमीन की हेराफेरी, धमकी और अवैध कब्जे की साजिश में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है।
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27 मई की सुनवाई पर टिकी नजरें
इस हाई-प्रोफाइल मामले को लेकर पूरे जिले के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है। जहां पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबाव बना रही है, वहीं विधायक खेमा कानूनी दांव-पेंच के जरिए राहत पाने की कोशिश में जुटा हुआ है। अब सबकी नजरें 27 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां कोर्ट विधायक की गिरफ्तारी पर लगी रोक को आगे बढ़ाने या हटाने पर फैसला सुना सकता है। स्थानीय पुलिस भी अदालत के अगले रुख को देखते हुए अपनी आगे की रणनीति तैयार कर रही है।

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